Bakrid 2023 : बकरीद के मौके पर खास 5 नस्ल  के बकरे कराएंगे मोटा मुनाफा, जानें डिटेल 

Bakrid 2023 : बकरीद के मौके पर खास 5 नस्ल  के बकरे कराएंगे मोटा मुनाफा, जानें डिटेल 

बकरीद के दौरान उत्तर भारत में बकरों की चार बड़ी मंडी लगती हैं. इन्हीं मंडियों से निकला बकरा देश के दूसरे इलाकों में बिकने के लिए जाता है. इतना ही नहीं बकरीद के मौके पर अरब देशों के लिए भी यहीं से बकरा जाता है. बकरों की ये बड़ी मंडी- जसवंत नगर (यूपी), कालपी (मध्य प्रदेश), महुआ, अलवर (राजस्थान) और मेवात (हरियाणा) मंडी हैं. 

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Bakrid 2023 : बकरीद के मौके पर खास 5 नस्ल  के बकरे कराएंगे मोटा मुनाफा, जानें डिटेल बकरे-बकरियों का फाइल फोटो. फोटो क्रेडिट-किसान तक

बकरी पालन करने वालों के लिए बकरीद एक बड़ा कारोबारी सीजन होता है. यह वो मौका होता है जब देश के साथ ही विदेशों से भी बड़ी संख्या  में बकरों की डिमांड आती है. जानकारों की मानें तो इस मौके पर आम दिनों के मुकाबले बकरों के 25 से 30 फीसद तक ज्यादा रेट मिलते हैं. इस दौरान बकरों की कुछ खास नस्ल हैं जिनकी ज्यादा डिमांड होती है. अगर खास नस्ल का बकरा कुर्बानी की शर्तों पर खरा उतरता है तो पशु पालकों को और भी अच्छे दाम मिल सकते हैं. 

एक्सपर्ट की मानें तो जमनापरी और जखराना आदि नस्ल  को सिर्फ मीट के लिए ही पाला जाता है. देश में बकरों की 5 ऐसी नस्ल हैं जो मीट के लिए देश ही नहीं विदेशों में भी पसंद की जाती हैं. बस शर्त यह होती है कि बकरीद के लिए बेचा जा रहा बकरा एक साल से ऊपर का हो. शरीर का कोई भी अंग कटा हुआ न हो और देखने में खूबसूरत हो. 

अरब तक है यूपी के बरबरे बकरे की डिमांड 

देश में बकरे-बकरियों की करीब 37 नस्ल पाई जाती हैं. इसमे से कुछ सिर्फ दूध के लिए पाली जाती हैं तो कुछ दूध और मीट दोनों के लिए पाले जाते हैं. यूपी की खास नस्ल बरबरी है. इसी नस्ल के बकरे को बरबरा बकरा कहा जाता है. इसकी देश के अलावा अरब देशों में भी खासी डिमांड रहती है. इसके साथ ही बंगाल का ब्लैक बंगाल, पंजाब का बीटल बकरा भी डिमांड में रहता है. 

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बरबरा बकरा- इस नस्ल के बकरे की हाइट दो से ढाई फुट तक होती है. हाइट ज्यादा न होने से खूब मोटा ताजी दिखता है. एक साल की उम्र में ये कुर्बानी के लिए तैयार हो जाता है. इसके कान छोटे और खड़े होते हैं. ये आगरा, इटावा, फिरोजाबाद, मथुरा और कानपुर में पाया जाता है. इस बकरे के रेट कम से कम 12 हजार रुपये से शुरु होते हैं. बकरीद के मौके पर इस नस्ल का बकरा 50 हजार रुपये से भी ज्या दा का बिक जाता है.

यूपी का ही है जमनापरी बकरा भी 

जमनापारी- जमनापारी नस्ल यूपी के इटावा में मिलती है. इसके अलावा यह मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में भी पाई जाती है. ये लम्बा होता है और इसके कान मीडियम साइज के होते हैं. दिखने में मोटा और भारी होता है. इसका रंग आमतौर पर सफेद होता है. लेकिन कभी-कभी कान और गले पर लाल रंग की धारियां भी होती हैं. बकरे-बकरी दोनों के पैर के पीछे ऊपर लम्बे बाल होते हैं. इसकी नाक उभरी हुई होती है और उसके आसपास बालों के गुच्छे होते हैं. ये 15 से 20 हजार रुपये में आसानी से मिल जाता है. 

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दूध ही नहीं मीट के लिए भी है जखराना की पहचान 

बकरे की जखराना नस्ल अलवर, राजस्थान के एक गांव जखराना से निकली है. इसलिए इसका नाम भी जखराना पड़ गया है. असली जखराना की पहचान यह है कि यह पूरी तरह से काले रंग की होती है. लेकिन इसके कान और मुंह पर सफेद रंग के धब्बे होते हैं. इसके अलावा जखराना बकरी के पूरे शरीर पर किसी भी दूसरे रंग का कोई धब्बा नहीं मिलेगा. सीआईआरजी के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. गोपाल दास ने किसान तक को बताया कि जखराना एक ऐसी नस्ल है जिसके बकरे और बकरी एक साल में 25 से 30 किलो वजन तक पर आ जाते हैं. बच्चे देने की क्षमता के बारे में बात करें तो 60 फीसद जखराना बकरी दो या तीन बच्चे‍ तक देती हैं. बकरीद के मौके पर जखराना बकरे भी खूब बिकते हैं. 

राजस्थान की शान है सोजत बकरा 

सोजत नस्ल का बकरा राजस्था्न के नागौर, पाली, जैसलमेर और जोधपुर में पाया जाता है. यह जमनापरी की तरह से सफेद रंग का बड़े आकार वाली नस्ल का बकरा है. इसे खासतौर पर मीट के लिए पाला जाता है. इस नस्ल का बकरा औसत 60 किलो वजन तक का होता है. वहीं बकरी दिनभर में एक लीटर तक दूध देती है. सोजत की नार्थ इंडिया समेत महाराष्ट्रा में भी खासी डिमांड रहती है.

बकरीद के लिए हाट में खूब आते हैं सिरोही-तोतापरी बकरे 

सिरोही- ये ब्राउन और ब्लैक कलर में पाया जाता है. इस पर सफेद रंग के धब्बे होते हैं. इस नस्ल का बकरा दिखने में खासा ऊंचा होता है. ये नस्ल सिर्फ राजस्थान में ही पाई जाती है. ये बकरा बाजार में कम से कम 12 से 15 हजार रुपये में मिल जाता है. 

तोतापरी- इस नस्ल का बकरा पतला और लम्बा होता है. ऊंचाई कम से कम 3.5 से 4 फुट तक होती है. बाजार में बिकने के लिए तैयार होने में ये कम से कम 3 साल लेता है. ये नस्ल हरियाणा के मेवात और राजस्थान के भरतपुर जिले में पाई जाती है. इसकी बिक्री 12 से 13 हजार रुपये से शुरु होती है. 

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