अब अरारोट की खेती होगी फायदे का सौदा, ICAR ने तैयार की ये खास किस्म

अब अरारोट की खेती होगी फायदे का सौदा, ICAR ने तैयार की ये खास किस्म

खेती-किसानी में हो रहे लगातार बदलाव को देखते हुए कृषि क्षेत्र में कई नए काम किए जा रहे हैं. ऐसे में अब कृषि वैज्ञानिक भी खेती में अधिक उपज के लिए फसलों की नई किस्मों को तैयार कर रहे हैं. इसी दिशा में ICAR ने अरारोट की एक नई और उन्नत किस्म को विकसित किया है.

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अब अरारोट की खेती होगी फायदे का सौदा, ICAR ने तैयार की ये खास किस्मअरारोट की खेती

खेती में लगातार हो रहे बदलाव और मौसम की मार को देखते हुए कृषि क्षेत्र में कई नए काम किए जा रहे हैं. ऐसे में अब कृषि वैज्ञानिक भी खेती में अधिक उपज के लिए फसलों की नई किस्मों को तैयार कर रहे हैं, जो कम पानी, गर्मी पाला या अन्य चुनौतियों में भी अच्छा उत्पादन दे सकें. इसी दिशा में ICAR केंद्रीय कंद फसल अनुसंधान संस्थान, तिरुवनंतपुरम ने अरारोट की की एक नई और उन्नत किस्म को विकसित किया है. इस किस्म का नाम 'श्री आद्या' है. ये किस्म न सिर्फ उच्च उपज देने वाली है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को झेलने में भी सक्षम है. ऐसे में आइए जानते हैं इसकी खासियत क्या-क्या है.

'श्री आद्या'  किस्म की खासियत

ICAR द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 'श्री आद्या' अरारोट समय पर बुवाई और सिंचित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त किस्म है, जो कि बुवाई के करीब 7 महीनों में पककर तैयार हो जाता है. बात करें इस किस्म से होने वाली पैदावार की तो, किसान इस किस्म से प्रति हेक्टेयर औसतन 30 से 50 क्विंटल तक पैदावार ले सकते हैं. इसके साथ ही अरारोट की इस किस्म की खासियत यह है कि ये यह बेहतर उत्पादकता और स्टार्च की ज्यादा रिकवरी के जरिए किसानों की आय बढ़ जाता है, जो खेती और प्रोसेसिंग, दोनों ही उद्योगों के लिए एकदम सही है.  

कैसे करें अरारोट की खेती

अरारोट की खेती के लिए गर्म और नम जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसके लिए 20 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान अच्छा रहता है. वहीं, अरारोट की खेती के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी बेहतर होती है, जिसमें जल निकासी अच्छी हो. खेती शुरू करने से पहले खेत की 2-3 बार जुताई करके मिट्टी भुरभुरी कर लें और उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद मिला दें. अरारोट (Ararot) की खेती के लिए अप्रैल-मई का महीना सबसे उपयुक्त होता है. इसकी रोपाई कंद के टुकड़ों से की जाती है, इसलिए स्वस्थ और रोग मुक्त कंद का चयन जरूरी है. पौधों की रोपाई कतार से कतार 45 से 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे 30 से 45 सेंटीमीटर दूरी पर करें.

अरारोट के क्या हैं फायदे

अरारोट का उपयोग कई तरह की आयुर्वेदिक औषधियों में होती है. अरारोट के कंद का अर्क अपच, दमा, जलन, मूत्र रोग, खून की कमी, पेचिश, कोढ़ आदि के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है. बुजुर्ग और बच्चों में होने वाली कमजोरी को दूर करने में भी अरारोट बहुत उपयोगी है. अरारोट से बना स्टार्च या उसका द्रव हर्बल टॉनिक के रूप में उपयोग होता है जो कफ को कम करता है. दिल के मरीजों को अरारोट का द्रव हर्बल टॉनिक के रूप में दिया जाता है. 

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