ICAR PUSAदेश में कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की गई है. आईसीएआर- भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI) यानी पूसा कृषि ने वर्ष 2026-27 के लिए ग्रांट-इन-एड प्रोग्राम्स UPJA और ARISE की शुरुआत की है. यह पहल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की RKVY-RAFTAAR योजना के तहत लागू की गई है, जिसका उद्देश्य एग्री-स्टार्टअप्स को मजबूत बनाना और नए उद्यमियों को अवसर देना है.
इस कार्यक्रम के जरिए ऐसे युवाओं और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो खेती, उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए नए समाधान विकसित करना चाहते हैं. योजना के तहत चयनित प्रतिभागियों को फंडिंग के साथ-साथ तकनीकी और व्यावसायिक सहयोग भी दिया जाएगा.
UPJA को विशेष रूप से उन स्टार्टअप्स के लिए तैयार किया गया है, जो शुरुआती चरण से आगे बढ़ चुके हैं और अपने उत्पाद को बाजार में उतारने की तैयारी कर रहे हैं. इस प्रोग्राम में स्टार्टअप्स को तकनीकी सत्यापन, अनुभवी मेंटर्स का मार्गदर्शन, पायलट प्रोजेक्ट्स के अवसर और बाजार तक पहुंच बनाने में सहायता दी जाएगी.
साथ ही उद्योग से जुड़ाव भी सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि स्टार्टअप्स को व्यावसायिक नेटवर्क मिल सके. इस योजना के तहत अधिकतम 25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी.
ARISE प्री-सीड प्रोग्राम उन लोगों के लिए है, जो अभी शुरुआती स्तर पर हैं और अपने आइडिया को विकसित करना चाहते हैं. इसमें प्रतिभागियों को मेंटरशिप, उद्योग का अनुभव, तकनीकी और व्यवसायिक सत्यापन जैसी सुविधाएं दी जाएंगी. इस प्रोग्राम के तहत अधिकतम 5 लाख रुपये तक की फंडिंग का प्रावधान है, जिससे नए इनोवेशन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
इस पहल में छात्रों को भी शामिल किया गया है. उद्यमिता में रुचि रखने वाले छात्र एक विशेष ओरिएंटेशन प्रोग्राम के माध्यम से अपने विचारों को विकसित कर सकते हैं. उन्हें मेंटरशिप और इंडस्ट्री एक्सपोजर के साथ अधिकतम 4 लाख रुपये तक की सहायता दी जा सकती है.
इन प्रोग्राम्स के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार का भारतीय नागरिक होना जरूरी है और उसके पास कृषि क्षेत्र से जुड़ा कोई नया और उपयोगी विचार होना चाहिए. आवेदन प्रक्रिया 17 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है और अंतिम तिथि 17 मई 2026 निर्धारित की गई है. इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट pusakrishi.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं.
यह पहल देश में कृषि नवाचार को नई दिशा देने के साथ-साथ युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की उत्पादकता में भी सुधार की उम्मीद है.
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