महाराष्ट्र में बनेगा एग्रीकल्चर मार्केटमहाराष्ट्र के पालघर जिले के डपचारी में जल्द ही एक बड़ा इंटरनेशनल एग्रीकल्चर मार्केट बनाने की तैयारी है. यह बाजार फ्रांस के मशहूर रंगिस इंटरनेशनल मार्केट की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य इस बाजार के जरिए महाराष्ट्र के किसानों को देश के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट से जोड़ना है. इस परियोजना के लिए महाराष्ट्र सरकार ने दहानू तालुका में 1,395 एकड़ जमीन मंजूर की है. सरकार इसे दुनिया के बड़े और आधुनिक इंटीग्रेटेड एग्रीकल्चर हब के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है. राज्य के मार्केटिंग मंत्री जयकुमार रावल ने हाल ही में परियोजना स्थल का दौरा कर काम की प्रगति का जायजा लिया. उन्होंने अधिकारियों को प्रोजेक्ट के विकास में तेजी लाने के निर्देश दिए.
इस एग्रीकल्चर मार्केट का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलने की उम्मीद है. यहां किसानों की उपज को सीधे बड़े बाजारों और विदेशी खरीदारों तक पहुंचाने के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार मिलने की संभावना है. प्रस्तावित हब में फल, सब्जियां, अनाज, डेयरी उत्पाद, सीफूड और मीट के लिए आधुनिक प्रोसेसिंग और पैकेजिंग की सुविधा होगी. इसके अलावा यहां बड़े स्तर पर कोल्ड स्टोरेज और एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जाएगा.
मंत्री जयकुमार रावल के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक कृषि मंडी नहीं होगी, बल्कि एक मल्टी-मॉडल एग्री लॉजिस्टिक्स हब के रूप में काम करेगा. इसे वधावन पोर्ट, नेशनल हाईवे, रेलवे, समृद्धि महामार्ग और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है. इस बेहतर कनेक्टिविटी से कृषि उत्पादों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में समय और लागत दोनों कम हो सकते हैं. साथ ही, निर्यात के लिए भी किसानों और कारोबारियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी.
सरकार के मुताबिक, इस परियोजना से करीब 10,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. स्थानीय युवाओं को भर्ती में प्राथमिकता देने की बात भी कही गई है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस परियोजना के लिए किसी स्थानीय निवासी को विस्थापित नहीं किया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, बाजार का विकास बेकार पड़ी सरकारी जमीन पर किया जाएगा. अगर परियोजना योजना के अनुसार विकसित होती है, तो यह महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है. इससे किसानों को बेहतर बाजार, भंडारण, प्रोसेसिंग और निर्यात की सुविधाएं एक ही जगह मिल सकेंगी और उनकी उपज को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी. (PTI)
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