मंडी में ई-खरीद पोर्टल की तकनीकी खराबीपंजाब में रविवार को गेहूं की आवक और खरीद जोरों पर रही, और लगातार दूसरे दिन यह आंकड़ा दस लाख टन के पार पहुंच गया. अधिकारियों ने बताया कि पूरे राज्य में कुल आवक का 88% से ज्यादा हिस्सा खरीदा गया, जो मौजूदा रबी मार्केटिंग सीजन के दौरान सरकारी खरीद की तेज रफ्तार को दिखाता है.
सिर्फ रविवार को ही, खरीद का आंकड़ा उस दिन की कुल आवक का 99.23% रहा. कुल आवक 10,41,681 मीट्रिक टन (MT) रही, जिसमें से 10,33,755 MT की खरीद की गई. इसके साथ ही, रविवार शाम तक कुल 38,72,735 MT आवक में से कुल खरीद का आंकड़ा 34,16,926 MT तक पहुंच गया.
राज्य में खरीद के काम में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है. शनिवार शाम के 84% से बढ़कर यह आंकड़ा एक ही दिन में 88% के पार पहुंच गया. हालांकि इस बड़ी खरीद के बावजूद, गेहूं की एक बड़ी मात्रा—लगभग 4,55,808 MT—बिना बिकी रह गई.
इसके अलावा, मंडियों से खरीदे गए अनाज को उठाने का काम अभी भी पीछे चल रहा है. रविवार शाम तक कुल खरीदे गए स्टॉक में से सिर्फ 4,07,826 MT—यानी 11.9%—अनाज ही उठाया जा सका था, जिससे किसानों और कमीशन एजेंटों के बीच अनाज के भंडारण और संभावित नुकसान को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
मोहाली जिले की खरड़ अनाज मंडी में, गेहूं की बोरियों के बड़े-बड़े ढेर अभी भी बिना किसी देखरेख के पड़े हैं. खरड़ के आढ़तिया एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा के मुताबिक, लगभग 2.5 लाख बोरियां उठने का इंतजार कर रही हैं, जबकि अब तक सिर्फ 30,000 बोरियां ही उठाई जा सकी हैं. उन्होंने इस धीमी रफ्तार के लिए अनाज के परिवहन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों को दोषी ठहराया.
शर्मा ने आगे कहा कि शुरुआत में खरीद की रफ्तार धीमी थी, लेकिन इससे जुड़े लोगों के विरोध प्रदर्शनों के बाद इसमें तेजी आई. उन्होंने चेतावनी दी कि अनाज उठाने में होने वाली देरी से फसल को नुकसान पहुंच सकता है, और ऐसे हालात में जवाबदेही पर भी सवाल उठेंगे. मोहाली और आस-पास के जिलों में भी ऐसे ही हालात देखने को मिल रहे हैं, जहां जिला प्रशासन से इस मामले में दखल देने और प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की जा रही है.
इस बीच, खेतों में खड़ी गेहूं की फसल में आग लगने की घटनाएं किसानों की चिंता का सबब बनी हुई हैं. पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां ने मुक्तसर जिले के आग से प्रभावित गांवों का दौरा किया और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने का आश्वासन दिया. इन घटनाओं ने राज्य में फसल बीमा योजना की मांग को फिर से तेज कर दिया है, भले ही पंजाब 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' से बाहर रहने का फैसला करे क्योंकि अभी तक यह स्कीम लागू नहीं है.
पंजाब में गेहूं की खरीद का मौसम आम तौर पर अप्रैल से जून तक चलता है. 2026-27 के मार्केटिंग सीजन के लिए, सरकार ने 30.3 मिलियन टन की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है.
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