कडाना बांधगुजारत के किसानों के लिए एक राहत भरी खबर आई है. दरअसल, राज्य में खड़ी खरीफ फसलों को सूखने से बचाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कडाना बांध से सिंचाई का पानी छोड़ने का आदेश दिया है. इस फैसले के तहत खेड़ा और आनंद जिलों के किसानों को कुल 198 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध कराया जाएगा. मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, 10 अक्टूबर से माही कमांड क्षेत्र में सिंचाई के लिए बांध से 5,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा. सरकार के इस कदम का उद्देश्य फसलों को जरूरत के समय पानी उपलब्ध कराना और किसानों को संभावित नुकसान से राहत दिलाना है.
इसके तहत माही कमांड क्षेत्र की करीब 80 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा. सरकार का उद्देश्य फसलों को जरूरत के समय पर्याप्त पानी देकर उन्हें सूखने से बचाना और किसानों को संभावित नुकसान से राहत दिलाना है. खरीफ फसलों की बढ़वार के दौरान पानी की कमी होने से उत्पादन पर असर पड़ सकता है. ऐसे में बांध से पानी छोड़ने का यह फैसला किसानों के लिए मददगार साबित हो सकता है.
सिंचाई के साथ-साथ गुजरात सरकार खेती में इस्तेमाल होने वाले खाद और कीटनाशकों की उपलब्धता को लेकर भी नई योजना पर काम कर रही है. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और अस्थिरता के कारण दुनियाभर में खाद की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ा है. इसे देखते हुए राज्य सरकार जैव उर्वरक (बायो-फर्टिलाइजर) और जैव कीटनाशक (बायो-पेस्टिसाइड) के उत्पादन और इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहती है.
सरकार का मानना है कि खेती में इस्तेमाल होने वाले जरूरी उत्पादों के लिए दूसरे देशों और पारंपरिक संसाधनों पर निर्भरता कम करना जरूरी है. इसके लिए गुजरात में जैव तकनीक पर आधारित एक एकीकृत व्यवस्था विकसित करने की योजना बनाई गई है.
गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन (GSBTM), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत इस प्रस्तावित व्यवस्था को विकसित करेगा. इसके लिए पांच साल में करीब 50 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान है. इस योजना के तहत कृषि विश्वविद्यालयों, जैव तकनीक संस्थानों, स्टार्टअप, छोटे-बड़े उद्योगों, सहकारी समितियों और किसानों को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जाएगी. इसका उद्देश्य जैव उर्वरकों और जैव कीटनाशकों से जुड़े शोध को बढ़ावा देना और उन्हें किसानों तक पहुंचाना है.
गुजरात सरकार की प्रस्तावित योजना में सूक्ष्मजीवों से जुड़े संसाधनों की खोज, शोध, उत्पाद तैयार करने, उत्पादन और खेतों में उनकी उपयोगिता की जांच जैसे काम शामिल होंगे. इसके बाद किसानों के बीच इन उत्पादों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य खेती के लिए जरूरी इनपुट की उपलब्धता को मजबूत करना और जैव उर्वरकों और जैव कीटनाशकों के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ाना है. हालांकि, इस योजना के नतीजे इसके क्रियान्वयन और किसानों तक उत्पादों की पहुंच पर निर्भर करेंगे. (ANI)
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