शादी में दिखावा नहीं, जीव-दया का संदेश!आमतौर पर शादी का नाम आते ही लोगों के मन में अच्छी शादी, अच्छा खाना, अच्छे कपड़े, शोर-शराबा मस्ती के बारे में सोचते हैं. लेकिन मध्य प्रदेश के आगर-मालवा की रहने वाली सलोनी जैन ने अपनी शादी को सिर्फ एक उत्सव तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने शादी के खर्चों में कटौती कर उस पैसे का एक हिस्सा जीव-दया और पर्यावरण संरक्षण के लिए इस्तेमाल करने का फैसला किया. सलोनी की इस पहल के तहत मोती सागर तालाब के किनारे पक्षियों के लिए एक अनोखा बहुमंजिला ‘आशियाना’ तैयार कराया गया है, जिसकी पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है.
सलोनी जैन ने अपनी शादी के मौके को यादगार बनाने के लिए ऐसा काम किया, जिससे लंबे समय तक बेजुबान पक्षियों को फायदा मिल सके. उन्होंने मोती सागर तालाब के किनारे पक्षियों के रहने के लिए छह मंजिला आशियाना यानी घर बनवाया है. इस पक्षी आशियाने को इस तरह तैयार किया गया है कि अलग-अलग आकार के पक्षियों को इसमें आसानी से रहने और सुरक्षित जगह मिल सके. आशियाने की प्रत्येक मंजिल पर पक्षियों के लिए छोटे-छोटे घर बनाए गए हैं. छोटे पक्षियों के लिए इन घरों में गोल आकार के छोटे दरवाजे बनाए गए हैं, जबकि बड़े पक्षियों के लिए दरवाजों का आकार अलग रखा गया है. इस तरह आशियाने को पक्षियों की जरूरत और उनके आकार को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है.
पक्षियों के इस छह मंजिला आशियाने की खास बात यह है कि हर मंजिल पर एक अलग छत बनाई गई है. इससे पक्षियों को तेज धूप में छांव मिलेगी और बारिश के दौरान भी वे सुरक्षित रह सकेंगे. आशियाने की बनावट इस तरह की गई है कि पक्षियों को मौसम की मार से बचने के साथ-साथ रहने के लिए सुरक्षित जगह मिल सके. आशियाने को मोती सागर तालाब के किनारे बनाया गया है. ऐसे में पक्षियों के लिए पानी की उपलब्धता भी बनी रहेगी. इसके आसपास पहले से ही कई बड़े पेड़ मौजूद हैं. पेड़ों और तालाब के बीच इस आशियाने के होने से पक्षियों को अपने प्राकृतिक वातावरण जैसा माहौल मिलने की उम्मीद है.
आगर-मालवा में मोती सागर झील न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि शहर के लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों का भी अहम हिस्सा है. यहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग आते हैं, कई लोग झील के किनारे पक्षियों को दाना खिलाते हैं और प्राकृतिक माहौल का आनंद लेते हैं. इस संदर्भ में, पक्षियों के लिए बनाया गया आश्रय एक मुख्य आकर्षण बन सकता है. यह बर्ड टॉवर शहर के लिए एक नया लैंडमार्क बन सकता है. यहां आने वाले लोग न केवल पक्षियों को करीब से देख पाएंगे, बल्कि जीवों के प्रति दया और पर्यावरण संरक्षण के बारे में भी जागरूक होंगे. अपनी इस पहल के बारे में बात करते हुए सलोनी जैन सादगी से कहती हैं कि लोग अक्सर शादी की दावत पर लाखों रुपये खर्च कर देते हैं. कुछ घंटों के बाद, खाने का स्वाद और कार्यक्रम की कई यादें धुंधली पड़ जाती हैं. हालाँकि, अगर उस खर्च का कुछ हिस्सा भी जीवों के प्रति दया और समाज कल्याण में लगाया जाए, तो उससे मिलने वाली आंतरिक संतुष्टि कहीं ज़्यादा होती है.
उनका मानना है कि शादी जैसे पारिवारिक आयोजन न केवल जश्न मनाने के मौके होते हैं, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाने का भी अवसर होते हैं. अगर लोग जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और जीवों के प्रति दया से जोड़ें, तो छोटी-छोटी कोशिशें मिलकर बड़ा बदलाव ला सकती हैं.
सलोनी जैन की सोच यही है कि शादी के कई ऐसे खर्च होते हैं, जिन्हें कुछ समय बाद लोग भूल जाते हैं. भव्य सजावट, आतिशबाजी और कई तरह के आयोजनों पर खर्च किया गया पैसा कुछ समय के लिए खुशी देता है, लेकिन बेजुबान जीवों के लिए किया गया कोई काम लंबे समय तक लोगों को संतुष्टि दे सकता है. छह मंजिला पक्षी आशियाना इसी सोच का परिणाम है. यह पहल न केवल पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकाना तैयार करती है, बल्कि लोगों को यह सोचने के लिए भी प्रेरित करती है कि खुशी के अवसरों को समाज और प्रकृति से कैसे जोड़ा जा सकता है.
सलोनी जैन और उनके परिवार की यह पहल शादी समारोहों को लेकर एक अलग तरह की सोच सामने रखती है. शादी में होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करके अगर उसका इस्तेमाल किसी जरूरतमंद, पर्यावरण या बेजुबान जीवों के लिए किया जाए तो उसका असर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है. मोती सागर तालाब के किनारे बना यह पक्षी आशियाना इसी संदेश का उदाहरण है. एक ओर यह पक्षियों को सुरक्षित घर देने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर यह लोगों को जीव-दया, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार सामाजिक आयोजनों की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करता है. सलोनी की यह पहल बताती है कि शादी की खुशी सिर्फ कुछ घंटों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उससे समाज और प्रकृति के लिए भी कुछ अच्छा किया जा सकता है. (प्रमोद कारपेंटर का इनपुट)
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