बारिश के लिए 84 गांव के लोगों ने किया खास अनुष्ठानइस साल मॉनसून ने मानो मुंह ही फेर लिया है. देश के कई राज्यों में मॉनसून की बारिश न होने की वजह से सूखे जैसे हालात बने हुए हैं. सूखे से देश के किसान काफी परेशान हैं. बारिश को लेकर कई जगह लोग अगल-अलग परंपरागत तरीके अपना रहे हैं. इसमें लोग टोटके का सहारा भी ले रहे हैं. ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के किसानों का है जहां बारिश ने मुंह फेर लिया है. इससे वहां के किसान परेशान हैं. खेत सूख रहे हैं. इससे निजात पाने और बारिश के मौसम में अच्छी बारिश के लिए जिले के 84 गांव के ग्रामीणों ने विशेष अनुष्ठान किया.
बस्तर में इस साल जुलाई में ही बरसात हुई. उसके बाद अगस्त के महीने में बरसात न के बराबर हुई है. पानी की कमी से खेतों में अब दरारें पड़ गई हैं. आगे बारिश नहीं हुई तो फसल बर्बाद हो जाएगी. इसलिए बारिश मंगाने के लिए किसान और ग्रामीण खास तरह का पूजा-पाठ कर रहे हैं. अलग-अलग तरह के अनुष्ठान किए जा रहे हैं.
बस्तर में बारिश हो, इसके लिए जिले भर में किसान अब पूजा अनुष्ठान में लगे हुए हैं. दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा क्षेत्र के लोग बारिश के लिए अपने आराध्य भीमसेन को मनाने उदेला के पहाड़ पर पहुंचे हैं. इलाके के 84 गांव के साथ-साथ दंतेवाड़ा, कटेकल्याण क्षेत्र के कई गांव के लोग भीमसेन को मनाने उदेला पहुंचे हैं. यहां 70 से 80 किलोमीटर दूर बुरगुम, पोटाली, निलावाया, रेवाली, अरनपुर, समेली, पालनार सहित गोंगपाल, मैलेवाड़ा जैसे 84 गांवों से लोग बलि देने के लिए मुर्गा, बकरा लेकर उदेला के पहाड़ पर पहुंचे हैं.
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दरअसल, उदेला के पहाड़ में पांच फीट का पत्थर है जिसे ग्रामीण भीमसेन भगवान स्वरूप मानते हैं. इस पत्थर को पहले मटके में पानी लाकर नहलाया जाता है. इसके बाद कीचड़ का लेप भी लगाया जाता है. वहीं भीमसेन भगवान को शहद और तेल से स्नान भी कराया जाता है. पहाड़ के ऊपर ही हवन होता है. यह काम सिर्फ पुजारी करते हैं. घंटों तक भीमसेन के सामने नृत्य किया जाता है. फिर बलि दी जाती है.
बारिश के लिए भीमसेन को मनाने का काम जारी है. यहां पारंपरिक ढोल-बाजे के साथ क्षेत्र के लोग पहुंचते हैं. सुबह से ही ग्रामीणों की भीड़ उदेला पहुंचने लगती है. क्षेत्र के लोगों की भीमसेन के प्रति आस्था सौ साल से भी अधिक समय से है. कुआकोंडा परगना के मांझी लक्ष्मीनाथ ने बताया कि उनके पूर्वज भी बारिश नहीं होने पर इसी भीमसेन को मनाते थे. ऐसा माना जाता है कि भगवान भीमसेन यदि पूजा से खुश हो गए तो बारिश जरूर होगी.
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