तिल और गुड़ के नुकसान जान लें आपसर्दियों में तिल और गुड़ से बनी चीजें जैसे तिलपत्ती, तिलकुट, तिल के लड्डू और रेवड़ी हर घर में ज़्यादा बनते हैं और खाए जाते हैं. लोग इन्हें स्वादिष्ट होने के साथ-साथ शरीर को गर्म रखने के लिए पसंद करते हैं. तिल और गुड़ दोनों ही गर्म प्रकृति वाले फूड हैं, जो शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं. लेकिन अगर इनका अधिक मात्रा में सेवन किया जाए, तो यह स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है.
तिल और गुड़ अधिक खाने से सबसे पहले पेट की समस्या दिखाई दे सकती है. ज्यादा खाने से पेट फूल सकता है और आपको भरा-भरा महसूस हो सकता है. कुछ लोगों को गैस या दस्त की समस्या भी हो सकती है. यह समस्या तब होती है जब आपका पेट इन दोनों चीज़ों को पचाने में कठिनाई महसूस करता है. छोटे बच्चों या बुज़ुर्गों को यह परेशानी जल्दी महसूस हो सकती है. इसलिए तिल और गुड़ का सेवन संतुलित मात्रा में करना ज़रूरी है.
तिल और गुड़ को पचाने में थोड़ा समय लगता है. अगर आप इनका सेवन बहुत अधिक करते हैं, तो पेट में गैस बन सकती है और यह सीने में जलन या एसिडिटी का कारण बन सकता है. इसे आम भाषा में दिल की जलन या पेट में खट्टी गैस भी कहा जाता है. कई बार लोगों को यह समस्या खाने के तुरंत बाद महसूस होती है और यह लंबे समय तक परेशान कर सकती है. इसलिए सर्दियों में भी तिल और गुड़ का सेवन धीरे-धीरे और मात्रा में करना चाहिए.
गुड़ में मिठास होती है, जो ब्लड शुगर बढ़ा सकती है. इसलिए डायबिटीज या शुगर सेंसिटिव लोगों को तिल और गुड़ के ज्यादा सेवन से बचना चाहिए. इसके अलावा, तिल-गुड़ का अधिक सेवन पीसीओडी जैसी महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं और सिर दर्द या हार्मोनल असंतुलन का कारण भी बन सकता है. यह शरीर के अंदर गर्मी बढ़ाने का काम करता है और कभी-कभी भूख को भी प्रभावित करता है. इसलिए संतुलित मात्रा में तिल और गुड़ खाना ही सेहत के लिए सुरक्षित है.
तिल और गुड़ दोनों गर्म प्रकृति वाले खाद्य पदार्थ हैं. ज्यादा खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है. इस वजह से मुंह के छाले, त्वचा पर दाने या नाक से खून आने जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं. कभी-कभी यह समस्या तब भी हो सकती है जब कोई व्यक्ति पेट या पाचन संबंधी समस्या से पहले से ग्रसित होता है. इसलिए यह जरूरी है कि हम सर्दियों में भी तिल और गुड़ का सेवन संतुलित मात्रा में करें, ताकि स्वाद भी बना रहे और स्वास्थ्य भी ठीक रहे.
डाइटिशियन के अनुसार, दिन में केवल 1-2 तिलपत्ती या तिलकुट खाना सही रहता है. इसके अलावा 50 ग्राम से ज्यादा तिल और गुड़ का सेवन एक दिन में नहीं करना चाहिए. अगर आप बच्चों या बुज़ुर्गों के लिए यह चीज़ें बना रहे हैं, तो उनकी भी मात्रा सीमित रखें. संतुलित मात्रा में सेवन करने से न केवल स्वाद बना रहता है, बल्कि सेहत भी बनी रहती है और पेट, ब्लड शुगर और शरीर की गर्मी जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है.
तिल कब नहीं खाना चाहिए?
तिल की तासीर गर्म होती है. अगर किसी को डायबिटीज, पेट की समस्या या पित्ताशय की बीमारी है, तो तिल का सेवन कम या बिल्कुल न करना ही बेहतर है.
काले तिल के साइड इफेक्ट क्या हैं?
काले तिल पचाने में थोड़ा मुश्किल होते हैं. ज्यादा खाने से एसिडिटी, दस्त और त्वचा की समस्याएं हो सकती हैं.
सबसे अच्छा काला या सफेद तिल कौन सा है?
सफेद और काले तिल दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद हैं. लेकिन काले तिल में आयरन अधिक होता है, जो शरीर के लिए खास तौर पर फायदेमंद है.
सर्दियों में तिल और गुड़ खाना सेहत के लिए अच्छा होता है, लेकिन हमेशा इसे सही मात्रा में ही खाना चाहिए. इससे न केवल स्वाद का आनंद लिया जा सकता है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से भी बचा जा सकता है.
Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है.
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