GM Soymeal Import: सोयाबीन किसानों के 'हक' में खड़ा हुआ SOPA, पोल्‍ट्री इंडस्‍ट्री की मांग के खिलाफ खोला मोर्चा

GM Soymeal Import: सोयाबीन किसानों के 'हक' में खड़ा हुआ SOPA, पोल्‍ट्री इंडस्‍ट्री की मांग के खिलाफ खोला मोर्चा

GM सोयामील आयात के मुद्दे पर SOPA खुलकर सोयाबीन किसानों के समर्थन में उतर आया है. संगठन ने सरकार से आयात की अनुमति न देने की मांग करते हुए पोल्ट्री इंडस्ट्री की दलीलों को खारिज किया है.

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GM Soymeal Import: सोयाबीन किसानों के 'हक' में खड़ा हुआ SOPA, पोल्‍ट्री इंडस्‍ट्री की मांग के खिलाफ खोला मोर्चाGM सोयामील को लेकर चेतावनी (सांकेतिक तस्‍वीर)

देश में जेनेटिकली मॉडिफाइड सोयामील (जीएम खली- GM Soymeal) के आयात को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. ऐसे में सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि GM सोया खली के आयात की अनुमति किसी भी सूरत में न दी जाए. संगठन ने कहा है कि देश में सोयाबीन और उससे जुड़े उत्पादों की सल्‍पाई पूरी तरह पर्याप्त है और आयात की इजाजत देने से करोड़ों किसानों के हितों को सीधा नुकसान पहुंचेगा. SOPA ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को भेजे अपने ज्ञापन में पोल्ट्री उद्योग की उस मांग को खारिज किया है, जिसमें घरेलू बाजार में ऊंची कीमतों का हवाला देकर GM सोयामील आयात की पैरवी की जा रही है. 

SOPA ने पोल्‍ट्री की मांग के खिलाफ दी दलील

SOPA ने अपने ज्ञापन पत्र में कहा है कि यह मांग बाजार की वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज करती है और दीर्घकाल में भारतीय कृषि व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. बीते कुछ महीनों में सोयाबीन और सोयामील की कीमतों में तेजी देखने को मिली है. इंदौर मंडी में 31 जनवरी को सोयाबीन का भाव 56,900 रुपये प्रति टन दर्ज किया गया, जो अप्रैल 2025 के मध्य में 46,000 रुपये प्रति टन के आसपास था. इसी अवधि में सोयामील की कीमत 32,713 रुपये प्रति टन से बढ़कर 43,872 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई. इसके साथ ही कच्चे सोयाबीन तेल की एक्स फैक्ट्री कीमत भी 1,21,000 रुपये प्रति टन से बढ़कर 1,31,000 रुपये प्रति टन हो गई.

कीमतों पर प्रोसेसर्स का कंट्रोल नहीं 

SOPA का तर्क है कि सोयामील की कीमतें किसी भी तरह से प्रोसेसरों के नियंत्रण में नहीं होतीं, बल्कि यह पूरी तरह बाजार आधारित होती हैं. संगठन ने कहा कि सोयामील उत्पादन लागत का करीब 96 प्रतिशत हिस्सा कच्चे सोयाबीन की कीमत पर निर्भर करता है. अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल बाजार और घरेलू आपूर्ति की स्थिति सीधे तौर पर कच्चे माल की कीमत को प्रभावित करती है, जिसका असर तैयार उत्पाद पर स्वाभाविक रूप से पड़ता है.

SOPA ने कॉस्‍ट स्‍ट्रक्‍चर का दिया ब्योरा

SOPA ने कॉस्‍ट स्‍ट्रक्‍चर का ब्योरा देते हुए बताया कि 31 जनवरी तक प्लांट डिलीवरी पर सोयाबीन की कीमत करीब 54,900 रुपये प्रति टन थी, जबकि प्रोसेसिंग लागत लगभग 2,000 रुपये प्रति टन बैठती है. सोयाबीन तेल की प्राप्ति को जोड़ने के बाद, 82 प्रतिशत रिकवरी के आधार पर सोयामील की लागत 43,872 रुपये प्रति टन निकलती है. ऐसे में इस पूरे गणित में उद्योग के पास कच्चे माल की कीमत को कंट्रोल करने की कोई खास गुंजाइश नहीं है.

डिमांड-सप्‍लाई को लेकर आंकड़े

सप्‍लाई के मोर्चे पर SOPA ने साफ किया है कि 2025-26 ऑयल मार्केटिंग सीजन के लिए देश में सोयाबीन की स्थिति पूरी तरह संतोषजनक है. अनुमान के मुताबिक, घरेलू मांग और निर्यात पूरा करने के बाद भी करीब 3 लाख टन का कैरीओवर स्टॉक रहने की संभावना है. वहीं, कुल उपलब्धता 117.02 लाख टन आंकी गई है, जिसमें उत्पादन, आयात और पुराने स्टॉक शामिल हैं, जबकि कुल खपत और निर्यात लगभग 114 लाख टन रहने का अनुमान है.

SOPA ने चेतावनी दी है कि अगर GM सोयामील के आयात का रास्ता खोला गया तो देश को वही स्थिति झेलनी पड़ सकती है, जो आज खाद्य तेलों के मामले में देखने को मिल रही है. इससे आयात पर निर्भरता बढ़ेगी, विदेशी मुद्रा बाहर जाएगी और व्यापार घाटा और गहराएगा. संगठन ने इसे किसान विरोधी कदम करार देते हुए कहा कि ऐसे फैसले से किसान सोयाबीन की खेती से हतोत्साहित होंगे, जिसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा.

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