प्रतीकात्मक फोटो.Animal Registered Breed राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, करनाल (NBAGR) ने मुर्गी, भेड़-बकरी, गाय-भैंस और बत्तख की 16 और नई नस्ल रजिस्टर्ड की गई हैं. शामिल की गईं बत्तख की संख्या 6 है. ये अंडे भी देती हैं. इसमे असम, मणिपुर और ओडिशा की बत्तख भी शामिल हैं. चार गाय और एक-एक भेड़-बकरी भी है. रजिसटर्ड हुए पशु-पक्षियों में इस बार झारखंड की मुर्गी भी शामिल हैं. ये एक देसी नस्ली की मुर्गी है. खास बात ये है कि इसे मीट के लिए पाला जाता है. नागालैंड के मिथुन को भी रजिस्टर्ड टैग दिया गया है. ब्यूरो की इस नई लिस्ट के बाद देश में रजिस्टर्ड पशु और पक्षियों की संख्या बढ़ गई है.
गौरतलब रहे एनबीएजीआर पशुओं की नई नस्ल को रजिस्टर्ड करने का काम करता है. गोट, शीप, बफैलो, एवियन रिसर्च सेंटर आदि भेड़-बकरी, गाय-भैंस पर रिसर्च करने के बाद उसकी रिपोर्ट ब्यूरो को भेजते हैं. ब्यूरो उस पशु-पक्षी को हर पैमाने पर जांचने के बाद रजिस्टर्ड करता है.
रोहिलखंडी गाय यूपी के बरेली, बदायूं और पीलीभीत जिलों में पाली जाती ह. ज़्यादातर इनका रंग सफेद और ग्रे होता है. सींग ज़्यादातर बाहर की ओर ऊपर मुड़े हुए होते हैं. सिरे पर नुकीले होते हैं. पूंछ लंबी होती है.
मेदिनी नस्ल के बैल मूल रूप से पलामू, लातेहार और गढ़वा और झारखंड के आस-पास के जिले में पाए जाते हैं. इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से बोझा ढोने के लिए किया जाता है. इनका रंग ज़्यादातर ग्रे होता है. मेदिनी बैल में कूबड़ कंधे के आगे होता है.
करण फ्राइज गाय की नस्ल ICAR-NDRI ने विकसित की है. ये एक सिंथेटिक नस्ल है. करण खासतौर पर हरियाणा के करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, कैथल, जींद और यमुना नगर जिले पाली जाती है. करण फ्राइज को होलस्टीन फ्राइजियन (HF) और थारपारकर नस्लों के क्रॉस ब्रीडिंग से विकसित किया गया है.
वृंदावनी सिंथेटिक गाय है. इसे ICAR-IVRI, बरेली ने विकसित किया है. इस नस्ल को यूपी के बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर और बदायूं जिलों में पालने के लिए दिया गया है. इस खास नस्ल को 4 अलग-अलग गाय के जर्मप्लाज्म की क्रॉस ब्रीडिंग से विकसित किया गया है। एचएफ, हरियाना, जर्सी और ब्राउन स्विस को मिक्स कर इसे तैयार किया गया है. इसका रंग मुख्य रूप से भूरा होता है.
मेलघाटी नस्ल की भैंस महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में पाई जाती है. इसका रंग काला और बालदार होता है. इनका माथा चौड़ा (गुंबद के आकार का), चेहरा लंबा और पतला, नाक की हड्डी नुकीली और आंखें उभरी हुई होती हैं.
पलामू नस्ल की बकरियां झारखंड के पलामू, लातेहार और गढ़वा जिलों में पाई जाती हैं. पलामू बकरियां दिखने में लंबी होती हैं, इनका शरीर बेलनाकार और साइज मीडियम होता है. इनका रंग ज़्यादातर गहरा भूरा और काला होता है. कान लटके हुए होते हैं. इसे खासतौर पर मीट के लिए पाला जाता है.
उदयपुरी बकरियों का मूल स्थान उत्तराखंड का पौड़ी गढ़वाल है. उदयपुरी बकरियां मीडियम साइज़ की होती हैं, जिनका शरीर कॉम्पैक्ट और बालदार होता है. टैन रंग के कोट पर ऊपरी हिस्से पर काली धारी होती हैं. कान लटके हुए होते हैं और गलकंबल और दाढ़ी नहीं होती है.
अविशान पहली सिंथेटिक भेड़ की नस्ल है. इसे ICAR-CSWRI ने विकसित किया है. इस नस्ल की खासियत ज़्यादा बच्चे देना है. ये ज़्यादा दूध भी देती है. इस नस्ल को गारोल, मालपुरा और पाटनवाड़ी नस्ल के मिक्स से तैयार किया गया है. यह मीडियम से बड़े आकार की मटन टाइप की भेड़ है. चेहरा हल्के से गहरे भूरे रंग का होता है, जो गर्दन तक फैला होता है और शरीर के बालों का रंग ऑफ व्हाइट, क्रीम रंग का होता है.
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