मुख्यमंत्री सिद्धारमैयासंयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने गुरुवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात कर उनसे अपील की है कि वे केंद्र सरकार पर दबाव बनाएं, ताकि किसानों की सबसे ज़रूरी मांगों को पूरा किया जा सके. किसानों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी, खेती के कर्ज की माफी और फसल नुकसान की भरपाई के लिए क्लाइमेट कंपेनसेशन पॉलिसी लागू करना शामिल है. संयुक्त किसान मोर्चा के कन्वीनर जगजीत सिंह डल्लेवाल और को-कन्वीनर कुरुबरा शांता कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचा और उनसे सीधी बातचीत की.
बैठक के बाद किसानों की मांगों से जुड़ा एक लिखित ज्ञापन (मेमोरेंडम) मुख्यमंत्री को सौंपा गया, जिसे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने मीडिया के साथ भी साझा किया. कुल मिलाकर किसान संगठनों ने सरकार से साफ कहा कि अब किसानों को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और कानूनी फैसलों की ज़रूरत है. मेमोरेंडम में मोर्चा ने खेती की मुश्किलों पर चिंता जताई और नेशनल लेवल पर तुरंत पॉलिसी में दखल देने की मांग की.
किसान संगठन ने दावा किया कि हम भारत के किसान, आपको बताना चाहते हैं कि खेती के सेक्टर को लंबे समय से लगातार सरकारों ने नजरअंदाज किया है, जिससे 400,000 से ज्यादा किसान आत्महत्या करने को मजबूर हुए हैं. इसमें आगे कहा गया है कि खेती का सेक्टर भारत के आर्थिक विकास की रीढ़ है. इसमें आगे बताया गया है कि Covid-19 महामारी के दौरान भी, जब ज़्यादातर सेक्टर बंद थे, खेती 3.6 परसेंट की दर से बढ़ती रही.
CM से केंद्र सरकार के साथ दखल देने की अपील करते हुए, संगठन ने लिखा कि हम आपसे रिक्वेस्ट करना चाहते हैं कि आप केंद्र सरकार पर दबाव डालें, ताकि खेती के सेक्टर में सुधार और किसानों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए नीचे दी गई मांगें पूरी की जा सकें. अपनी मुख्य मांगों में मोर्चा ने सभी फसलों के लिए MSP की गारंटी देने वाला कानून बनाने और सभी किसानों से पूरी खरीद की मांग की.
पिछली सिफारिश का हवाला देते हुए, उसमें कहा गया है कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए यह पक्का करने के लिए कानूनी नियम बनाए जाने चाहिए कि फसल खरीद से जुड़े किसानों और खरीदारों के बीच कोई भी लेन-देन सरकार द्वारा घोषित MSP से कम न हो.
SKM ने MS स्वामीनाथन कमीशन के फॉर्मूले को लागू करने की भी मांग की, जिसके तहत MSP किसानों द्वारा किए गए उत्पादन की लागत का 1.5 गुना तय किया जाना चाहिए. इसके अलावा, किसानों के लोन पूरी तरह माफ करने, 2013 के लैंड एक्विजिशन एक्ट के नियमों को फिर से लागू करने की मांग की गई, जिससे किसानों की सहमति और ज्यादा मुआवजा पक्का हो, और गन्ने के लिए कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल का ज्यादा फेयर एंड रिमुनरेटिव प्राइस (FRP) तय किया जाए और पेमेंट समय पर हो.
मौसम से जुड़ी मुश्किलों पर मोर्चा ने कहा कि सरकार को बढ़ते सूखे और बाढ़ से होने वाले नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा देना चाहिए, और फसल बीमा स्कीम में बड़े सुधार करने चाहिए ताकि इसे और ज्यादा किसान-फ्रेंडली बनाया जा सके. इसमें हाई-टेंशन ट्रांसमिशन लाइनों से प्रभावित ज़मीन के लिए भी सही मुआवजे की मांग की और ज़ोर दिया कि सीड बिल और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल में किसानों से जुड़े किसी भी नियम को आम सहमति के बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए. (PTI)
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