रेवाड़ी अनाज मंडीशासन- प्रशासन भले ही ये दावे करता हो की किसानों को अनाज मंडी में किसी भी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी. लेकिन धरातल पर सरकार के ये दावे बिल्कुल फेल हैं. दरअसल, हरियाणा के रेवाड़ी अनाज मंडी में बाजरा बेचने के लिए किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मंडी के बाहर करीब 3 से 4 किलोमीटर तक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी लाइन लग रही है. किसान सुबह करीब 4 बजे से ही ट्रैक्टर लेकर मंडी पहुंच रहे हैं, लेकिन कई घंटे इंतजार करने के बाद भी उनका नंबर नहीं आ रहा है. किसानों का कहना है कि बाजरा बेचने के लिए उन्होंने इससे पहले ऐसे हालात नहीं देखे.
रेवाड़ी जिले में बाजरा की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू हुई है. इस बार किसानों को बिना किसी रोस्टर व्यवस्था के सीधे मंडी में बाजरा लेकर आने के लिए बुलाया गया है. ऐसे में जिले के अलग-अलग गांवों से बड़ी संख्या में किसान एक साथ मंडियों में पहुंच रहे हैं. रेवाड़ी के अलावा बावल और कोसली मंडी में भी बाजरा की खरीद की जा रही है.
रेवाड़ी अनाज मंडी में किसानों की परेशानी सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है. किसान सुबह-सुबह ही बाजरा लेकर मंडी पहुंच जाते हैं और ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ लंबी लाइन में खड़े हो जाते हैं. कई किसानों का कहना है कि सुबह से दोपहर हो जाने के बाद भी उनका नंबर नहीं आया. भीषण गर्मी और तेज धूप में किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि उन्होंने बाजरा बेचने के लिए पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया है. लेकिन मंडी में गेट पास बनवाने के दौरान कई किसानों का पटवारी स्तर से वेरिफिकेशन पूरा नहीं मिलने की बात सामने आ रही है. इसके कारण कुछ किसानों को बिना बाजरा बेचे ही वापस लौटना पड़ रहा है.
किसानों ने बाजरा के भाव को लेकर भी नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि मंडी में बाजरा करीब 2100 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदा जा रहा है. कुछ किसानों का बाजरा 2100 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदा गया. किसानों का दावा है कि इससे उन्हें प्रति क्विंटल करीब 200 रुपये का नुकसान हो रहा है.
जानकारी के मुताबिक, किसानों के टोकन के लिए मंडी में दो काउंटर बनाए गए हैं. लेकिन सभी किसानों को बिना रोस्टर के मंडी में बुलाए जाने के कारण एक साथ बड़ी संख्या में किसान पहुंच रहे हैं. इससे मंडी में भीड़ और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतार लग रही है. किसानों ने सरकार से मांग की है कि मंडी में बाजरा खरीद की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें घंटों लाइन में न लगना पड़े और बिना फसल बेचे वापस न लौटना पड़े.
खरीद एजेंसी हैफेड के अधिकारी के मुताबिक, रोजाना करीब 400 किसानों से बाजरा खरीदा जा रहा है. अधिकारियों को मंडी में किसानों की लंबी लाइन की जानकारी है. हालांकि, खरीद का शेड्यूल मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी तय करते हैं. वहीं, इस मामले में मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी कैमरे पर कुछ भी कहने से बचते नजर आए.
रेवाड़ी जिले में अब तक करीब 20 हजार क्विंटल बाजरा खरीदा जा चुका है. इस बार बाजरा की खरीद भावांतर योजना के तहत हो रही है और खरीद में देरी के कारण भी किसान जल्द से जल्द अपनी फसल मंडी में बेचने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन मंडी में लंबी कतार, गेट पास और वेरिफिकेशन जैसी दिक्कतों के चलते किसानों के लिए बाजरा बेचना किसी चुनौती से कम नहीं है.
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