गेहूं फसल पर मंडराया खतरा!उत्तर भारत के गेहूं किसानों के लिए जनवरी के पहले हफ्ते में मौसम को लेकर चिंता बढ़ गई है, लेकिन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का मानना है कि फरवरी में संभावित गर्मी का असर इस बार गेहूं की फसल पर सीमित रह सकता है. मौसम विभाग के अनुमान के बाद जहां किसान सतर्क हो गए हैं, वहीं वैज्ञानिक बदलते बीज पैटर्न और नई किस्मों को बड़ी राहत के तौर पर देख रहे हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संकेत दिए हैं कि जनवरी 2026 के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रह सकता है.
मौसम विभाग का यही अनुमान किसानों की चिंता का कारण बना है, क्योंकि फरवरी का महीना गेहूं की बालियों में दाना भरने का सबसे अहम दौर होता है. इस चरण में तापमान बढ़ने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है, जैसा कि फरवरी 2022 में देखने को मिला था. हालांकि, ICAR के सीनियर वैज्ञानिकों का कहना है कि हाल के वर्षों में गेहूं की किस्मों में बड़ा बदलाव आया है.
‘बिजनेसलाइन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, परिषद के उप महानिदेशक डी के यादव ने कहा है कि उत्तर-पश्चिमी मैदानों और मध्य भारत में लगभग 75 प्रतिशत क्षेत्र में ऐसी किस्में बोई जा रही हैं, जो अंतिम अवस्था की गर्मी को सहन करने में सक्षम हैं. इनमें DBW 187, HD 3226 और HD 3086 जैसी किस्में प्रमुख हैं, जो तापमान बढ़ने की स्थिति में भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करती हैं.
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि तापमान बढ़ने का समय और उसकी तीव्रता दोनों ही बेहद अहम हैं. अगर फरवरी 15 से पहले तापमान असामान्य रूप से बढ़ता है तो जोखिम ज्यादा होता है. वहीं, दिन का तापमान अगर 26 से 27 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रहता है तो आमतौर पर फसल को नुकसान नहीं होता. लेकिन, अगर यह तापमान लंबे समय तक 28 से 29 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर बना रहता है तो उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है.
ICAR ने पिछले कुछ वर्षों में अगेती बुआई के लिए भी खास किस्में बनाई हैं, जिन्हें अक्टूबर में बोया जाता है. इन किस्मों में फरवरी तक दाना भरने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो जाती है, जिससे बाद की गर्मी का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यही रणनीति आने वाले समय में गेहूं उत्पादन को स्थिर रखने में मदद करेगी.
मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि फरवरी 2025 देश के लिए ऐतिहासिक रूप से गर्म महीना रहा था. उस दौरान औसत न्यूनतम तापमान 1901 के बाद सबसे अधिक दर्ज किया गया था, जबकि अधिकतम तापमान भी दूसरे स्थान पर रहा. इसके बावजूद देश ने 2024-25 में रिकॉर्ड 117.94 मिलियन टन गेहूं उत्पादन हासिल किया, जो वैज्ञानिकों के भरोसे को मजबूत करता है.
वहीं, इस बार बुवाई के आंकड़े भी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं. दिसंबर के अंत तक गेहूं की बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले थोड़ा अधिक रहा है और विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस सीजन में भी रिकॉर्ड क्षेत्र में फसल बोई जाएगी. सरकार ने 2025-26 के लिए 119 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य तय किया है, जिसे अप्रैल से कटाई के दौरान हासिल करने की उम्मीद की जा रही है.
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