किसान क्रेडिट कार्ड से लिया कर्ज, NEET छात्रा की दर्दनाक मौत: पेपर लीक के बाद डिप्रेशन में उठाया कदम

किसान क्रेडिट कार्ड से लिया कर्ज, NEET छात्रा की दर्दनाक मौत: पेपर लीक के बाद डिप्रेशन में उठाया कदम

मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में NEET की तैयारी कर रही छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने पेपर लीक के बाद डिप्रेशन में आकर आत्महत्या कर ली. परिवार ने कर्ज लेकर उसकी पढ़ाई कराई थी. पिता ने मेहनत कर कोचिंग का खर्च उठाया, लेकिन घटना से पूरा परिवार सदमे में है. इस घटना ने परीक्षा तनाव और सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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किसान क्रेडिट कार्ड से लिया कर्ज, NEET छात्रा की दर्दनाक मौत: पेपर लीक के बाद डिप्रेशन में उठाया कदमपढ़ाई के सपने के बीच टूट गया परिवार, मऊगंज में दर्दनाक घटना

मध्यप्रदेश के नवगठित जिले मऊगंज के मगनिया गांव में एक बहुत दुखद घटना हुई. यहां रहने वाली छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने 20 मई को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. बताया जा रहा है कि आकांक्षा NEET की परीक्षा की तैयारी कर रही थी और वह बहुत अच्छे नंबर लाने की उम्मीद में थी. लेकिन परिजनों का कहना है कि पेपर लीक की खबरों के बाद वह बहुत परेशान और तनाव में रहने लगी थी, जिसके कारण उसने यह गलत कदम उठा लिया.

परिवार ने कर्ज लेकर कराई थी पढ़ाई

आकांक्षा के परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी, लेकिन फिर भी उसके पिता ने अपनी बेटी के सपने पूरे करने के लिए बहुत मेहनत की. उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड से लगभग 3 लाख रुपये का कर्ज लिया और बेटी को नागपुर के एक निजी कोचिंग में पढ़ाई के लिए भेजा. पिता किसानी करते थे, लेकिन बेटी की पढ़ाई के लिए उन्होंने नागपुर में कुक की नौकरी भी शुरू कर दी थी ताकि किसी तरह उसकी पढ़ाई जारी रह सके.

डॉक्टर बनने का सपना रह गया अधूरा

परिवार को पूरा भरोसा था कि इस बार आकांक्षा NEET परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करेगी और डॉक्टर बनेगी. लेकिन पेपर लीक की खबरों के बाद वह मानसिक तनाव में चली गई. धीरे-धीरे वह बहुत परेशान रहने लगी और आखिरकार उसने यह कदम उठा लिया. इस घटना से पूरा परिवार सदमे में है.

मिला सुसाइड नोट, परिवार में दुख का माहौल

घटना के बाद पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है. इसमें छात्रा ने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि वह उनके सपनों को पूरा नहीं कर पाई और दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं है. उसने यह भी लिखा कि वह खुद को परिवार की उम्मीदों पर खरा न उतर पाने के लिए जिम्मेदार मानती है.

राजनीतिक दल का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा

घटना के बाद एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा और उन्हें ढांढस बंधाया. उन्होंने परिवार को 2.5 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी और आगे हर संभव सहायता का भरोसा दिया. हालांकि परिवार का कहना है कि अभी तक सरकार की तरफ से कोई भी अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया है.

यह घटना बहुत दुखद है और यह दिखाती है कि बच्चों पर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं का कितना दबाव होता है. परिवार ने अपनी पूरी ताकत लगाकर बेटी के सपने पूरे करने की कोशिश की, लेकिन यह दुखद घटना सबको झकझोर कर रख देती है.

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