इथेनॉलदेश में E20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20) वाहनों के लिए सुरक्षित है. उनका कहना है कि इस ईंधन को लागू करने से पहले वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षण किए गए और कहीं भी ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि E20 से वाहनों के इंजन को नुकसान होता है. शनिवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने कहा कि सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की गलत जानकारियां फैलाई जा रही हैं. इन अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय लोगों को वैज्ञानिक तथ्यों को देखना चाहिए.
इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) की पूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (CMD) वर्तिका शुक्ला ने कहा कि भारत में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम किसी जल्दबाजी में शुरू नहीं किया गया है. इसे लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों ने व्यापक परीक्षण किए थे. उन्होंने बताया कि भारत ने दिसंबर 2025 तक E20 मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया था. उनके अनुसार, इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन कम करना, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है, उन्होंने यह भी कहा कि कनाडा और पैराग्वे जैसे कई देशों में भी E20 ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है और यह भारत स्टेज-6 (BS-VI) उत्सर्जन मानकों के अनुरूप है.
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के पूर्व अध्यक्ष बी. अशोक ने भी E20 इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. बी. अशोक ने कहा कि E20 ईंधन को लेकर जो आशंकाएं जताई जा रही हैं, उन्हें वैज्ञानिक अध्ययन सही साबित नहीं करते. उनके अनुसार, अब तक हुए शोध और परीक्षणों में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि E20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचता है या इससे माइलेज पर कोई बड़ा नकारात्मक असर पड़ता है.
उन्होंने यह भी कहा कि E20 को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर कई तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं. इनमें से अधिकांश दावे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं, बल्कि गलत धारणाओं या बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई बातों पर आधारित हैं. उनका मानना है कि लोगों को अफवाहों के बजाय विशेषज्ञों की राय पर भरोसा करना चाहिए.
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई जब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर फैल रही गलत जानकारियों पर 10 बिंदुओं में अपना पक्ष रखा. मंत्रालय ने उस दावे को गलत बताया जिसमें कहा गया था कि एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होता है. सरकार के अनुसार, इथेनॉल उत्पादन के लिए केवल अतिरिक्त चावल का उपयोग किया जाता है, जो देश की खाद्य सुरक्षा की जरूरतें पूरी होने के बाद उपलब्ध होता है. मंत्रालय ने बताया कि इथेनॉल डिस्टिलरी एक लीटर इथेनॉल बनाने में लगभग 3 से 5 लीटर संसाधित पानी का उपयोग करती हैं. इसके साथ ही अधिकांश संयंत्र अब पानी की बचत के लिए 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज' जैसी आधुनिक तकनीक अपना रहे हैं.
सरकार ने इंजन खराब होने, वाहन बीमा रद्द होने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने जैसे दावों को भी खारिज किया. मंत्रालय का कहना है कि E20 कार्यक्रम वैज्ञानिक शोध, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और तय सुरक्षा मानकों के आधार पर लागू किया गया है. सरकार ने बताया कि भारत में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2003 में हुई थी. इसके बाद कई चरणों में परीक्षण, तकनीकी तैयारियां और संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण की दिशा में कदम बढ़ाए गए.
हालांकि, सरकार और विशेषज्ञों के दावों के बावजूद E20 पेट्रोल को लेकर बहस अभी भी जारी है. खासकर 2023 से पहले बने पेट्रोल वाहनों के मालिकों ने ईंधन क्षमता कम होने, रखरखाव खर्च बढ़ने और इंजन की उम्र पर असर पड़ने जैसी चिंताएं जताई हैं. अब यह देखना होगा कि सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियां लोगों की इन आशंकाओं को दूर करने के लिए आगे क्या कदम उठाती हैं. फिलहाल विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर E20 ईंधन सुरक्षित है और इसका उद्देश्य देश को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत बनाना है.
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