मक्के के दाम में सुधारअगस्त 2026 में देशभर की मंडियों में मक्के (मेज/कॉर्न) के थोक भाव में मजबूती देखने को मिली है. राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश का औसत थोक मक्का भाव अगस्त 2026 में 2,151.07 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो जुलाई 2026 के औसत 2,115.19 रुपये प्रति क्विंटल से थोड़ा अधिक है. हालांकि पिछले साल अगस्त 2025 के औसत 2,327.23 रुपये प्रति क्विंटल की तुलना में कीमतें अभी भी नीचे बनी हुई हैं.
सबसे अधिक मासिक तेजी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली) में दर्ज की गई, जहां मक्के का थोक भाव जुलाई के 1,695.01 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर अगस्त में 2,271.43 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया. यह 34 प्रतिशत की भारी वृद्धि है. इसी तरह हरियाणा में मक्के के भाव में 28.7 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई और कीमत 2,027.54 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई.
दक्षिण भारत के प्रमुख उत्पादक राज्य कर्नाटक में मक्का 2,447.28 रुपये प्रति क्विंटल, आंध्र प्रदेश में 2,439.36 रुपये प्रति क्विंटल और तेलंगाना में 2,340.27 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर कारोबार करता रहा. वहीं तमिलनाडु में मक्का का भाव 2,467.18 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो देश के प्रमुख राज्यों में सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है.
पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल ने सबसे ऊंचे दामों का रिकॉर्ड बनाया, जहां अगस्त 2026 में मक्के का औसत थोक भाव 2,536.51 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. इसके अलावा गुजरात में भाव 2,421.58 रुपये और महाराष्ट्र में 2,404.19 रुपये प्रति क्विंटल रहे.
मासिक आधार पर देखें तो असम में कीमतों में 8.3 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 6.1 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 4.6 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. दूसरी ओर उत्तराखंड में मक्के के भाव में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई, जहां कीमतें जुलाई के 2,076.57 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 1,398.15 रुपये प्रति क्विंटल रह गईं. यह 32.7 प्रतिशत की मासिक गिरावट है.
सालाना आधार पर तुलना करने पर कई राज्यों में कीमतों में सुधार दिखाई दिया. मध्य प्रदेश में मक्के के भाव पिछले साल की तुलना में 6.4 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 5.7 प्रतिशत और दिल्ली में 5.6 प्रतिशत बढ़े. वहीं तमिलनाडु में सालाना आधार पर 16.4 प्रतिशत, उत्तराखंड में 12.2 प्रतिशत, राजस्थान और हरियाणा में 8.1 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 7.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
कृषि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पशु आहार, स्टार्च उद्योग और पोल्ट्री सेक्टर की मांग के कारण कई राज्यों में मक्के के भाव को समर्थन मिला है. हालांकि कुछ राज्यों में नई आवक और स्थानीय आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव भी देखने को मिला. आने वाले हफ्तों में नई फसल की स्थिति, मौसम और औद्योगिक मांग मक्के के बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे.
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