राजकोट में 22-23 अगस्‍त को कॉटनसीड और मूंगफली सम्‍मेलन, देशभर के उद्योग विशेषज्ञ होंगे शामिल

राजकोट में 22-23 अगस्‍त को कॉटनसीड और मूंगफली सम्‍मेलन, देशभर के उद्योग विशेषज्ञ होंगे शामिल

गुजरात के राजकोट में 22 और 23 अगस्त 2026 को सातवां SEA-AICOSCA कॉटनसीड एंड ग्राउंडनट कॉन्क्लेव आयोजित होगा. सम्मेलन में देशभर के उद्योग विशेषज्ञ, नीति निर्माता और कारोबारी शामिल होंगे. इसमें कॉटनसीड और मूंगफली आधारित उद्योगों में बाजार, नीतियों, वैल्यू एडिशन और वैश्विक मांग पर चर्चा होगी.

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राजकोट में 22-23 अगस्‍त को कॉटनसीड और मूंगफली सम्‍मेलन, देशभर के उद्योग विशेषज्ञ होंगे शामिलकॉटनसीड और मूंगफली उद्योग करेगा सम्‍मेलन का आयोजन(Photo: Unsplash)

भारत के तिलहन और खाद्य तेल क्षेत्र से जुड़े उद्योग जगत के लिए अगस्त में एक बड़ा मंच तैयार होने जा रहा है. देश में कपास बीज और मूंगफली आधारित उद्योगों की दिशा तय करने वाले मुद्दों पर चर्चा के लिए गुजरात के राजकोट में दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) और ऑल इंडिया कॉटनसीड क्रशर्स एसोसिएशन (AICOSCA) संयुक्त रूप से सातवें SEA-AICOSCA कॉटनसीड एंड ग्राउंडनट कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन करेंगे. यह कार्यक्रम 22 और 23 अगस्त को गुजरात के राजकोट में आयोजित किया जाएगा. इसमें देशभर से उद्योग प्रतिनिधि, नीति निर्माता, कारोबारी और कृषि क्षेत्र के हितधारक शामिल होंगे.

उद्योग की नई संभावनाओं और चुनौतियों पर होगी चर्चा

कॉन्क्लेव का उद्देश्य कॉटनसीड और ग्राउंडनट वैल्यू चेन से जुड़े सभी पक्षों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है. सम्मेलन में नई तकनीक, बाजार के अवसर, सरकारी नीतियों में बदलाव, उत्पादों में वैल्यू एडिशन और वैश्विक मांग जैसे विषय प्रमुख रहेंगे. इसके अलावा कॉटनसीड ऑयल, कॉटनसीड केक और मील के साथ-साथ मूंगफली तेल और उससे जुड़े उत्पादों की संभावनाओं पर भी विस्तार से विचार किया जाएगा.

बाजार, व्यापार और भविष्य की रणनीति पर रहेगा फोकस

आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन में सैकड़ों प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है. सम्मेलन के दौरान खाद्य तेल, केक और मील उद्योग से जुड़े कारोबारी रुझानों, व्यापारिक अवसरों, नीति संबंधी बदलावों और आने वाले समय की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी. इसका उद्देश्य उद्योग और कृषि क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल को बढ़ावा देना भी है.

कॉटनसीड और मूंगफली तिलहन अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार

आयोजकों का कहना है कि कपास केवल वस्त्र उद्योग तक सीमित फसल नहीं है, बल्कि इससे खाद्य तेल और पशु आहार के लिए उपयोगी उत्पाद भी तैयार होते हैं. वहीं, मूंगफली उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य तेल, प्रोटीन युक्त मील और खाद्य उत्पादों के लिए अहम कच्चा माल उपलब्ध कराती है. दोनों फसलें मिलकर किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा मजबूत करने और कृषि आधारित कारोबार को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

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