मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी घोटाला, फर्जी किसानों ने सरकारी खजाने को लगाया करोड़ों का चूना

मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी घोटाला, फर्जी किसानों ने सरकारी खजाने को लगाया करोड़ों का चूना

मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी के दौरान फर्जी किसानों के जरिए करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है. आरोप है कि असली किसानों के खसरा नंबरों का इस्तेमाल कर फर्जी पंजीयन किए गए और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से गेहूं की बिक्री दिखाकर भुगतान हासिल कर लिया गया. भिंड और राजगढ़ समेत कई जिलों में जांच शुरू हो गई है, जबकि पटवारियों, समिति प्रबंधकों और अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है.

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मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी घोटाला, फर्जी किसानों ने सरकारी खजाने को लगाया करोड़ों का चूनागेहूं मंडी में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव

मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के नाम पर करोड़ों रुपये की सरकारी रकम हड़पने का बड़ा खेल उजागर हुआ है. फर्जी किसान बनाकर सरकारी सिस्टम को ऐसा चूना लगाया गया कि करोड़ों रुपये का भुगतान भी हो गया और किसी को भनक तक नहीं लगी. फिलहाल मध्यप्रदेश के 2 जिलों में ऐसे फर्जी किसानों पर कार्रवाई की शुरुआत हो गई है.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में खुद अपनी सरकार की पीठ थपथपाते हुए बताया था कि देश में सबसे ज्यादा गेहूं की खरीदी उनकी सरकार में हुई है. आंकड़ों की मानें तो यह सच भी है. मध्यप्रदेश सरकार के मुताबिक इस साल 13 लाख 41 हजार किसानों से एमएसपी पर करीब 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया. जाहिर है गेहूं की इस रिकॉर्ड खरीदी ने खुद एमपी सरकार के पिछले 10 साल के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया.

लेकिन इस रिकॉर्डतोड़ खरीदी की सच्चाई जानेंगे तो आपके भी होश उड़ जाएंगे क्योंकि एमएसपी पर गेहूं बेचने के लालच ने कई ठगों को भी किसान को चोला ओढ़ने पर मजबूर कर दिया. दरअसल एमएसपी पर गेहूं बेच कर इन फर्जी किसानों ने सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगा दी. अब करोड़ों रुपये फर्जी किसानों को बांट देने वाली सरकार जांच की बात और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत की बात कर रही है.

'आजतक' को मिली जानकारी के अनुसार इस गोरखधंधे को सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया.

  • एमपी सरकार ने गेहूं की एमएसपी 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय की थी.
  • 13 लाख 41 हजार किसानों ने इस दौरान एमएसपी पर गेहूं बेचा.
  • एमपी में गेहूं पंजीयन की आखिरी तारीख 10 मार्च थी.
  • आखिरी तारीख से ठीक पहले फर्जी किसानों ने पंजीयन करवाया.
  • 5 से 10 मार्च के बीच देर रात और तड़के सुबह के समय बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन हुए.
  • आरोप है कि असली किसानों और अनुसूचित जाति के किसानों के खसरा नंबरों का इस्तेमाल कर फर्जी नाम दर्ज कराए गए.
  • नियमों के मुताबिक पटवारी और तहसीलदारों को ऐसे पंजीयन रद्द करने थे. लेकिन कई मामलों में बिना जांच के सत्यापन कर दिया गया.
  • कहीं बंटाई का कोई अनुबंध नहीं मिला, तो कहीं एक जगह पंजीयन कराकर दूसरी जगह गेहूं की तुलाई कराई गई.
  • जमीन किसी और की थी, लेकिन सरकारी भुगतान सीधे फर्जी खातों में पहुंच गया.

फर्जी किसान बनकर एमएसपी पर गेहूं बेचने की ज़रूरत क्यों पड़ी? 

दरअसल, फर्जी किसानों के नाम पर गेहूं सरकारी केंद्रों पर बेचा गया और सरकारी भुगतान सीधे धोखाधड़ी करने वालों के बैंक खातों में पहुंच गया. इसका मुख्य मकसद पड़ोसी राज्यों से सस्ता गेहूं खरीदकर उसे मध्य प्रदेश के सरकारी केंद्रों पर ऊंचे दाम (MSP और बोनस) पर बेचकर करोड़ों रुपये का अवैध मुनाफा कमाना था. मध्य प्रदेश में किसानों को गेहूं का अच्छा MSP और राज्य सरकार की ओर से बोनस मिलता है. पड़ोसी राज्यों से खराब गेहूं सस्ते दाम में खरीद कर ठग इसे मध्यप्रदेश के उपार्जन केंद्रों पर फर्जी किसान बनकर बेच देते थे. दामों के अंतर का फायदा उठाते हुए फर्जी किसानों ने करोड़ों रुपये कमा लिए.

एमएसपी पर गेहूं खरीदी में सामने आए इस बड़े घोटाले ने सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. भिंड और राजगढ़ में फैले इस फर्जीवाड़े में कई पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

सिर्फ यही नहीं भिंड में चार फर्जी किसानों के खिलाफ कलेक्टर ने एफआईआर भी दर्ज करवाई है जबकि जौरा और बानमोर के तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

सिर्फ इतना ही नहीं, राजगढ़ में भी इसी तरह से फर्जी एमएसपी घोटाले का मामला सामने आया तो प्रशासन हरकत में आ गया. जिला प्रशासन ने ताबड़तोड़ गेहूं और उसेक स्टॉक की जांच शुरू की. जिले में आठ समिति प्रबंधकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को सेवा से हटा दिया गया है. इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी भी की जा रही है. वहीं राजस्व विभाग के चार पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि चार तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं.

प्रशासन का कहना है कि समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही या गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जिला आपूर्ति अधिकारी अजित सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन की मंशा किसानों के हितों की रक्षा करते हुए समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने की है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्तर पर अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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