तुंगभद्रा नदी जल बंटवारे पर जुटे 3 राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में हुई बड़ी बैठक

तुंगभद्रा नदी जल बंटवारे पर जुटे 3 राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में हुई बड़ी बैठक

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने तुंगभद्रा नदी के अंतर-राज्यीय जल बंटवारे के विवाद का स्थायी समाधान निकालने की अपील की है. केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों की बैठक को इस दिशा में अहम पहल माना जा रहा है. तुंगभद्रा बांध पर नए स्पिलवे गेट्स के उद्घाटन और गाद हटाने की योजना से जल प्रबंधन सुधारने और किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है.

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तुंगभद्रा नदी जल बंटवारे पर जुटे 3 राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में हुई बड़ी बैठकतुंगभद्रा नदी जल बंटवारे पर हुई बैठक

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने जल शक्ति मंत्री CR पाटिल से तुंगभद्रा नदी के अंतर-राज्यीय जल बंटवारे के मुद्दे का जल्द से जल्द स्थायी समाधान खोजने की अपील की. एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय मंत्री CR पाटिल की अध्यक्षता में तुंगभद्रा जल बंटवारे के मुद्दे पर बैठक में भाग लिया. CM ने जोर दिया कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक राज्यों के सभी राजनीतिक दलों को किसानों के हित के लिए राजनीति से ऊपर उठना चाहिए.

तीन मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्री की यह बैठक जल बंटवारे के मुद्दे को मिल-जुलकर सुलझाने की दिशा में पहला कदम है. CM रेवंत रेड्डी ने कहा कि तुंगभद्रा बांध पर 33 नए गेट्स का उद्घाटन तीन पीढ़ियों से चले आ रहे जल बंटवारे के विवाद को सुलझाने की दिशा में एक बड़ी पहल है. नए गेट्स लगने से लाखों किसानों की मुश्किलें भी दूर होंगी. CM ने याद दिलाया कि मैसूर के राजाओं ने भी किसानों की भलाई के लिए विवादों को भुलाकर समाधान खोजने की पहल की थी.

पानी की समस्या का स्थायी समाधान

मुख्यमंत्री ने बताया कि किसान गडवाल, आलमपुर और पालमुरु क्षेत्रों में राजोलीबांडा डायवर्जन स्कीम (RDS) से आवंटित 17.9 TMC पानी में से केवल 5 से 6 TMC पानी का ही इस्तेमाल कर पाते हैं. आवंटित पानी का बाकी 10 TMC हिस्सा अलग-अलग कारणों से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. तेलंगाना सरकार पहले ही तुंगभद्रा नदी में गाद जमा होने और पानी के आवंटन से जुड़े विवादों के मुद्दों को केंद्रीय मंत्री के ध्यान में ला चुकी है. हमने बैठक में पानी की समस्या का स्थायी समाधान खोजने का फैसला किया.

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने जोर दिया कि पानी के बंटवारे को लेकर झगड़ों में उलझने के बजाय हमें समाधान खोजने को प्राथमिकता देनी चाहिए. यह एक अहम मौका था कि पानी के बंटवारे के मुद्दे पर चर्चा तुंगभद्रा नदी के किनारे हुई. मुख्यमंत्री को उम्मीद है कि यह बैठक राज्यों के बीच पानी के विवादों के स्थायी समाधान का रास्ता खोलेगी.

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि केंद्र सरकार पूरे भारत में जलाशयों से गाद (silt) हटाने के लिए एक बड़ी योजना बना रही है. उन्होंने बताया कि बहुत ज्यादा गाद जमा होने के कारण कई बांधों, जिनमें तुंगभद्रा जलाशय भी शामिल है, की पानी जमा करने की क्षमता काफी कम हो गई है.

सिंचाई का बड़ा मुद्दा सुलझा!

25 जून को पड़ोसी विजयनगर जिले में होसापेटे के पास तुंगभद्रा जलाशय के नए लगाए गए स्पिलवे गेट्स के उद्घाटन के मौके पर कर्नाटक के कोप्पल जिले के मुनिराबाद में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए, पाटिल ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में बांधों ने गाद जमा होने के कारण अपनी पानी जमा करने की क्षमता का 15% से ज्यादा हिस्सा खो दिया है.

नायडू ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना की सरकारों को पानी के बंटवारे और सिंचाई से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए एक साथ लाने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की तारीफ की और इस बैठक को क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया. नायडू ने कहा, "तुंगभद्रा बांध आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में किसानों को सिंचाई के लिए पानी और लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है." नदी के सांस्कृतिक महत्व का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि एक प्रचलित कहावत है जिसमें तुंगभद्रा के पानी की पवित्रता की तुलना गंगा के पानी से की जाती है.(अब्दुल बशीर की रिपोर्ट)

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