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Meat Production: बीते साल के मुकाबले एक करोड़ बकरे, 25 करोड़ मुर्गे ज्यादा खा गए, पढ़ें डिटेल

Meat Production: बीते साल के मुकाबले एक करोड़ बकरे, 25 करोड़ मुर्गे ज्यादा खा गए, पढ़ें डिटेल

तमाम विरोध के बावजूद हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी मीट प्रोडक्शन बढ़ा है. हिमाचल में तो चिकन का प्रोडक्शन डबल हो गया है. महाराष्ट्र को पीछे छोड़ते हुए यूपी मीट उत्पादन के मामले में पहले नंबर पर आ गया है.  

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हाल ही में डेयरी और पशुपालन मंत्रालय ने एक सालाना रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट के मुताबिक देश में मीट का प्रोडक्शन बढ़ गया है. साल 2022-23 के दौरान मीट प्रोडक्शन में पांच लाख टन की बढ़ोतरी हुई है. मीट प्रोडक्शन का ये आंकड़ा अब 90.77 लाख टन पर पहुंच गया है. रिपोर्ट की मानें तो बीते एक साल में हम भारतीय एक करोड़ बकरे और 25 करोड़ मुर्गे ज्यादा खा गए. घरेलू बाजार में बकरे और मुर्गे की डिमांड ज्यादा रहती है. हालांकि इस दौरान सात लाख भैंस का मीट भी ज्यादा बिका है. 

लेकिन गौरतलब रहे कि भैंस का मीट बड़ी मात्रा में एक्सपोर्ट भी होता है. बकरे और मुर्गे (चिकन) का मीट भी एक्सपोर्ट होता है, लेकिन उसकी मात्रा भैंस के मुकाबले बहुत कम है. साल 2021-22 में 5.62 फीसद की दर से बढ़ोतरी हुई थी, जबकि इस साल यानि 2022-23 में 5.13 फीसद की दर से मीट प्रोडक्शन में बढ़ोतरी हुई है. 

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एक साल में खाए 3.31 करोड़ मुर्गे  

जैसा की पशुपालन मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में लगातार मीट प्रोडक्शान बढ़ रहा है. डिमांड है तो प्रोडक्शन भी बढ़ रहा है, या कह लें कि खपत के हिसाब से हर साल मीट प्रोडक्शन में बढ़ोतरी हो रही है. अब अगर सिर्फ मुर्गे के मीट चिकन की बात करें तो देश में सबसे ज्या‍दा इसी को पसंद भी किया जाता है और खाया भी जाता है. पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट रनपाल डाहंडा बताते हैं, ‘सभी तरह के मीट में चिकन सबसे सस्ता आइटम है. इसमे किसी दूसरे मीट की मिलावट भी नहीं हो सकती है. 

तीसरी सबसे बड़ी बात ये कि चिकन में प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है.’ रिपोर्ट के आंकड़ों पर जाएं तो साल 2021-22 में 3.06 करोड़ मुर्गों का 48 लाख टन चिकन खाया गया था. जबिक साल 2022-23 में 3.31 करोड़ मुर्गों का 50 लाख टन चिकन खाया गया है. आंकड़ा बताता है कि इस एक साल में दो लाख टन चिकन ज्यादा खाया गया है. 

1.11 करोड़ बकरे तो सात लाख भैंस की बढ़ी डिमांड

पोल्ट्री के बाद सबसे ज्यादा खाया जाने वाला मीट भैंस का है. हर साल एक करोड़ से ज्यादा भैंस मीट के लिए काटी जाती हैं. भैंस का मीट एक्सपोर्ट भी होता है. रिपोर्ट के मुताबिक बीते साल के मुकाबले सात लाख भैंस ज्यादा काटी गई हैं. साल 2021-22 में ही 1.29 करोड़ भैंस मीट के लिए काटी गईं थी. जबकि साल 2022-23 में ये आंकड़ा बढ़कर 1.36 करोड़ पर पहुंच गया है. इसी तरह से एक साल में 1.11 करोड़ बकरों की डिमांड बढ़ी है. साल 2021-22 में 11.13 करोड़ तो साल 2022-23 में 12.34 करोड़ बकरों को मीट के लिए काटा गया था. 

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नॉर्थ-ईस्ट में बढ़ गया कैटल मीट का प्रोडक्शन 

पशुपालन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक देश में बीते साल के मुकाबले कैटल मीट का प्रोडक्शन घट गया है. लेकिन कैटल मीट के प्रोडक्शन में ये कमी नॉर्थ-ईस्ट  के राज्यों को छोड़कर आई है. नॉर्थ-ईस्ट के सिर्फ मणिपुर और नागालैंड में ही कैटल मीट का प्रोडक्शन घटा है. बाकी अरुणाचल प्रदेश में 10.72 हजार टन से 12.58 हजार टन पर पहुंच गया है. असम में 3.56 हजार टन से 3.69 टन, मेघालय में 20.47 हजार टन से 27.63 हजार टन, मिजोरम 3.87 हजार टन से 4.19 हजार टन, सिक्किम में 1.05 हजार टन से 1.34 हजार टन पर पहुंच गया है. देश में साल 2021-22 में 27.37 लाख टन कैटल मीट का प्रोडक्शन हुआ था और साल 2022-23 में 21.69 लाख टन हुआ है.