इथेनॉल की बढ़ती मांग से चमका मक्का, हरियाणा की मंडियों में आवक ने तोड़े रिकॉर्ड

इथेनॉल की बढ़ती मांग से चमका मक्का, हरियाणा की मंडियों में आवक ने तोड़े रिकॉर्ड

इथेनॉल उत्पादन में मक्के की बढ़ती मांग का फायदा किसानों को मिलने लगा है. हरियाणा के करनाल में इस सीजन मक्के की रिकॉर्ड 3.36 लाख क्विंटल आवक दर्ज की गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 60 प्रतिशत से अधिक है. बेहतर दाम और बढ़ती मांग के चलते किसान अब मक्के की खेती को आय के नए विकल्प के रूप में देख रहे हैं.

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इथेनॉल की बढ़ती मांग से चमका मक्का, हरियाणा की मंडियों में आवक ने तोड़े रिकॉर्डमंडियों में मक्के की आवक तेज

कभी सीमित क्षेत्र में उगाई जाने वाली मक्के की फसल अब किसानों की आय का बड़ा जरिया बनती जा रही है. देश में इथेनॉल उत्पादन बढ़ने के साथ मक्के की मांग में तेजी आई है, जिसका सीधा फायदा किसानों को मिल रहा है. हरियाणा के करनाल जिले की अनाज मंडियों में इस साल मक्के की रिकॉर्ड आवक दर्ज हुई है. किसानों को बेहतर दाम मिलने से मक्का अब धान और गेहूं के साथ एक लाभदायक फसल के रूप में उभर रहा है.

करनाल की मंडियों में इन दिनों चारों ओर मक्के के ढेर नजर आ रहे हैं. मंडी अधिकारियों के अनुसार, चालू सीजन में अब तक करीब 3 लाख 36 हजार क्विंटल मक्के की आवक हो चुकी है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 1 लाख 51 हजार क्विंटल था. यानी इस बार मक्के की आवक में करीब 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

इथेनॉल उद्योग बना बढ़ती मांग की बड़ी वजह

करनाल मार्केट कमेटी के सचिव विकास सतीजा का कहना है कि मक्के की बढ़ती मांग के पीछे इथेनॉल उद्योग सबसे बड़ा कारण है. इथेनॉल बनाने वाली कंपनियां बड़ी मात्रा में मक्का खरीद रही हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज का अच्छा बाजार मिल रहा है. उन्होंने बताया कि पहले किसानों का रुझान धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों की ओर अधिक रहता था, लेकिन अब मक्के की मांग बढ़ने और अच्छे भाव मिलने के कारण किसान इसकी खेती का रकबा बढ़ा रहे हैं. यही वजह है कि इस साल रिकॉर्ड मात्रा में मक्का मंडी तक पहुंचा है.

किसानों को मिल रही बेहतर आमदनी

मंडी में मक्का करीब 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिक रहा है. क्वालिटी के आधार पर कुछ किसानों को इससे बेहतर कीमत भी मिल रही है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, एक एकड़ में औसतन 35 से 50 क्विंटल तक उत्पादन हो रहा है. ऐसे में किसानों को प्रति एकड़ 50 हजार से 70 हजार रुपये तक की आमदनी हो सकती है. किसानों का कहना है कि पहले मक्के की खेती से बहुत अधिक लाभ नहीं मिलता था और कई बार खरीदारों की कमी भी रहती थी. लेकिन अब इथेनॉल उद्योग के कारण मांग बढ़ी है, जिससे किसानों का भरोसा इस फसल पर बढ़ा है.

अगले साल और बढ़ सकता है रकबा

मंडी में अपनी उपज लेकर आए किसानों ने बताया कि जैसे-जैसे उन्हें मक्के की बढ़ती मांग और अच्छे दाम की जानकारी मिली, उन्होंने इस साल खेती का रकबा बढ़ाया. अब कई किसान अगले सीजन में और अधिक जमीन पर मक्का लगाने की योजना बना रहे हैं.

एक किसान ने बताया कि पहले वह सीमित क्षेत्र में मक्का बोते थे, लेकिन इस बार बेहतर मुनाफे को देखते हुए उन्होंने खेती बढ़ाई है. उनका कहना है कि इथेनॉल उद्योग की वजह से मक्के की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे भविष्य में भी अच्छी कमाई की उम्मीद है.

सरकार और मंडियों को भी फायदा

मक्के की आवक बढ़ने का लाभ सिर्फ किसानों को ही नहीं बल्कि मंडियों और सरकार को भी मिल रहा है. अधिक खरीद-बिक्री होने से मार्केट फीस में भी करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. इससे कृषि व्यापार को मजबूती मिल रही है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंच रहा है.

किसानों को दी गई सलाह

मार्केट कमेटी सचिव विकास सतीजा ने किसानों से बेहतर क्वालिटी वाले बीजों का उपयोग करने और कृषि विभाग से तकनीकी जानकारी लेने की अपील की है. उन्होंने कहा कि अच्छी क्वालिटी की फसल तैयार कर किसानों को उसे पूरी तरह सुखाकर मंडी में लाना चाहिए, ताकि उन्हें बेहतर से बेहतर कीमत मिल सके.

उन्होंने कहा कि यदि इथेनॉल उद्योग की मांग इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले वर्षों में मक्के की खेती का रकबा और उत्पादन दोनों तेजी से बढ़ सकते हैं. इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और खेती को एक नया आर्थिक आधार मिलेगा.

मक्के से किसानों में खुशी

मंडी में मक्का बेचने आए एक किसान ने बताया कि इस बार मक्के की खेती से अच्छा लाभ मिलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे मक्के की बढ़ती मांग और बेहतर दाम की जानकारी किसानों तक पहुंची है, वैसे-वैसे उनका रुझान भी इस फसल की ओर बढ़ा है.

किसान ने बताया कि पहले वे सीमित क्षेत्र में ही मक्के की खेती करते थे, लेकिन अब इथेनॉल उद्योग में मक्के के बढ़ते उपयोग के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. इसे देखते हुए उन्होंने इस साल मक्के की खेती का रकबा बढ़ाने का फैसला किया है और अगले सीजन में भी अधिक क्षेत्र में इसकी बुवाई करने की योजना है.

उन्होंने कहा कि मक्के की खेती में लागत के मुकाबले अच्छा मुनाफा मिल रहा है. उनका मानना है कि यदि इथेनॉल उद्योग की मांग इसी तरह बनी रही तो आने वाले समय में और अधिक किसान मक्के की खेती अपनाएंगे. किसान ने कहा कि पहले मक्के की फसल को उचित बाजार नहीं मिल पाता था. कई बार उपज समय पर नहीं बिकती थी और नुकसान उठाना पड़ता था. लेकिन अब इथेनॉल उत्पादन में मक्के का उपयोग बढ़ने से मांग मजबूत हुई है, जिससे किसानों को बेहतर दाम और स्थायी बाजार मिलने लगा है. यही वजह है कि मक्का अब किसानों के लिए लाभदायक फसल बनता जा रहा है.

मक्का बना आय का नया विकल्प

धान और गेहूं पर निर्भर किसानों के लिए मक्का अब आय का नया विकल्प बनकर उभर रहा है. बढ़ती औद्योगिक मांग, बेहतर कीमत और स्थिर बाजार के कारण किसान इस फसल को भविष्य की लाभकारी खेती के रूप में देख रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल क्षेत्र के विस्तार के साथ मक्का उत्पादकों के लिए आने वाले वर्षों में और बेहतर अवसर पैदा हो सकते हैं.

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