प्रशासन ने किसानों को वापस दिलाई जमीन (AI Image)महाराष्ट्र के लातूर जिले में दिवाली से पहले दो किसान परिवारों को बड़ी राहत मिली है. निजी साहूकारों ने कर्ज के बदले कथित तौर पर जिन किसानों की कृषि भूमि अपने नाम करा ली थी, जिला प्रशासन ने जांच के बाद वह जमीन उनके मूल मालिकों को वापस दिला दी है. यह कार्रवाई महाराष्ट्र साहूकारी (विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत सहकारिता विभाग की जांच के बाद की गई है. लातूर के जिला कलेक्टर भारत बस्तेवाड़ और पुलिस अधीक्षक अमोल तांबे ने गुरुवार को दोनों किसानों को उनकी जमीन के 7/12 उतारे (भूमि रिकॉर्ड) सौंपे. प्रशासन के मुताबिक, दोनों मामलों में जांच के दौरान सामने आया कि जमीन की बिक्री के दस्तावेज वास्तव में कर्ज की गारंटी के तौर पर तैयार कराए गए थे. इसके बाद जिला उप निबंधक ने विवादित बिक्री विलेख रद्द कर दिए.
पहला मामला चाकूर तहसील के कालकोटी गांव की किसान मंदूबाई इरप्पा दावरे का है. उन्होंने अपनी बेटी की शादी के खर्च के लिए स्थानीय साहूकार किसान गोविंद आलमले से कर्ज लिया था. आरोप है कि किसान परिवार की आर्थिक मजबूरी और कानूनी जानकारी की कमी का फायदा उठाकर साहूकार ने कर्ज की सुरक्षा के नाम पर उनकी कृषि भूमि का बिक्री विलेख अपने पक्ष में बनवा लिया.
सहकारिता विभाग की जांच में स्पष्ट हुआ कि यह वास्तविक बिक्री नहीं, बल्कि कर्ज की गारंटी के लिए किया गया लेन-देन था. इसके बाद मंदूबाई दावरे को 1.80 हेक्टेयर कृषि भूमि वापस दिलाई गई. साथ ही साहूकार के खिलाफ चाकूर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया.
दूसरा मामला निलंगा तहसील के थोर मकनी गांव के किसान वामन श्रीपति सूर्यवंशी से जुड़ा है. आर्थिक परेशानी के कारण उन्होंने साहूकार शरद दिगंबर पाटिल से कर्ज लिया था. आरोप है कि साहूकार ने उनकी 40 आर (4,000 वर्ग मीटर) जमीन की गारंटी हासिल की और बाद में जमीन अपने नाम करा ली. इसके बाद इसे किसी अन्य व्यक्ति के नाम भी हस्तांतरित कर दिया गया.
सहकारिता विभाग की जांच में इस लेन-देन का संबंध अवैध साहूकारी से पाया गया. इसके बाद जमीन की वापसी का रास्ता साफ हुआ और किसान को उसकी भूमि वापस दिलाई गई.
महाराष्ट्र साहूकारी (विनियमन) अधिनियम की धारा 18(2) के तहत सहकारिता विभाग के अधिकारियों को अवैध साहूकारी के जरिए हासिल की गई संपत्तियों की जांच करने और उन्हें मूल मालिकों को वापस दिलाने का अधिकार है. इसी प्रावधान के तहत दोनों मामलों में विवादित बिक्री विलेख (सेल डीड) रद्द किए गए.
लातूर जिला प्रशासन ने अवैध साहूकारी के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है. जिले के अलग-अलग पुलिस थानों में अधिनियम के तहत आठ लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं. यह कार्रवाई किसानों की शिकायतों के बाद छापेमारी और शुरुआती सबूत जुटाने के आधार पर की गई.
प्रशासन को अब तक अवैध साहूकारी से जुड़ी 145 शिकायतें मिली हैं. इनमें से 66 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है. जांच में 14 मामलों में पहली नजर में अवैध साहूकारी के सबूत मिले, जिसके बाद आठ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए.
जिला कलेक्टर भारत बस्तेवाड़ ने उन किसानों से सहकारिता विभाग के पास शिकायत करने की अपील की है, जिनकी जमीन साहूकारों ने फर्जी बिक्री विलेख के जरिए अपने नाम करा ली है. उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक मजबूरी या जानकारी की कमी का फायदा उठाकर कर्ज के नाम पर उनकी जमीन का मालिकाना हक हासिल करना गैरकानूनी है. प्रशासन प्रभावित किसानों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है.
अवैध साहूकारी पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने जिले के सभी 373 लाइसेंसधारी साहूकारों के कर्ज लेन-देन की जांच के आदेश दिए हैं. इन साहूकारों ने कुल 3,534 कर्जदारों को 19.71 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है. कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को कर्ज वितरण के रिकॉर्ड की जांच करने, यह सुनिश्चित करने और रिपोर्ट जल्द सौंपने का निर्देश दिया है कि कर्ज देने के दौरान निर्धारित नियमों का पालन हुआ है या नहीं. इस जांच का उद्देश्य अधिकृत साहूकारों के जरिए भी किसानों के शोषण की आशंका को रोकना और उन्हें अनुचित कर्ज वसूली से बचाना है. (पीटीआई)
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