मऊ के मुस्तफाबाद पहुंचा किसान कारवांउत्तर प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे विशेष अभियान ‘किसान तक’ का किसान कारवां ऐतिहासिक जनपद मऊ के मुस्तफाबाद गांव पहुंचा. इस अभियान की कवरेज में यह 39वां पड़ाव रहा, जहां बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया. कार्यक्रम के दौरान कृषि अधिकारियों ने किसानों को सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी दी, वहीं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने आधुनिक खेती और नई तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया.
किसान कारवां के पहले चरण में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.बी. चौरसिया ने बताया कि प्रदेश सरकार पशुपालकों के लिए नंदिनी योजना, मिनी नंदिनी योजना और गौ संवर्धन योजना चला रही है. इन योजनाओं के तहत दो से लेकर 25 पशुओं तक पालन पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है. उन्होंने बताया कि इन योजनाओं का लाभ लॉटरी के माध्यम से दिया जाता है और इससे पशुपालकों की आय बढ़ रही है तथा दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि हुई है.
दूसरे चरण में कृषि विभाग के विषय वस्तु विशेषज्ञ राकेश पांडे ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जल्द ही योजना की अगली किस्त जारी होने वाली है. कई किसान अभी भी इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं, इसलिए उन्होंने पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और रुकी हुई किस्त के समाधान के बारे में विस्तार से जानकारी दी.
तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के प्लांट प्रोटेक्शन वैज्ञानिक डॉ. सुमित गुप्ता ने आधुनिक खेती की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है और किसान इसे अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं.
चौथे चरण में पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि पशुओं को संतुलित चारा और मिनरल मिश्रण देना बहुत जरूरी है. इससे पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन में भी वृद्धि होती है.
पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक प्रशांत देव सिंह ने कहा कि मिट्टी का स्वास्थ्य लगातार खराब हो रहा है. किसान केवल कुछ ही पोषक तत्वों की पूर्ति करते हैं, जबकि फसल के लिए 16 तत्व जरूरी होते हैं. इसलिए मिट्टी की जांच कराकर कमी वाले तत्वों की पूर्ति करना आवश्यक है.
छठे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष एवं प्रभारी डॉ. विनय कुमार सिंह ने बताया कि सरकार मखाना उत्पादन को बढ़ावा दे रही है. उन्होंने कहा कि मखाना केवल बिहार में ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में भी उगाया जा सकता है. इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को प्रशिक्षण और बीज उपलब्ध करा रहा है.
सातवें चरण में बीज वैज्ञानिक हिमांशु राय ने बताया कि अच्छी पैदावार के लिए सही बीज का चुनाव बहुत जरूरी है. कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को उन्नत किस्मों के बीजों की जानकारी और उपलब्धता के बारे में भी मार्गदर्शन देता है.
आठवें चरण में डॉ. जितेंद्र कुशवाहा ने किसानों को हरी खाद के उपयोग के फायदे बताए और कहा कि उद्यान विभाग की कई योजनाओं का लाभ लेकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं.
नवें चरण में डॉ. अंगद प्रसाद ने मऊ जिले में नीलगायों के बढ़ते आतंक से बचाव के तीन उपाय बताए. उन्होंने गोबर के घोल का छिड़काव, अंडे के घोल का प्रयोग और झटका मशीन के इस्तेमाल को प्रभावी उपाय बताया.
दसवें चरण में जादूगर सलमान ने किसानों को जागरूक करते हुए कहा कि देखा-देखी खेती और अधिक रासायनिक खाद व कीटनाशकों का प्रयोग नुकसानदायक है. उन्होंने किसानों को सरकार के मानकों के अनुसार संतुलित मात्रा में इनका उपयोग करने की सलाह दी.
कार्यक्रम के अंत में ग्रामीण चरण के तहत लकी ड्रा का आयोजन किया गया. इसमें कुल 5,500 रुपये के 10 पुरस्कार वितरित किए गए. दूसरे पुरस्कार के रूप में 2,000 रुपये सीमा सिंह को और प्रथम पुरस्कार के रूप में 3,000 रुपये बेचू राम को दिए गए.
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