उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी देश की सबसे बड़ी आबादी का राज्य है। महज 11 फीसदी कृषि योग्य भूमि में यूपी देश का 21 फीसदी खाद्यान्न उत्पादन करता है. समय पर मौसम, बारिश, अतिवृष्टि, अनावृष्टि या ओलावृष्टि की जानकारी नहीं मिलेगी तो हम किसानों के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे. सीएम ने कहा कि यूपी में एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चरल, वेजिटेबल उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं. देश की कुल कृषि भूमि का 11 फीसदी हिस्सा यूपी के पास है, जिसमें 86 फीसदी भूमि सिंचित है. यहां किसान तीन फसल उत्पादन करता है. यूपी देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 35-36 फीसदी योगदान देने की क्षमता रखता है, आवश्यकता है कि इसे तकनीक के साथ जोड़कर समयबद्ध रूप से बढ़ाया जाए.
इसमें मौसम विभाग की भी बड़ी भूमिका है. यूपी में अच्छी तकनीक लाने, क्वाटंम कंप्यूटिंग या मौसम विभाग के अन्य कार्यक्रम लागू होंगे तो राज्य सरकार हरसंभव सहयोग करेगी. सीएम योगी ने लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का शुभारंभ किया. इसे लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र को परिवर्तित कर स्थापित किया गया है. इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा कि हम लोग सीजन में अतिवृष्टि-अनावृष्टि, आकाशीय बिजली आदि के संबंध में मेट्रोलॉजिकल व अन्य विभागों की बैठक में चर्चा करते थे कि समय पर सटीक जानकारी मिलने से सही रणनीति संभव होती है.
आज लखनऊ खुद को मेट्रोलॉजिकल रीजनल सेंटर के रूप में स्थापित कर रहा है. यह यूपी के माध्यम से विकसित भारत की संकल्पना को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. सीएम योगी ने कहा कि आजादी के बाद इस विषय पर अपेक्षित ध्यान न देने का परिणाम था कि अन्नदाता किसान अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाए. प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनधन की हानि को रोकने वाले प्रयास भी अधूरे रहे. लेकिन, पिछले 12 वर्ष में जो अभियान प्रारंभ किया, उसका परिणाम सभी देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि 12 वर्ष पहले बारिश, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, आकाशीय बिजली के खतरों के बारे में जो जानकारी मिलती थी, होता उससे ठीक उल्टा था, लेकिन अब मौसम की सटीक जानकारी प्राप्त हो रही है.
सीएम ने कहा कि 13 मई को आंधी-तूफान से प्रदेश के कुछ जनपदों में जनधन की काफी हानि हुई थी. बैठक में मैंने पूछा कि अर्ली वार्निंग सिस्टम क्यों काम नहीं कर रहा था. पता चला कि सिस्टम तो काम कर रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की सक्रियता का अभाव है. फिर रात में पूरे प्रदेश के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मैंने कहा कि जब आपको अलर्ट मिल रहा है तो आपको भी स्थानीय स्तर पर लोगों व संस्थाओं को अलर्ट करना चाहिए. इस बैठक के चौथे-पांचवें दिन भी आपदा आई, लेकिन तीन घंटे पहले सबके मोबाइल पर अलर्ट आना प्रारंभ हो गया.
सीएम ने कहा कि मीरजापुर, सोनभद्र, चंदौली आदि कई जनपदों में आकाशीय बिजली का खतरा बहुत रहता है. हर वर्ष 100-150 लोगों की मौत होती थी. चार-पांच वर्ष पहले प्रयागराज से पटना के बीच एक ही दिन में 90 मौतें हुई थीं. इसमें यूपी के 30 व बिहार के 60 लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, एमडीएमए, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की बैठक में मैंने पूछा कि आखिर इन मौतों को कौन रोकेगा. क्या इसे तकनीक से रोका नहीं जा सकता, तब विभाग ने बताया कि यह संभव है. अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने का परिणाम है कि उक्त जिलों में हर वर्ष होने वाली मौत के आंकड़े घटकर महज दर्जन भर रह गए. लोगों को भी ऐसे मौसम में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, सतर्क रहना चाहिए.
यूपी के लिए अलग मौसम सैटेलाइट बनाने को तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम की पूर्व जानकारी किसानों की आमदनी बढ़ाने और आकाशीय बिजली, अतिवृष्टि, अनावृष्टि व ओलावृष्टि के कारण होने वाली जनधन की हानि को रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण है. हमने इसरो से भी अनुरोध किया था कि राज्य सरकार चाहती है कि उसके पास अपना सेटेलाइट हो, जो मौसम की और सटीक जानकारी उपलब्ध करा सके.
योगी आदित्यनाथ ने आकाशीय बिजली से मौतों पर दुख जताते हुए कहा कि किसान, सह किसान (बटाईदार) व पारिवारिक सदस्य की आपदा में मौत होने पर सरकार मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा के तहत तत्काल पांच लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराती है. गंगा, यमुना, सरयू, राप्ती व गंडक समेत कई नदियों में बाढ़ आती है. अलग-अलग समय में बाढ़ के कारण भी राज्य में जनधन की हानि होती है.
यूपी में मौसम की सटीक जानकारी देने के लिए डॉप्लर स्थापित हो रहे हैं, लेकिन यूपी स्पेसिफिक सेटेलाइट स्थापित हो. इसके लिए प्रदेश में केंद्र बन सके तो यूपी सरकार इसमें हरसंभव सहयोग करेगी. इसके साथ ही सीएम ने भारतीय मौसम विज्ञान की तारीफ करते हुए कहा कि सही जानकारी मिलने का लाभ यूपी को मिलता है.
सीएम ने कहा कि यूपी में 450 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन, ब्लॉक स्तर पर 2000 ऑटोमेटिक रेनगेज स्थापित हुए हैं. इसके माध्यम से वर्षा की सटीक जानकारी किसानों को उपलब्ध कराते हैं. यह उपकरण वर्षा, तापमान, वायु की गति और दिशा का रियल टाइम डेटा एकत्र कर स्टडी करने में मदद करते हैं. उन्होंने कहा कि आजमगढ़, वाराणसी, अलीगढ़, झांसी, लखनऊ में एक्सबैंड डॉप्लर वेदर राडार स्थापित किए जा रहे हैं, यह आंधी-तूफान, भारी वर्षा, ओलावृष्टि आदि की निगरानी करने में मदद करेंगे.
आकाशीय बिजली के डिटेक्शन सेंसर लगाए गए हैं. भारत सरकार के सचेत प्लेटफॉर्म से एमएमएस अलर्ट भी समय पर मिलते हैं. इसके जरिए भी सहारनपुर व अन्य जनपदों में जनधन की हानि रोकने में सफलता मिली.
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