भारतीय फलों का बढ़ा विदेशों में जलवाजम्मू-कश्मीर के बागवानी किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने पहली बार जम्मू-कश्मीर से प्रीमियम अरेको चेरी और सेंट्रोज बेर की खेप संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भेजने में मदद की है. इस पहल से किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिलेगी और उनकी आय बढ़ने की उम्मीद है. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, इस पहली खेप में एक मीट्रिक टन बेहतर क्वालिटी वाली अरेको चेरी और सेंट्रोज बेर शामिल हैं. इन फलों को जम्मू-कश्मीर के शोपियां और पुलवामा जिलों के किसानों से खरीदा गया और फिर अबू धाबी और दुबई भेजा गया. सरकार का मानना है कि यह कदम भारत के ताजे फलों के निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा.
इस निर्यात का सबसे बड़ा फायदा किसानों को बेहतर दाम के रूप में मिलेगा. मंत्रालय के मुताबिक, निर्यात से जुड़े किसानों को घरेलू बाजार की तुलना में चेरी पर करीब 60 प्रतिशत अधिक कीमत मिली है. वहीं सेंट्रोज बेर के लिए लगभग 120 प्रतिशत अधिक दाम दिया गया है. इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय फलों की अच्छी मांग है और किसानों को अपनी उपज का बेहतर कीमत मिल सकता है.
APEDA के अध्यक्ष अभिषेक देव ने किसानों और निर्यातकों को बधाई देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रीमियम बागवानी उत्पादों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है. यहां के फलों में निर्यात की बड़ी संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा कि APEDA किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने, क्वालिटी सुधारने और नए खरीदारों तक पहुंच बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है. उनका कहना है कि UAE को अरेको चेरी और सेंट्रोज बेर का निर्यात भारतीय फलों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग का प्रमाण है.
सरकार का कहना है कि इस सफल निर्यात के बाद शोपियां और पुलवामा के किसानों के लिए विदेशों में नए बाजार खुलेंगे. इससे अधिक किसान निर्यात के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करने के लिए प्रेरित होंगे और जम्मू-कश्मीर के प्रीमियम स्टोन फ्रूट्स की पहचान वैश्विक बाजार में और मजबूत होगी.
APEDA लगातार कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है. इसके तहत किसानों को क्वालिटी सुधार, खरीदारों से संपर्क, बाजार उपलब्ध कराने और निर्यात से जुड़ी सुविधाएं दी जा रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह भारतीय फलों का निर्यात बढ़ता रहा, तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और भारत की कृषि निर्यात क्षमता भी मजबूत होगी. जम्मू-कश्मीर के बागवानी किसानों के लिए यह पहल भविष्य में नए अवसर और बेहतर कमाई का रास्ता खोल सकती है. (ANI)
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