ईरान युद्ध के कारण फारसी खाड़ी में महंगाई, सब्जियां और फलों के दाम हुए दोगुने

ईरान युद्ध के कारण फारसी खाड़ी में महंगाई, सब्जियां और फलों के दाम हुए दोगुने

ईरान युद्ध के कारण फारसी खाड़ी, खासकर UAE में खाने-पीने की चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं. सब्जियां, फल और चावल की कमी के कारण महंगाई हुई है. बढ़ते माल ढुलाई खर्च और सप्लाई में रुकावट से व्यापार प्रभावित हो रहा है. व्यापारी वैकल्पिक मार्गों से माल ला रहे हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को अब भी सीमित और महंगा सामान मिल रहा है.

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ईरान युद्ध के कारण फारसी खाड़ी में महंगाई, सब्जियां और फलों के दाम हुए दोगुनेUAE और खाड़ी देशों में खाने-पीने की चीजों की कमी और महंगाई

ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद से फारसी खाड़ी के देशों, खासकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में खाने-पीने की चीजों के दाम बहुत बढ़ गए हैं. समुद्री मार्ग और हवाई माल ढुलाई प्रभावित हो रही है. फरवरी 27 के बाद से सब्जियों, फलों और अनाज की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. लोग बता रहे हैं कि सब्जियों और फलों की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं, जबकि चावल और अन्य अनाज का स्टॉक कम होने लगा है.

शारजाह में कुछ दुकानों में सब्जियों के ट्रे खाली दिख रहे थे. हालांकि इस सप्ताह कुछ दाम थोड़े कम हुए हैं. दुबई में भी टमाटर और प्याज की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं. पहले टमाटर और प्याज 1-1 AED में मिलते थे, अब टमाटर 6 AED और प्याज 5 AED में बिक रहे हैं. किराना दुकानों में अभी सामान मिल तो रहा है, लेकिन महंगाई बढ़ गई है.

केवल पंद्रह दिन के लिए बचा है चावल का स्टॉक

एक व्यापारिक स्रोत के अनुसार, UAE में उच्च गुणवत्ता वाले चावल का स्टॉक केवल पंद्रह दिन के लिए बचा है, जबकि सामान्य चावल लगभग 45 दिन तक रह सकता है. आलू का स्टॉक जल्दी ही खत्म हो सकता है.

दुबई के फल आयातक CEV मुहम्मद सिराज ने बताया कि संकट के कारण कई भारतीय उत्पादों की खाड़ी बाजारों में कमी होने लगी है. इस समय व्यापारी श्रीलंका, वियतनाम और थाईलैंड से आपूर्ति ला रहे हैं. लेकिन बढ़ती माल ढुलाई लागत के कारण कई खरीदार अपने ऑर्डर रोक रहे हैं.

रमज़ान के समय में अनानास और अन्य फलों की मांग बहुत बढ़ जाती है. लेकिन सीमित आपूर्ति के कारण उपभोक्ताओं को मुश्किल हो रही है.

माल ढुलाई के दाम बढ़े

केरल एक्सपोर्टर्स फोरम के महासचिव मुंशीद अली ने बताया कि उनके पास 2,000 किलो अनानास और 27 टन नारियल का ऑर्डर आया था. लेकिन हवाई और समुद्री माल ढुलाई के दाम बहुत बढ़ गए.

केरल से अनानास की हवाई ढुलाई की कीमत पहले 70–80 रुपये प्रति किलो थी, अब यह लगभग 210 रुपये प्रति किलो हो गई है. इस कारण खरीदारों ने ऑर्डर रद्द कर दिए. नारियल के लिए कंटेनर फ्रेट लगभग $3,800 हो गया है.

कुछ माल अब शारजाह के खोर फक्कन पोर्ट के रास्ते भेजा जा रहा है, जो सीधे होरमूज़ जलडमरूमध्य से नहीं गुजरता.

वैकल्पिक रास्ते और सुरक्षा उपाय

चैन्नई के व्यापारी मुंशीद अली ने बताया कि अमीरात के शासक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग रास्तों से माल लाने की योजना बना रहे हैं. सऊदी अरब और ओमान के रास्तों से रोड मार्ग के जरिए माल भेजा जा सकता है, क्योंकि रेड सी और ओमान के पोर्ट होरमूज़ जलडमरूमध्य का इस्तेमाल नहीं करते.

UAE में ओमान की मदद ली जा रही है, जिससे रोड मार्ग से माल पहुंचाया जा रहा है. लेकिन अब भी 150 टन से ज्यादा केरल के पेरिशेबल उत्पाद फंसे हुए हैं. हवाई और समुद्री मार्ग दोनों प्रभावित हैं, जिससे पश्चिम एशिया में उपभोक्ताओं को समस्या हो रही है.

संकट का असर

कुछ कंपनियां, जैसे कि लुलु ग्रुप, हवाई माल ढुलाई के ज़रिए ज़रूरी सामान पहुंचा रही हैं. हालांकि, पूरी सप्लाई चेन अभी भी बाधित है. इसका असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, और खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें बढ़ रही हैं. नतीजतन, खरीदार फल, सब्ज़ियां और अनाज सिर्फ़ सीमित मात्रा में ही खरीद पा रहे हैं. व्यापारी अलग-अलग वैकल्पिक रास्तों और देशों से सामान मंगवाकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं.

ईरान से जुड़े संघर्ष की वजह से, पूरे फ़ारसी खाड़ी क्षेत्र में खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई और सप्लाई का संकट और भी गहरा गया है. सब्ज़ियों, फलों और अनाज की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं, और माल ढुलाई के कामों में काफ़ी मुश्किलें आ रही हैं. जहाँ एक तरफ़ व्यापारी वैकल्पिक रास्तों और देशों से सामान मँगवा रहे हैं, वहीं आम जनता को अभी भी बढ़ती कीमतों और सामान की सीमित उपलब्धता से जूझना पड़ रहा है.

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