अब नहीं लगानी होगी लंबी दौड़! सहकारी समितियों को सीधे मिलेगा लोन और ग्रांट

अब नहीं लगानी होगी लंबी दौड़! सहकारी समितियों को सीधे मिलेगा लोन और ग्रांट

NCDC Amendment Bill 2026 को राज्यसभा से मंजूरी मिल गई है. नए नियमों के तहत सहकारी समितियों को अब सीधे लोन और ग्रांट मिल सकेंगे. NCDC सहकारी क्षेत्र के विकास से जुड़ी अन्य संस्थाओं में भी निवेश कर सकेगा. इस बदलाव से किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की सहकारी समितियों को आर्थिक मदद मिलने की प्रक्रिया आसान और तेज होने की उम्मीद है.

Advertisement
अब नहीं लगानी होगी लंबी दौड़! सहकारी समितियों को सीधे मिलेगा लोन और ग्रांटसहकारी समितियों के लिए बड़ा फैसला!

सहकारी समितियों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. राज्यसभा ने NCDC Amendment Bill 2026 को मंजूरी दे दी है. इससे पहले यह बिल लोकसभा में भी पास हो चुका है. नए कानून के बाद नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NCDC) देश की सहकारी समितियों को सीधे लोन और ग्रांट दे सकेगा. आसान भाषा में समझें तो अब सहकारी समितियों को आर्थिक मदद लेने के लिए पहले की तरह कई जगहों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

NCDC क्या है?

NCDC एक सरकारी संस्था है, जो देश की सहकारी समितियों की मदद करती है. इसकी शुरुआत 1963 में हुई थी. इसका काम सहकारी समितियों को आगे बढ़ने के लिए आर्थिक मदद देना है.

सहकारी समिति का मतलब ऐसे लोगों का समूह है, जो मिलकर कोई काम करते हैं. जैसे किसान मिलकर दूध, अनाज या दूसरी चीजों का कारोबार कर सकते हैं. इससे छोटे किसानों और ग्रामीण लोगों को मिलकर काम करने और कमाई बढ़ाने में मदद मिलती है.

अब सीधे मिल सकेगा पैसा

नए बिल में सबसे बड़ा बदलाव यही है कि NCDC अब सहकारी समितियों को सीधे लोन और ग्रांट दे सकेगा. मान लीजिए किसी गांव की सहकारी समिति को अपना गोदाम बनाना है, मशीन खरीदनी है या कोई नई प्रोसेसिंग यूनिट लगानी है. इसके लिए उसे पैसे की जरूरत है. नए नियम के बाद ऐसी समिति NCDC से सीधे आर्थिक मदद ले सकती है. हालांकि, इसके लिए NCDC की ओर से मांगी गई जरूरी सुरक्षा या सिक्योरिटी देनी होगी.

पहले क्या दिक्कत थी?

पहले कई मामलों में सहकारी क्षेत्र के लिए काम करने वाली संस्थाओं को NCDC से सीधे पैसा नहीं मिल पाता था. उन्हें राज्य सरकार या किसी दूसरी सहकारी संस्था के जरिए अपना प्रस्ताव भेजना पड़ता था. इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था. कई बार जरूरी काम के लिए पैसा समय पर नहीं मिल पाता था. अब सरकार इस प्रक्रिया को आसान करना चाहती है, ताकि सहकारी समितियों तक पैसा जल्दी पहुंच सके.

दूसरी संस्थाओं को भी मिल सकेगी मदद

सिर्फ सहकारी समितियां ही नहीं, बल्कि ऐसी दूसरी संस्थाएं भी मदद पा सकेंगी जो सहकारी क्षेत्र के लिए काम करती हैं. उदाहरण के लिए कोई संस्था किसानों के लिए नई तकनीक ला रही है, फसल की प्रोसेसिंग में मदद कर रही है या किसानों के उत्पाद बेचने के लिए बाजार तैयार कर रही है, तो उसे भी NCDC की मदद मिल सकती है, अगर उसका काम सहकारी क्षेत्र के फायदे के लिए है.

NCDC किसी सहकारी संस्था में लगा सकेगा पैसा

नए बिल के तहत केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद NCDC किसी सहकारी संस्था या सहकारी क्षेत्र के लिए काम करने वाली संस्था की शेयर कैपिटल में भी पैसा लगा सकेगा.  NCDC सिर्फ लोन देने वाली संस्था नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर किसी संस्था के विकास में निवेश भी कर सकेगा.

खाने-पीने की चीजों का दायरा भी बढ़ेगा

अब केंद्र सरकार जिन दूसरी खाद्य चीजों को अधिसूचित करेगी, उन्हें भी इसमें शामिल किया जा सकेगा. इससे खाद्य प्रसंस्करण और इससे जुड़े सहकारी कारोबार को मदद मिलने का रास्ता आसान होगा.

औद्योगिक काम के लिए जगह की पाबंदी कम होगी

नए बदलाव में औद्योगिक वस्तुओं (Industrial goods) से जुड़े काम के लिए पहले से लागू भौगोलिक सीमा को भी हटाने का प्रस्ताव है. इसका मतलब है कि किसी जगह की सीमा के कारण सहकारी क्षेत्र से जुड़े जरूरी काम को मदद मिलने में परेशानी कम होगी. NCDC अलग-अलग जगहों की जरूरत के हिसाब से सहायता दे सकेगा.

किसानों को क्या फायदा होगा?

इस बदलाव का फायदा सीधे तौर पर किसानों और ग्रामीण लोगों को भी मिल सकता है. अगर सहकारी समितियों को आसानी से पैसा मिलेगा तो वे गोदाम, मशीन, प्रोसेसिंग यूनिट, तकनीक और मार्केटिंग जैसी सुविधाओं पर पैसा खर्च कर सकेंगी. इससे किसान अपनी उपज को बेहतर तरीके से संभाल और बेच सकेंगे. उनकी कमाई बढ़ाने के नए रास्ते भी खुल सकते हैं.

हालांकि, इसका असली फायदा तभी मिलेगा जब नए नियमों को सही तरीके से लागू किया जाए और पैसा पाने की प्रक्रिया आसान रखी जाए.

सरकार पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त बजट का बोझ

राज्यसभा में बिल पर चर्चा के दौरान सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि इस बिल में सरकार की ओर से NCDC को अतिरिक्त बजट देने का कोई प्रावधान नहीं है. उन्होंने कहा कि इस बदलाव का मकसद NCDC के काम का दायरा बढ़ाना और उसे बदलते समय के हिसाब से मजबूत बनाना है.

1962 के कानून में फिर हुआ बदलाव

NCDC का मूल कानून National Cooperative Development Corporation Act, 1962 है. इसमें इससे पहले 1973, 1974 और 2002 में बदलाव किए जा चुके हैं. अब 2026 में एक बार फिर इस कानून में बदलाव किया गया है. सरकार का कहना है कि इससे देश का सहकारी क्षेत्र ज्यादा मजबूत, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनेगा.

ये भी पढ़ें: 

भारत में ‘कैंसर’ वाला हर्ब‍िसाइड लाना चाहती थी चीनी कंपनी, केंद्र सरकार ने दिया झटका, जानें पूरा मामला
AI पर गलती से भी न करें आंख मूंदकर भरोसा, किसान ने गंवाई 25 एकड़ की फसल

POST A COMMENT