Ethanol पर ISMA की सरकार से बड़ी अपील, E100 पंपों को दें मंजूरी; किसानों को होगा फायदा

Ethanol पर ISMA की सरकार से बड़ी अपील, E100 पंपों को दें मंजूरी; किसानों को होगा फायदा

देश में इथेनॉल को बढ़ावा देने के लिए इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने केंद्र सरकार से E100 इथेनॉल पंपों को मंजूरी देने की मांग की है. उद्योग का कहना है कि इससे इथेनॉल की आपूर्ति आसान होगी.

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Ethanol पर ISMA की सरकार से बड़ी अपील, E100 पंपों को दें मंजूरी; किसानों को होगा फायदाइथेनॉल उद्योग की सरकार से अपील (AI- तस्वीर)

देश में इथेनॉल को बढ़ावा देने की दिशा में एक बार फिर चीनी और बायो-एनर्जी उद्योग ने सरकार से बड़ी मांग की है. इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने केंद्र सरकार से केवल इथेनॉल बेचने वाले E100 ईंधन पंपों को मंजूरी देने की अपील की है. उद्योग का कहना है कि पिछले तीन साल से इस मांग को सरकार के सामने रखा जा रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.

सरकार से फिर दोहराई पुरानी मांग

ISMA ने पिछले महीने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा कि इथेनॉल डिस्टिलरी के पास समर्पित E100 फ्यूल स्टेशन बनाने की अनुमति दी जाए. संगठन का कहना है कि यह प्रस्ताव पहली बार फरवरी 2023 में दिया गया था, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से इसे मंजूरी नहीं मिली है. एसोसिएशन का मानना है कि अगर E100 पंप शुरू होते हैं तो फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा मिलेगा और इथेनॉल उद्योग पर बढ़ रहे आर्थिक दबाव को भी कम किया जा सकेगा. साथ ही किसानों को इससे फायदा भी मिलेगा.  

क्या है E100 इथेनॉल ईंधन?

E100 ऐसा ईंधन है जिसमें 100 प्रतिशत इथेनॉल का उपयोग होता है. इसे खास तौर पर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में इस्तेमाल किया जाता है. ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि ब्राजील में पिछले 40 वर्षों से E100 इथेनॉल का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है. उनका दावा है कि यह कम कार्बन उत्सर्जन वाला स्वदेशी ईंधन है, जो कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने और देश की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने में मदद कर सकता है. संगठन ने सरकार से ऑटोमोबाइल उपयोग के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानक तय करने और E100 ईंधन के लिए अलग नीति बनाने की भी मांग की है.

सस्ता हो सकता है इथेनॉल ईंधन

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि केवल इथेनॉल वाले पंप शुरू किए जाते हैं, तो इथेनॉल को पेट्रोल डिपो तक ले जाकर उसमें मिलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत घटेगी और आपूर्ति प्रक्रिया भी आसान होगी. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस व्यवस्था से E100 ईंधन की कीमत मौजूदा E20 ईंधन की तुलना में 30 से 35 प्रतिशत तक कम हो सकती है. इससे उपभोक्ताओं को सस्ता ईंधन मिलेगा और इथेनॉल की मांग भी बढ़ेगी.

अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से जूझ रहा उद्योग

इथेनॉल उद्योग इस समय अतिरिक्त उत्पादन क्षमता की समस्या का सामना कर रहा है. उद्योग ने लगभग 2,000 करोड़ लीटर इथेनॉल उत्पादन की क्षमता विकसित कर ली है, जबकि तेल विपणन कंपनियों को 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) लक्ष्य पूरा करने के लिए सालाना केवल 1,100 से 1,200 करोड़ लीटर इथेनॉल की जरूरत होती है. कम खरीद के कारण कई डिस्टिलरी आर्थिक दबाव में हैं. कुछ कंपनियों ने तो तेल विपणन कंपनियों द्वारा कम खरीद के खिलाफ अदालत का भी रुख किया है.

E20 को लेकर भी जारी है बहस

देश में E20 पेट्रोल लागू होने के बाद भी इस पर बहस जारी है. कुछ वाहन मालिकों ने माइलेज कम होने और प्रदर्शन प्रभावित होने की शिकायत की है. इसी को देखते हुए हाल ही में केंद्र सरकार ने वाहन निर्माताओं से E20 ईंधन के फायदे और उसके प्रभाव को लेकर स्पष्ट जानकारी देने को कहा था. हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों ने E20 कार्यक्रम का समर्थन किया है, लेकिन उन्होंने यह भी माना है कि E20 के इस्तेमाल से ईंधन दक्षता में कुछ कमी आ सकती है.

सरकार के फैसले पर टिकी हैं निगाहें

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार E100 पंपों को मंजूरी देती है, तो इससे इथेनॉल उद्योग को नया बाजार मिलेगा, किसानों की फसलों से बनने वाले इथेनॉल की मांग बढ़ेगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी. फिलहाल उद्योग सरकार के फैसले का इंतजार कर रहा है. अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार E100 ईंधन वितरण को लेकर क्या नीति अपनाती है और क्या लंबे समय से लंबित इस मांग को मंजूरी मिलती है. 

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