एशिया की सबसे बड़ी जीरा मंडी ऊंझा में 3 करोड़ की चोरी, वकील समेत 5 आरोपी गिरफ्तार

एशिया की सबसे बड़ी जीरा मंडी ऊंझा में 3 करोड़ की चोरी, वकील समेत 5 आरोपी गिरफ्तार

गुजरात के मेहसाणा जिले की ऊंझा जीरा मंडी में 3 करोड़ रुपये के जीरे की बड़ी चोरी का खुलासा हुआ है. पुलिस ने एक वकील समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 फरार हैं. जानिए पूरा मामला.

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एशिया की सबसे बड़ी जीरा मंडी ऊंझा में 3 करोड़ की चोरी, वकील समेत 5 आरोपी गिरफ्तारऊंझा जीरा मंडी में बड़ी चोरी

गुजरात के मेहसाणा जिले में जीरा चोरी की चौंकाने वाली खबर सामने आई है. पुलिस ने रविवार को बताया कि मेहसाणा जिले के ऊंझा शहर की जीरा मंडी में चोरी की बड़ी वारदात हुई. ऊंझा मंडी एशिया का सबसे बड़ा जीरा ट्रेडिंग सेंटर है. पुलिस के मुताबिक, मंडी के गोदामों में कथित तौर पर लूटपाट करने और 3 करोड़ रुपये का मसाले का स्टॉक चुराने के आरोप में एक वकील और चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

मेहसाणा के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस दिनेशसिंह चौहान ने 'PTI' को बताया कि पाटन के एक वकील समेत आरोपियों ने कथित तौर पर 12 दिसंबर, 2025 और 2 जनवरी के बीच ऊनावा हाईवे पर दो गोदामों में घुसने के लिए डुप्लीकेट चाबियों का इस्तेमाल किया और रात में ट्रकों में भरकर कई सौ बोरी जीरा चुरा लिया. उन्होंने बताया कि जांच के बाद पिछले महीने आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.

बड़े नेटवर्क का खुलासा

अधिकारी ने बताया कि चुराया गया मसाला दो व्यापारियों का था, जिन्होंने स्टॉक गायब होने का पता चलने के बाद 4 जनवरी को ऊनावा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी और दो FIR दर्ज की गई थीं. चौहान ने बताया कि लोकल क्राइम ब्रांच को जानकारी मिली थी कि कुछ लोग ऊंझा में व्यापारियों से संपर्क कर रहे थे और असामान्य रूप से कम कीमतों पर जीरा बेच रहे थे.

उन्होंने कहा, "सीसीटीवी फुटेज और पुलिस को मिली जानकारी के आधार पर एक ट्रक ड्राइवर की पहचान की गई और उससे पूछताछ की गई. इससे पुलिस एक आरोपी जुम्मा खान तक पहुंची, जिसके बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ."

उन्होंने बताया कि पुलिस ने मुख्य आरोपी, पाटन जिला अदालत में प्रैक्टिस करने वाले वकील इकराम मेमन को वजाहात खान, जुम्मा खान, सादिक मेमन और गौरव पटेल के साथ गिरफ्तार किया है. उन्होंने बताया कि दो अन्य, दिल्ली के इमरान जमील और उसका एक अज्ञात साथी फरार हैं.

सुरक्षा गार्ड भी शक के घेरे में

चौहान ने कहा, "दिसंबर के मध्य से 2 जनवरी तक, व्यापारियों ने गोदामों पर एक सुरक्षा गार्ड तैनात किया था. हालांकि, वह वहीं रहने के बजाय हर दिन ताले चेक करके चला जाता था." उन्होंने बताया कि जांच में पता चला कि आरोपियों ने असली तालों की जांच करने के बाद डुप्लीकेट चाबियां बनवाई थीं और उनका इस्तेमाल करके रात में गोदामों में घुसते थे.

अधिकारी ने बताया, "मजदूरों और ट्रकों को लाया गया और 10 ट्रिप में लगभग 3 करोड़ रुपये का जीरा चुराया गया."

पुलिस के अनुसार, दिल्ली के जमील द्वारा योजना बनाने के बाद चोरी को अंजाम देने के लिए एक स्थानीय गिरोह बनाने में आरोपी वकील ने अहम भूमिका निभाई. पुलिस ने बताया कि जमील, जो फरार है, चाबियां बनाने में एक्सपर्ट है और उसने कथित तौर पर डुप्लीकेट चाबियां बनाईं. पुलिस ने यह भी बताया कि गौरव पटेल का काम पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखना था, जबकि जुम्मा खान ने ट्रक और मजदूरों का इंतजाम किया था.

जीरे के 121 बोरे जब्त

दूसरा आरोपी सादिक मेमन, जिसका आपराधिक बैकग्राउंड है, उसने चोरी को अंजाम देने में मदद की, और वजाहत खान चोरी किए गए जीरे को बाजार में बेचने में शामिल था. चौहान ने बताया कि आरोपियों ने खुद को किसान बताया और चोरी किए गए जीरे का कुछ हिस्सा डीसा और उंझा मंडी में बेचा.

उन्होंने कहा कि पुलिस ने अब तक गिरफ्तार आरोपियों से 45 लाख रुपये कैश बरामद किए हैं और बिना बिके जीरे के 121 बोरे जब्त किए हैं.

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