प्याज भाव में तेजी से किसानों को राहतदेशभर की कृषि उपज मंडियों में प्याज के भाव में लगातार तेजी बनी हुई है. अगस्त के चौथे हफ्ते में प्याज के औसत भाव का रुझान 3,820.58 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है, जो पिछले हफ्ते के 3,349.94 रुपये के मुकाबले करीब 14 फीसदी ज्यादा है. छत्तीसगढ़ में प्याज का भाव एक हफ्ते में 53.6 फीसदी बढ़कर 4,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गया. बिहार में 20.4 फीसदी, महाराष्ट्र में 15.6 फीसदी और आंध्र प्रदेश में 15 फीसदी की तेजी दर्ज हुई.
एगमार्कनेट पोर्टल पर उपलब्ध प्राइस ट्रेंड रिपोर्ट के मुताबिक, एक महीने पहले यानी जुलाई के आखिरी हफ्ते में प्याज का औसत थोक भाव 2,647.06 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 3,820.58 रुपये हो गया है. इस तरह करीब एक महीने में औसत भाव 44 फीसदी बढ़ा है. इस दौरान छत्तीसगढ़ में मासिक तेजी 109.5 फीसदी और महाराष्ट्र में 90.8 फीसदी रही.
मध्य प्रदेश में जुलाई के आखिरी हफ्ते में प्याज का औसत भाव 1,693.33 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अगस्त के चौथे हफ्ते में बढ़कर 2,765.65 रुपये हो गया. यानी करीब एक महीने में भाव 63.3 फीसदी बढ़ा है.
सरकारी आंकड़ो के मुताबिक, अगस्त 2025 के चौथे हफ्ते में प्याज का औसत थोक भाव 1,908.39 रुपये प्रति क्विंटल था, जो इस साल बढ़कर 3,820.58 रुपये हो गया. यानी सालाना आधार पर औसत भाव करीब दोगुना हुआ है. आंध्र प्रदेश में सालाना बढ़ोतरी 303.9 फीसदी, मध्य प्रदेश में 229.4 फीसदी और महाराष्ट्र में 211.6 फीसदी रही.
आंकड़ों के अनुसार, इस समय उत्तर प्रदेश में प्याज का औसत थोक भाव 1,927.26 रुपये प्रति क्विंटल है. गोवा में 2,200 रुपये, उत्तराखंड में 2,247.47 रुपये और राजस्थान में 2,560.14 रुपये प्रति क्विंटल भाव चल रहा है. साप्ताहिक आधार पर ज्यादातर राज्यों में प्याज के भाव बढ़े हैं. हालांकि, मणिपुर में 1.1 फीसदी और राजस्थान में 2.8 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई.
वहीं, अगस्त 2026 के आखिरी हफ्ते में मणिपुर में प्याज का औसत थोक भाव का रुझान 5,991.30 रुपये प्रति क्विंटल बना हुआ है. मेघालय में 5,650 रुपये, केरल में 5,611.44 रुपये और तमिलनाडु में 5,322.67 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है.
टमाटर, प्याज और आलू की सप्लाई चेन में किसान को उपभोक्ता के खर्च किए हर 1 रुपये में सिर्फ एक-तिहाई के आसपास हिस्सा मिलता है. RBI की स्टडी के मुताबिक, टमाटर में किसान की हिस्सेदारी 33.5 फीसदी, प्याज में 36.2 फीसदी और आलू में 36.7 फीसदी है. यानी प्याज में किसान को 100 रुपये में सिर्फ 36.2 रुपये मिलते हैं, जबकि बाकी रकम ट्रेडर, थोक कारोबारी, रिटेलर और सप्लाई चेन में खप जाती है.
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