Saras Aajeevika Mela 2025सुधा डेयरी के प्रोडक्ट बिहार में मिलेंगे., सांची के मध्य प्रदेश में, नंदिनी का दही-घी कर्नाटक में खाने को मिलेगा, वहीं वीटा और वेरका का दूध-दही हरियाणा और पंजाब में मिलेगा. लेकिन डेयरी की मंडी बन चुकी देश की राजधानी दिल्ली में इन सभी डेयरियों के प्रोडक्ट एक ही छत के नीचे मिल रहे हैं. अमूल और मदर डेयरी पहले से ही मौजूद है. और अच्छी बात ये है कि जल्द ही इस मंडी में राजस्थान की सरस डेयरी के दूध-दही, घी की एंट्री होने जा रही है. दिल्ली-एनसीआर के अलावा सरस यूपी और एमपी में भी अपना दूध-दही, घी बेचेगी.
इसके लिए तीनों ही राज्यों में आउटलेट बनाने की तैयारी चल रही है. इसके लिए राजस्थान सरकार ने डेयरी को बजट में करोड़ों रुपये का बजट दिया गया है. 100 करोड़ रुपये तो आउटलेट्स खोलने पर ही खर्च किए जाएंगे. इसके लिए सरस दूध उत्पादन और प्रोसेसिंग बढ़ाने पर भी जोर दे रही है. इस डवलपमेंट के लिए सरस डेयरी को सरकार ने दो हजार करोड़ रुपये का बजट दिया है.
राजस्थान के डेयरी मंत्री कुमावत का कहना है कि राजस्थान में दुग्ध उत्पादन और प्रोसेसिंग केपेसिटी को विकसित राजस्थान-2047 तक 52 लाख लीटर रोजाना से बढाकर दो करोड़ लीटर रोजाना करने का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही दूध और दूध से बने प्रोडक्ट के बिक्री केंद्रों की संख्या 27 हजार से बढाकर एक लाख करने का भी प्रस्ताव है. इसी के तहत आने वाले साल में एक हजार नए मिल्क कलेक्शन सेंटर खोले जाएंगे, वहीं 500 नए डेयरी बूथ आवंटित करने का प्रस्ताव है.
कुमावत ने कहा कि अलवर में 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट खोलने के लिए 200 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. बारां और सिरोही में 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 100 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. इसी तरह जैसलमेर मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट को और ज्यादा सक्षम बनाया जाएगा.
बजट में राजस्थान के पशुपालकों को बड़ा तोहफा दिया गया है. राज्य के करीब 5 लाख पशुपालकों को प्रति एक लीटर दूध पर 5 रुपये का अनुदान दिया जाएगा. इस पर सरकार करीब 700 करोड़ रुपये खर्च करेगी. वहीं राज्य में एक लाख पशुपालकों को दूध से मिठाई, पनीर, घी और मावा आदि बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी. सरस को गुणवत्तापूर्ण राष्ट्रीय डेयरी ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए एनसीआर, उत्तरप्रदेश व मध्य प्रदेश आदि राज्यों में सरस के आउटलेट्स खोले जाएंगे. दुग्ध उत्पादन को बढावा देने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के मकसद से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के तहत पशुपालकों को अनुदान दिया जा रहा है.
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