Cotton Price: शुल्‍क मुक्‍त कपास आयात 'बंद', किसानों को राहत की उम्‍मीद, टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री की बढ़ी धुक-धुकी

Cotton Price: शुल्‍क मुक्‍त कपास आयात 'बंद', किसानों को राहत की उम्‍मीद, टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री की बढ़ी धुक-धुकी

कपास पर ड्यूटी फ्री आयात की मियाद खत्म होते ही किसानों को राहत की उम्मीद जगी है. MSP से नीचे चल रहे दामों को सहारा मिलने की संभावना बन रही है. महीनों के विरोध के बाद आखिरकार सरकार की इच्‍छा के मुताबिक तय मियाद खत्‍म होने के बाद अब बाजार का रुख बदल सकता है. लेकिन, टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री फिर से शुल्‍क मुक्‍त कपास आयात की मियाद बढ़ाने की मांग कर रही है. पढ़ें पूरा मामला...

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शुल्‍क मुक्‍त कपास आयात 'बंद', किसानों को राहत की उम्‍मीद, टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री की बढ़ी धुक-धुकीकपास के दाम बढ़ने की उम्‍मीद

कपास के आयात पर 11 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी की मियाद खत्म होने के साथ ही देश के कपास किसानों को बड़ी राहत की उम्मीद जगी है. बीते कई महीनों से MSP से नीचे बिक रही कपास को अब घरेलू बाजार से सहारा मिलने की संभावना बढ़ती दिख रही है.  शुल्क मुक्त आयात बंद होने से विदेशी कपास का आयात महंगा होगा और मिलों और व्यापारियों की निर्भरता घरेलू कपास पर बढ़ेगी. इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ेगा और किसानों को MSP या उसके आसपास दाम मिलने का रास्ता खुल सकता है. हालांकि, आज महाराष्‍ट्र की मंडियों में ऐसा नजारा देखने को भी मिला.

एगमार्कनेट पोर्टल पर उपलब्‍ध आंकड़ों के मुताबिक, ज्‍यादातर मंडियों में कपास की मॉडल कीमतें एमएसपी (7710 रुपये क्विंटल मीडियम स्‍टेपल, 8100 रुपये प्रति क्विंटल लॉन्‍ग स्‍टेपल कपास) के करीब पहुंच गई हैं. वहीं, कुछ मंडियों में कीमतें MSP रेट पार कर चुकी है. ऐसे में अब किसानों के लिए राहत भरा समय चालू होने की बड़ी संभावना बन रही है.

दिसंबर में किसानों को नहीं मिला MSP

हालांकि, अभी भी ज्‍यादातर किसानों को MSP की आस है, लेकिन इसमें क्‍वालिटी भी एक बड़ा फैक्‍टर है, क्‍योंकि इस सीजन आई फसलों की क्‍वालिटी पर बारिश का असर देखने को मिला है. दिसंबर 2025 में देश के प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों का औसत थोक भाव 7,359 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जबकि मध्यम रेशे वाले कपास का MSP 7,710 रुपये प्रति क्विंटल तय है. यानी किसानों को औसतन MSP से करीब 351 रुपये कम भाव मिला. प्रतिशत के लिहाज से देखें तो दिसंबर 2025 में कपास के दाम MSP से लगभग 4.5 प्रतिशत नीचे रहे.

इंपोर्ट ड्यूटी हटाने का हुआ था कड़ा विरोध

बता दें कि जब सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी हटाई थी, तब किसान संगठनों ने आरोप लगाया था कि जीरो इंपोर्ट ड्यूटी की वजह से सस्ता विदेशी कपास बाजार में भरेगा और घरेलू कपास की मांग कमजोर पड़ेगी. अब जब शुल्क मुक्त आयात की अवधि खत्म हो गई है, तो किसानों को उम्मीद है कि उनकी उपज को वाजिब कीमत मिल सकेगी. इस फैसले का विरोध शुरुआत से ही तेज रहा था. 

संयुक्त किसान मोर्चा समेत कई संगठनों ने इसे किसान विरोधी कदम बताया था. आम आदमी पार्टी ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि अमेरिका के दबाव में कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी हटाई गई है. वहीं, किसानों का कहना था कि जिस समय उनकी फसल मंडियों में आती है, उसी समय आयात खोल देना सीधे तौर पर उन्हें नुकसान पहुंचाता है. हालांकि, शुल्‍क मुक्‍त आयात की मियाद खत्‍म हाेने से कपड़ा उद्योग की चिंताएं बढ़ गई हैं. 

अब टेक्सटाइल इंडस्‍ट्री की बढ़ी टेंशन

‘बिजनेसलाइन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, टेक्सटाइल और स्पिनिंग मिलें सरकार से ड्यूटी फ्री आयात बढ़ाने को लेकर स्पष्ट संकेत न मिलने से परेशान हैं. तमिलनाडु स्पिनिंग मिल्स एसोसिएशन और साउदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन ने कहा है कि इस साल कपास की आवक पिछले साल से करीब 60 लाख गांठ कम है और कुल उत्पादन 300 लाख गांठ से नीचे रहने का अनुमान है. ऐसे में शुल्क खत्म होने से घरेलू बाजार में कीमतों को सहारा मिलेगा, लेकिन मिलों की लागत बढ़ेगी.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उद्योग को डर है कि ऊंची घरेलू कीमतों की वजह से यार्न, कपड़े और रेडीमेड गारमेंट्स का निर्यात प्रभावित हो सकता है. खासतौर पर ऐसे समय में जब अमेरिकी बाजार में भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ का दबाव बना हुआ है. उद्योग का तर्क है कि ड्यूटी फ्री आयात से उन्हें कच्चा माल सस्ते में मिला और वे वैश्विक बाजार में टिक पाए.

टेक्सटाइल इंडस्‍ट्री के पास ये ऑप्‍शन

इसके बावजूद कपड़ा उद्योग के पास कुछ वैकल्पिक रास्ते खुले हुए हैं. बिजनेसलाइन के अनुसार, निर्यात करने वाली मिलें ओपन लाइसेंस के तहत सीमित शुल्क पर कपास आयात कर सकती हैं. इसके अलावा ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीकी देशों से कपास आयात के विकल्प मौजूद हैं, हालांकि यह पहले की तुलना में महंगा पड़ेगा. जानकारों का कहना है कि अगर घरेलू कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ती हैं तो मिलें इन विकल्पों का सहारा ले सकती हैं.

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