राजस्थान हाई कोर्ट (File Photo: ITG)राजस्थान उच्च न्यायालय ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अधिसूचित फसलों की खरीद नहीं होने और खरीद के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा विकसित नहीं किए जाने के मामले में केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार और नेफेड को कारण बताते हुए लिखित जवाब पेश करने का निर्देश दिया है. अदालत ने सरकार को आखिरी मौका देते हुए मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 को तय की है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश मनीष शर्मा की खंडपीठ ने शुक्रवार को जनहित याचिका संख्या 11407/2018 पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. यह याचिका किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट की ओर से दायर की गई है.
किसान महापंचायत ने एक प्रेस बयान जारी करते हुए बताया कि सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने याचिकाकर्ता रामपाल जाट और अदालत की ओर से नियुक्त न्याय मित्र एडवोकेट प्रदीप चौधरी से सवाल किए. इसके बाद राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता गुरचरण सिंह गिल, केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भरत व्यास और नेफेड को लिखित जवाब पेश करने का निर्देश दिया गया.
याचिकाकर्ता की ओर से राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1961 की धारा 9(2)(XII) में बदलाव कर चीनी उद्योग की तर्ज पर MSP से ही फसलों की खरीद शुरू करने की मांग की गई है. इसके अलावा वेयरहाउसिंग विकास एवं विनियमन अधिनियम, 2007 और इसके तहत वर्ष 2010 में बनाए गए नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग भी अदालत के सामने रखी गई. याचिकाकर्ता ने मांग की कि बाजार में फसलों के भाव MSP से नीचे रहने की स्थिति में किसान अपनी उपज गोदाम में रखकर उसके बदले निर्धारित ब्याज दर पर लाेन ले सकें, इसके लिए जरूरी व्यवस्था बनाई जाए.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से राजस्थान में वर्ष 2012 के बाद बाजरे की खरीद नहीं होने का मुद्दा उठाया गया. साथ ही मक्का, मूंग और चना सहित अन्य फसलों को MSP से कम कीमत पर बेचने के कारण किसानों को होने वाले नुकसान का भी उल्लेख किया गया. याचिका में कहा गया कि घोषित MSP पर खाद्यान्नों की खरीद भारतीय खाद्य निगम (FCI) और दलहन-तिलहन की खरीद केंद्र की ओर से नेफेड और राज्य की ओर से राजफैड के माध्यम से की जाती है. याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने यह मुद्दा भी उठाया कि खरीद के लिए अधिकतम 90 दिन का प्रावधान होने के बावजूद वास्तविक खरीद अवधि 60 से 65 दिन तक सीमित रहती है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है.
रामपाल जाट ने इस साल राजस्थान में चना खरीद का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा. उन्होंने याचिका में कहा कि नेफेड और एनसीसीएफ की ओर से शत-प्रतिशत उपज खरीद के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) होने के बावजूद राज्य में चने की खरीद नगण्य रही.
उन्होंने दावा किया कि पर्याप्त सरकारी खरीद नहीं होने के कारण किसानों को MSP से कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ी और ऐसी स्थिति लगभग हर साल सामने आती है. अदालत ने मामले में गेहूं, बाजरा और मक्का जैसे खाद्यान्नों की खरीद से जुड़े भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राजस्थान में दलहन और तिलहन की खरीद करने वाले राजफैड को पक्षकार के रूप में शामिल करने का भी आदेश दिया.
इस जनहित याचिका पर इससे पहले 12 जुलाई 2019 को न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और नरेंद्र सिंह ढड्डा की खंडपीठ ने सुनवाई की थी. उस समय केंद्र के कृषि मंत्रालय और राजस्थान के कृषि विभाग से MSP पर खरीद की बेहतर नीति और उसके क्रियान्वयन के संबंध में सुझाव देने के निर्देश दिए गए थे. मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 सितंबर 2019 की तारीख तय की गई थी. इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से जवाब पेश करने के लिए समय मांगा जाता रहा. लेकिन अब खंडपीठ ने अंतिम अवसर देते हुए मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 को निर्धारित की है.
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