नई फसल आने पर काजू-बादाम, अखरोट बिक रहे इस रेट, जानें यहां   

नई फसल आने पर काजू-बादाम, अखरोट बिक रहे इस रेट, जानें यहां   

पिछले साल के मुकाबले अगर इस साल ड्राई फ्रूट के रेट की तुलना करेंगे तो आपको महंगे लगेंगे. हालांकि बीते साल कोरोना-लॉकडाउन के चलते नई फसल आने के बाद भी रेट पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा था. वहीं जानकारों का दावा है कि इस बार भी सूखे मेवा के रेट कोई बहुत ज्यादा नहीं हैं. क्योंकि दिसम्बर-जनवरी में मेवा पर जो तेजी आनी चाहिए वो नहीं आई है, क्योंकि कोरोना की खबरों ने बाजार की भीड़ को हल्का कर दिया है.  

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नई फसल आने पर काजू-बादाम, अखरोट बिक रहे इस रेट, जानें यहां   खारी बावली, दिल्ली में होता सूखे मेवा का कारोबार.

सर्दियों की दस्तक के साथ ही बादाम, अखरोट और पिस्ते आदि की नई फसल भी बाजार में आ जाती है. सही मायनों में शादी-पार्टी और घरों में इस्तेलमाल के लिए सूखे मेवा की डिमांड भी नई फसल के साथ शुरू हो जाती है. अक्टूबर से लेकर फरवरी को सूखे मेवा का सीजन माना जाता है. कुल मिलाकर हर चीज के लिए फ्रेश मेवा बाजार में मौजूद होती है. पुरानी मेवा खत्म करने के बाद दुकानदार नई फसल का स्टॉक करते हैं. दिल्लीं की खारी बावली सूखे मेवा की रिटेल और होलसेल की बड़ी मंडी है. 

मेवा कारोबारी हेमू खेमचंदानी ने बताया कि सर्दियां शुरु होने से पहले ही पुराने माल को खत्म कर लिया जाता है. गोदामों को नए माल के लिए साफ-सफाई कर तैयार करते हैं. इस दौरान व्यापारी पुराने माल को कुछ मामूली रेट कम कर जल्द से जल्द निकाल देते हैं. यही वजह है कि सीजन शुरू होने से पहले कुछ दिन के लिए मेवा के दाम कम हो जाते हैं. 

अखरोट 900 तो बादाम बिक रहे 575 रुपये किलो 

खारी बावली ड्राई फ्रूट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव बत्रा ने किसान तक को बताया कि इस वक्त अच्छा बादाम होलसेल रेट में 575 रुपये किलो तक बिक रहा है. वहीं अमेरिका और चिली का अखरोट 11 सौ रुपये किलो बिक रहा है. हालांकि अखरोट 900 रुपये किलो वाला भी मौजूद है. लेकिन डिमांड अमेरिकन और चिली के अखरोट की ज्यादा रहती है. अगर काजू की बात करें तो वो 800 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा है. 

अभी तक पटरी पर नहीं आया कोरोना में बिगड़ा मेवा बाजार 

ड्राई फ्रूट के आनलाइन कारोबारी मुवीन शेख ने बताया कि हमारे खानदान में 60-70 साल से सूखे मेवा का कारोबार हो रहा है. लेकिन मेवा का ऐसा बाजार हमने कभी नहीं देखा, जैसा बीते दो साल से चल रहा है. सर्दियों की आमद और शादी-पार्टी, दीवाली को देखते हुए यह वक्त पूरी तरह से मेवा बाजार के नाम हुआ करता था. पूरे साल का खर्चा एक सीजन में निकलता था. लेकिन अफसोस की बात है कि सीजन में भी मेवा के सही-सही दाम नहीं मिल रहे हैं. मेवा पर 5-10 रुपये तो दुकानदार गर्मी में भी कमा लेता है, लेकिन सीजन में बाजार का बुरा हाल है.  

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