कुरुवई के बाद सांबा पर संकट! 1 सितंबर से खुलेगा मेट्टूर डैम, कावेरी पानी के लिए कर्नाटक पर दबाव बनाए सरकार

कुरुवई के बाद सांबा पर संकट! 1 सितंबर से खुलेगा मेट्टूर डैम, कावेरी पानी के लिए कर्नाटक पर दबाव बनाए सरकार

तमिलनाडु सरकार 1 सितंबर से कुरुवई फसल बचाने के लिए मेट्टूर बांध से सिंचाई का पानी छोड़ेगी. बांध में पानी कम होने से सांबा फसल को लेकर चिंता बनी हुई है. PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने कर्नाटक से तमिलनाडु के हिस्से का कावेरी पानी दिलाने की मांग की है. सांबा और थालाडी की 18 लाख एकड़ खेती के लिए पर्याप्त पानी जरूरी है.

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कुरुवई के बाद सांबा पर संकट! 1 सितंबर से खुलेगा मेट्टूर डैम, कावेरी पानी के लिए कर्नाटक पर दबाव बनाए सरकारमेट्टूर डैम से 1 सितंबर को पानी

तमिलनाडु में कुरुवई धान की फसल को बचाने और सांबा सीजन की खेती शुरू कराने के लिए राज्य सरकार ने मेट्टूर बांध से पानी छोड़ने का फैसला किया है. सरकार 1 सितंबर से सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की तैयारी कर रही है. पट्टाली मक्कल काची (PMK) ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन बांध में पानी के कम भंडारण को लेकर चिंता भी जताई है. PMK अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने कहा कि आने वाले सांबा सीजन के लिए पर्याप्त पानी जुटाना बड़ी चुनौती होगी.

1 सितंबर से मेट्टूर बांध से छोड़ा जाएगा पानी

मेट्टूर बांध से आमतौर पर हर साल 12 जून को खेती के लिए पानी छोड़ा जाता है. लेकिन इस साल बांध में पर्याप्त पानी नहीं होने और कर्नाटक की ओर से पानी नहीं छोड़े जाने के कारण इसमें देरी हुई. हाल में बांध में पानी की आवक बढ़ी है. इसके बाद जलस्तर बढ़कर 89.24 फीट हो गया है और बांध में करीब 51.78 टीएमसी फीट पानी जमा है. इसी को देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने अब सिंचाई के लिए बांध खोलने का फैसला किया है.

हालांकि, मेट्टूर बांध में पानी का स्तर अभी भी उस स्तर से कम है, जिसे लंबे समय तक सिंचाई के लिए पानी छोड़ने के लिए बेहतर माना जाता है. अंबुमणि रामदास के मुताबिक, बांध का जलस्तर करीब 90 से 100 फीट के बीच होने पर सिंचाई के लिए पानी की स्थिति ज्यादा सुरक्षित रहती है. इसके बावजूद मौजूदा परिस्थितियों में बांध से पानी छोड़ना जरूरी हो गया है.

डेल्टा क्षेत्र में सूख रहे हैं ज्यादातर जलाशय

PMK अध्यक्ष ने कहा कि कावेरी डेल्टा क्षेत्र में करीब 95 फीसदी जलाशय और जलस्रोत सूख चुके हैं. इसके साथ ही भूजल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है. ऐसी स्थिति में खेतों में खड़ी कुरुवई धान की फसल पर संकट बढ़ गया है. अगर समय पर सिंचाई का पानी नहीं मिला तो किसानों को फसल बचाने में मुश्किल हो सकती है.

कुरुवई फसल कावेरी डेल्टा के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इसके बाद इसी क्षेत्र में सांबा और थालाडी फसलों की खेती की जाती है. इसलिए अभी मेट्टूर बांध से पानी छोड़ने को सिर्फ मौजूदा फसल बचाने के कदम के तौर पर नहीं देखा जा रहा है, बल्कि आने वाले पूरे कृषि सीजन के लिए भी इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

सांबा की खेती के लिए चाहिए करीब 160 टीएमसी पानी

अंबुमणि रामदास ने सांबा सीजन को लेकर भी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के डेल्टा क्षेत्र में करीब 18 लाख एकड़ में सांबा और थालाडी फसलों की खेती होती है. इतनी बड़ी खेती के लिए लगभग 160 टीएमसी पानी की जरूरत होगी. उनके मुताबिक, अगर इस साल उत्तर-पूर्वी मॉनसून सामान्य रहता है और उससे करीब 50 से 60 टीएमसी पानी मिल जाता है, तब भी मेट्टूर बांध से लगभग 100 से 110 टीएमसी पानी की जरूरत पड़ेगी. यानी आने वाले महीनों में बांध में पर्याप्त पानी बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी.

तमिलनाडु को दिसंबर तक 114.11 टीएमसी पानी मिलना जरूरी

PMK नेता ने कहा कि ट्रिब्यूनल और अदालत के फैसलों के अनुसार तमिलनाडु को अगस्त के आखिरी हिस्से से दिसंबर तक कुल 114.11 टीएमसी पानी मिलना चाहिए. उनका कहना है कि यह पानी फसल सीजन को सफल बनाने के लिए जरूरी है. अंबुमणि ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह कर्नाटक से तमिलनाडु के हिस्से का पानी दिलाने के लिए सक्रिय कदम उठाए. इसके लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और सुप्रीम कोर्ट के सामने तमिलनाडु का पक्ष मजबूती से रखा जाना चाहिए.

कर्नाटक के जलाशयों में 82.11 टीएमसी पानी होने का दावा

अंबुमणि रामदास ने दावा किया कि कर्नाटक के जलाशयों में फिलहाल करीब 82.11 टीएमसी पानी मौजूद है और वहां पानी की आवक भी लगातार बनी हुई है. उन्होंने कहा कि अगर कर्नाटक से रोजाना करीब 2 टीएमसी पानी छोड़ा जाता है तो सितंबर के अंत तक पानी की पिछली कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है. उन्होंने तमिलनाडु सरकार से मांग की कि वह कर्नाटक पर दबाव बनाए और राज्य के हिस्से का पानी हासिल करे, ताकि डेल्टा क्षेत्र के किसानों की आजीविका सुरक्षित रह सके और सांबा की फसल अच्छी तरह तैयार हो सके.

किसानों के लिए आगे के महीने बेहद अहम

मेट्टूर बांध से पानी छोड़ने के फैसले से फिलहाल कुरुवई किसानों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन सांबा सीजन को लेकर अभी भी पानी की चिंता बनी हुई है. आने वाले दिनों में कावेरी से मिलने वाला पानी, मेट्टूर बांध का जलस्तर और उत्तर-पूर्वी मॉनसून की बारिश यह तय करेगी कि डेल्टा क्षेत्र में किसानों को कितनी राहत मिलती है. ऐसे में PMK ने राज्य सरकार से सिर्फ बांध खोलने तक सीमित न रहने और कर्नाटक से तमिलनाडु के हिस्से का पानी हासिल करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि पर्याप्त पानी मिलने से ही कुरुवई फसल को बचाने के साथ-साथ सांबा और थालाडी की खेती को भी सुरक्षित किया जा सकेगा.

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