Mango Export: समुद्री रास्ते से सिंगापुर पहुंचे 5 मीट्र‍िक टन बंगनपल्ली आम, किसानों को मिला दोगुना दाम

Mango Export: समुद्री रास्ते से सिंगापुर पहुंचे 5 मीट्र‍िक टन बंगनपल्ली आम, किसानों को मिला दोगुना दाम

भारत ने पहली बार समुद्री मार्ग से 5 मीट्रिक टन प्रीमियम बंगनपल्ली आम सिंगापुर निर्यात किए हैं. एपीडा और आईसीएआर-सीआईएसएच की मदद से भेजी गई यह खेप आंध्र प्रदेश के GAP प्रमाणित बागों से तैयार की गई. निर्यात से किसानों को घरेलू बाजार की तुलना में करीब दोगुना यानी लगभग 50 रुपये प्रति किलो मूल्य मिला.

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समुद्री रास्ते से सिंगापुर पहुंचे 5 मीट्र‍िक टन बंगनपल्ली आम, किसानों को मिला दोगुना दाममैंगो एक्‍सपोर्ट (सांकेत‍िक तस्‍वीर)

भारतीय आमों को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाली कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने पहली बार व्यावसायिक स्तर पर प्रीमियम बंगनपल्ली आमों की समुद्री खेप सिंगापुर भेजने में सफलता हासिल की है. यह पहल कम लागत और टिकाऊ निर्यात मॉडल को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

5 मीट्रिक टन आमों की पहली समुद्री खेप भेजी गई

जानकारी के अनुसार, यह खेप 5 मीट्रिक टन बंगनपल्ली आमों की थी, जिसका निर्यात मेसर्स ओसम फूड सॉल्यूशंस एलएलपी ने किया. खेप को 11 जून 2026 को भारत से रवाना किया गया था और यह 24 जून 2026 को सिंगापुर पहुंची. इस पहल को एपीडा ने आईसीएआर- केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच), लखनऊ के सहयोग से पूरा किया.

आंध्र प्रदेश के GAP प्रमाणित बागों से चुने गए आम

निर्यात के लिए उपयोग किए गए आम आंध्र प्रदेश के गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज (GAP) प्रमाणित बागानों से लिए गए. इसके बाद इनकी प्रोसेसिंग और पैकिंग कर्नाटक स्थित एपीडा मान्यता प्राप्त पैकहाउस में की गई. पूरी खेप को सिंगापुर के गुणवत्ता और फाइटोसैनिटरी मानकों के अनुरूप तैयार किया गया, ताकि निर्यात प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके.

सिंगापुर में क्‍वालिटी को सराहा गया

खेप के सिंगापुर पहुंचने के बाद वहां के आयातक ईसी-लिंक्स प्राइवेट लिमिटेड ने आमों की गुणवत्ता को बेहतर बताया. आयातक के अनुसार, आमों में मिठास, समान रूप से पकने की क्षमता, अच्छी शेल्फ लाइफ और स्वच्छ फाइटोसैनिटरी स्थिति देखने को मिली. इससे यह साबित हुआ कि वैज्ञानिक पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स के जरिए समुद्री परिवहन में भी गुणवत्ता बनाए रखी जा सकती है.

किसानों को घरेलू बाजार से कहीं बेहतर कीमत मिली

इस निर्यात से किसानों को आर्थिक रूप से भी फायदा हुआ. जहां घरेलू बाजार में बंगनपल्ली आम की कीमत लगभग 25 से 26 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रही थी, वहीं निर्यात खेप के जरिए करीब 50 रुपये प्रति किलोग्राम का मूल्य हासिल हुआ. इससे किसानों की आय में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई और उत्पादकों के लिए अतिरिक्त मूल्य सृजन का रास्ता खुला.

समुद्री निर्यात से बढ़ सकती है वैश्विक पहुंच

मंत्रालय ने कहा कि यह सफलता दिखाती है कि समुद्री मार्ग ताजे फलों के निर्यात के लिए कम लागत वाला, पर्यावरण के लिहाज से बेहतर और बड़े स्तर पर अपनाया जा सकने वाला विकल्प बन सकता है. बेहतर कोल्ड-चेन, वैज्ञानिक हैंडलिंग और लॉजिस्टिक व्यवस्था के सहारे भारतीय बागवानी उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और मजबूत किया जा सकता है.

बंगनपल्ली भारत की लोकप्रिय आम किस्मों में शामिल है. इसका सुनहरा पीला रंग, खुशबू, बिना रेशे वाला गूदा और मिठास इसे विदेशी बाजारों में भी पसंदीदा बनाते हैं. एपीडा का मानना है कि आने वाले समय में इस किस्म के निर्यात में और तेजी देखने को मिल सकती है.

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