शिवराज सिंह चौहानभोपाल में केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (सीआईएई) ने अपना 51वां स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से मनाया. यह अवसर कृषि अभियांत्रिकी अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी प्रसार के क्षेत्र में पांच दशकों से अधिक की उल्लेखनीय उपलब्धियों का प्रतीक बना. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान रहे. उन्होंने कहा कि कृषि मशीनीकरण उत्पादकता वृद्धि, संसाधनों के उपयोग और किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत आधार है. उन्होंने नवाचार, डिजिटल कृषि, सटीक कृषि तकनीकों और जलवायु-अनुकूल तकनीकों के माध्यम से कृषि के आधुनिकीकरण के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने विशेष रूप से लघु और सीमांत किसानों, महिला कृषकों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए किफायती और व्यवहार्य मशीनीकरण समाधानों के विकास में सीआईएई के योगदान की सराहना की.
इस अवसर पर कृषि मंत्री ने अनाज प्रसंस्करण प्रयोगशाला का उद्घाटन किया और कपास खेत में कॉटन पिकर मशीन का लोकार्पण और सजीव प्रदर्शन किया. उन्होंने अनुसंधान–उद्योग सहयोग को मजबूत करने, कस्टम हायरिंग केंद्रों को बढ़ावा देने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए तकनीकों को अंतिम छोर तक पहुंचाने पर बल दिया.
डॉ. मेहता ने किसान-केंद्रित प्रौद्योगिकियों के विकास, सतत कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने, किसानों के मजदूरी में कमी और ग्रामीण समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया. संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों ने लघु और सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों से जोड़ने में अहम योगदान दिया है.
आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने नवाचार-आधारित और जलवायु-संवेदनशील मशीनीकरण को भविष्य की कृषि उन्नति का प्रमुख आधार बताया. इस अवसर पर संस्थान की विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन किया गया. प्रतिष्ठित प्रो. ए. सी. पंड्या स्मृति व्याख्यान में कृषि मशीनीकरण के समकालीन विकास, चुनौतियों और भावी संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई और आगामी शोध के लिए रोडमैप प्रस्तुत किया गया.
समारोह के दौरान अनुसूचित जाति के किसानों को कृषि आदान किट वितरित की गईं. प्रगतिशील किसानों और कृषि यंत्र निर्माताओं ने अपने अनुभव साझा किए. संस्थान की प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी लगाई गई और उन्नत कृषि यंत्रों का सजीव प्रदर्शन किया गया. किसान संगोष्ठी में कृषि मशीनीकरण की आवश्यकताओं और सतत कृषि विकास की रणनीतियों पर विचार-विमर्श हुआ. इस आयोजन में 500 से अधिक किसान और कृषि यंत्र निर्माता शामिल हुए. प्रगतिशील किसानों और निर्माताओं को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया.
समारोह की अध्यक्षता डॉ. एम. एल. जाट, सचिव, कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (डेयर) और महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली ने की. सह-अध्यक्षता डॉ. एस. एन. झा, उप महानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी), आईसीएआर ने की. सीआईएई के निदेशक डॉ. सी. आर. मेहता ने संस्थान की 50 वर्षों की उपलब्धियों और विकास यात्रा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया.
कार्यक्रम का समापन डॉ. के. पी. सिंह, सहायक महानिदेशक (फार्म अभियांत्रिकी), आईसीएआर द्वारा प्रस्तुत औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ. गोल्डन जुबली समारोह ने सीआईएई की पांच दशकों की उपलब्धियों को नई दिशा देते हुए भविष्य की कृषि के लिए नवाचार, समावेशिता और सतत विकास का स्पष्ट संदेश दिया.
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