Sugar Import: सरकार ने दी 10 लाख टन चीनी आयात की मंजूरी, लेकिन आधा कोटा भी नहीं भरेंगी मिलें!

Sugar Import: सरकार ने दी 10 लाख टन चीनी आयात की मंजूरी, लेकिन आधा कोटा भी नहीं भरेंगी मिलें!

सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की मंजूरी दी है, लेकिन घरेलू कीमतों में करीब 20% गिरावट के बाद चीनी मिलें पूरे कोटे का इस्तेमाल करने के मूड में नहीं हैं. उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुल मंजूर मात्रा में से 5 लाख टन से भी कम चीनी आयात हो सकती है, जबकि अक्टूबर से नई पेराई शुरू होने पर घरेलू सप्लाई बढ़ने की संभावना है.

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सरकार ने दी 10 लाख टन चीनी आयात की मंजूरी, लेकिन आधा कोटा भी नहीं भरेंगी मिलें!भारत सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी इंपोर्ट की इजाजत दी है

भारत में चीनी के दाम में बहुत बड़ी बढ़ोतरी है. गन्ने के कम उत्पादन और पेराई की घटी मात्रा ने चीनी के दाम बढ़ाए हैं. त्योहार से पहले बाजार में कम सप्लाई और अधिक मांग ने भी दाम बढ़ा दी है. इस अंतर को पाटने और दाम कम करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के इंपोर्ट को मंजूरी दी है. बीते 10 साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि भारत को चीनी आयात करना पड़ा है. सरकार के इस आदेश के बीच 'रॉयटर्स' ने जानकारी दी है कि भारतीय चीनी मिलें और रिफाइनर सरकार द्वारा ड्यूटी-फ्री मंजूरी दी गई 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी में से शायद आधी ही आयात करेंगी, क्योंकि घरेलू कीमतों में गिरावट से आयात से होने वाला मुनाफा कम हो गया है.

दुनिया के सबसे बड़े चीनी उपभोक्ता देश में भारत का नाम है. भारत ने पिछले हफ्ते त्योहारों के मौसम से पहले रिकॉर्ड-उच्च कीमतों को कम करने के लिए 31 अक्टूबर तक ड्यूटी-फ्री आयात की मंजूरी दी थी. त्योहारों के मौसम में पारंपरिक और देशी मिठाइयों की मांग आम तौर पर सबसे अधिक होती है. लेकिन घरेलू एक्स-मिल कीमतें पिछले हफ्ते के रिकॉर्ड-उच्च स्तर से लगभग 20% गिर गई हैं.

मुंबई स्थित ट्रेडर MEIR कमोडिटीज इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर राहिल शेख ने कहा, "पिछले हफ्ते आयात का फैसला ठीक लग रहा था, जब कीमतें मजबूत थीं और बढ़ रही थीं. लेकिन घोषणा के बाद कीमतों में भारी गिरावट ने मिल मालिकों के लिए आयात के प्रति दिलचस्पी को कम कर दिया है."

शेख ने कहा कि आयात मार्जिन कम है, और इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि जब लगभग दो महीने में शिपमेंट आएगा तो यह मार्जिन बना रहेगा. शेख और ग्लोबल ट्रेडिंग हाउस के चार अन्य डीलरों ने कहा कि आयात के 500,000 टन से ज्यादा होने की संभावना नहीं है, और अधिकत मात्रा रिफाइनरियों द्वारा ली जाएगी.

मध्य अक्टूबर से घरेलू आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद

भारत में कुछ बंदरगाह-आधारित चीनी रिफाइनरियां हैं जो रिफाइनिंग के लिए ड्यूटी-फ्री कच्ची चीनी आयात करती हैं और उससे बनी सफेद चीनी का निर्यात करती हैं. सरकार ने पिछले हफ्ते इन रिफाइनरों को आयात कोटे के लिए आवेदन करने की मंजूरी दी, जिससे वे पहले से आयातित कच्ची चीनी से बनी रिफाइंड चीनी को अक्टूबर के अंत तक घरेलू बाजार में बेच सकें.

ग्लोबल ट्रेडिंग हाउस के मुंबई स्थित एक डीलर ने कहा कि ये रिफाइनरियां घरेलू बाजार में अपने पास मौजूद लगभग 300,000 टन स्टॉक को तेजी से बेच सकती हैं. कंपनी की नीति के अनुसार उन्होंने अपना नाम बताने से इनकार कर दिया. लेकिन मिलें आयात में दिलचस्पी नहीं ले रही हैं क्योंकि नए पेराई सीजन की शुरुआत के साथ अक्टूबर के मध्य से घरेलू आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है, उन्होंने कहा.

15 अक्टूर से शुरू होगी गन्ना पेराई

भारत ने मिलों से सप्लाई बढ़ाने के लिए गन्ने की पेराई शुरू करने की तारीख 15 अक्टूबर करने को कहा है. भारत सरकार ने सिर्फ कच्ची चीनी के आयात की इजाजत दी है. इसे मुख्य रूप से सबसे बड़े उत्पादक देश ब्राजील से मंगाए जाने की संभावना है और घरेलू बाजार में बेचने से पहले इसे प्रोसेस करना होगा. मुंबई के एक डीलर ने कहा कि सप्लाई तेजी से बढ़ाने के लिए कच्ची चीनी के साथ-साथ सफेद चीनी के भी बिना ड्यूटी वाले आयात की इजाजत देने की जरूरत है.

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