कॉटन उत्पादों का एक्सपोर्ट (सांकेतिक तस्वीर)अमेरिका के कपड़ा और होम टेक्सटाइल बाजार में 2025 के दौरान एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. ताजा वैश्विक बाजार विश्लेषण के अनुसार, भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए अमेरिका को कपास से बने उत्पाद निर्यात करने वाला सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में अमेरिका ने कुल लगभग 33 लाख टन कपास उत्पादों का आयात किया, जो पिछले 15 साल के औसत के बराबर है.
हालांकि, इस स्थिर आयात के भीतर सप्लायर देशों के हिस्से में बड़ा बदलाव आया है. बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में अमेरिका ने भारत से करीब 6 लाख टन कपास उत्पाद आयात किए, जबकि चीन से आयात घटकर लगभग 5 लाख टन रह गया. इस तरह भारत अमेरिकी बाजार में चीन से आगे निकल गया.
विश्लेषण में बताया गया है कि अमेरिका द्वारा चीन पर लगाए गए उच्च टैरिफ इसका बड़ा कारण रहे. अमेरिका ने चीन से आने वाले कई उत्पादों पर 10 से लेकर 125 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाए. इसके मुकाबले अन्य देशों पर लगाए गए शुल्क अपेक्षाकृत कम रहे, जिससे भारत समेत कई एशियाई देशों को अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिला.
अमेरिकी कंपनियों ने चीन पर निर्भरता घटाने की रणनीति अपनाई, जिसका फायदा भारत के साथ-साथ वियतनाम, बांग्लादेश, पाकिस्तान, मेक्सिको और कंबोडिया जैसे देशों को भी मिला. इन देशों ने अमेरिकी बाजार में कपास उत्पादों की सप्लाई बढ़ाई.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री की मजबूत और इंटीग्रेटेड सप्लाई चेन भी इसकी बड़ी ताकत रही. इससे भारतीय कंपनियों के लिए ट्रेसबिलिटी जैसे वैश्विक मानकों का पालन करना आसान हो जाता है, जो अमेरिकी बाजार में महत्वपूर्ण माना जाता है.
अमेरिका में चीन से कपास उत्पादों का आयात पिछले एक दशक से लगातार घट रहा है. 2010 के शिखर स्तर के मुकाबले अब चीन से अमेरिकी आयात करीब 60 प्रतिशत तक कम हो चुका है. इस गिरावट के पीछे अमेरिकी कानून Uyghur Forced Labor Prevention Act और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम भी प्रमुख कारण माने जा रहे हैं.
दिलचस्प बात यह है कि आयात स्थिर रहने के बावजूद अमेरिका में कपड़ों की मांग मजबूत बनी हुई है. अनुमान के अनुसार, 2025 में अमेरिकी कपड़ा स्टोर्स की खुदरा बिक्री करीब 5 प्रतिशत बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई.
विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ से जुड़े अनिश्चित माहौल में लागत कम रखने के लिए रिटेल कंपनियों ने अपने पुराने स्टॉक का ज्यादा इस्तेमाल किया, जिसके कारण आयात में बड़ी बढ़ोतरी नहीं दिखी.
USDA का अनुमान है कि 2026 में अमेरिका में कपास उत्पादों का आयात बढ़ सकता है. इसकी वजह रिटेलर्स के पास कम इन्वेंट्री और उपभोक्ता मांग का स्थिर रहना है. हालांकि, बदलती व्यापार नीतियां यह तय करेंगी कि अमेरिका इन उत्पादों की सप्लाई किन देशों से ज्यादा लेता है.
वैश्विक स्तर पर 2025-26 में कपास उत्पादन लगभग 1210 लाख बेल रहने का अनुमान है, जिसमें ब्राजील और चीन की बेहतर फसल का योगदान रहेगा. दूसरी ओर, वैश्विक खपत लगभग 1186 लाख बेल रहने का अनुमान है. पाकिस्तान, बांग्लादेश, मेक्सिको और वियतनाम में मांग घटने से खपत पर दबाव रहने की संभावना है, हालांकि चीन में मांग कुछ बढ़ सकती है. वैश्विक व्यापार करीब 439 लाख बेल तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि वैश्विक भंडार लगभग 764 लाख बेल तक बढ़ सकते हैं.
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