IIRR हैदराबाद में ‘स्पीड ब्रीडिंग’ सुविधा पर काम शुरू, नई धान बीज किस्में कम समय में तैयार होंगी

IIRR हैदराबाद में ‘स्पीड ब्रीडिंग’ सुविधा पर काम शुरू, नई धान बीज किस्में कम समय में तैयार होंगी

हैदराबाद के भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान में स्पीड ब्रीडिंग सुविधा स्थापित की जा रही है, जिससे धान की नई किस्मों के विकास का समय 4-5 साल से घटकर करीब 2 साल रह जाएगा. नियंत्रित वातावरण में अधिक फसल चक्र पूरे कर शोध कार्य को तेज किया जाएगा.

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IIRR हैदराबाद में ‘स्पीड ब्रीडिंग’ सुविधा पर काम शुरू, नई धान बीज किस्में कम समय में तैयार होंगीधान किस्‍माें के बीज जल्‍दी होंगे तैयार

हैदराबाद के राजेंद्रनगर स्थित भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIRR) ने बुधवार से उन्नत ‘स्पीड ब्रीडिंग’ सुविधा पर काम शुरू कर दिया है. यह सुवि‍धा 4-5 महीने में ऑपरेशन शुरू कर देगी. IIRR भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत कार्य करता है. इस नई तकनीक से धान सहित अन्य फसलों की नई किस्मों के विकास की प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी तेज हो जाएगी. पारंपरिक तरीके से जहां किसी नई किस्म को स्थिर और विकसित करने में 4-5 साल लग जाते थे, वहीं इस सुविधा के जरिए वही काम करीब 2 साल में पूरा किया जा सकेगा. वैज्ञानिकों के अनुसार, नियंत्रित वातावरण में एक साल में 4-5 फसल चक्र पूरे किए जा सकते हैं, जिससे ब्रीडिंग का पूरा चक्र तेजी से आगे बढ़ेगा.

नियंत्रित वातावरण से मिलेगी रफ्तार

इस तकनीक में प्रकाश अवधि, रोशनी की तीव्रता, तापमान और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे कारकों को नियंत्रित किया जाता है. इससे पौधों में फूल आने और अगली पीढ़ी बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे मौसम पर निर्भरता कम होगी और सालभर शोध कार्य संभव रहेगा.

12 अत्याधुनिक चैंबर बनेंगे

करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस परियोजना में 12 आधुनिक स्पीड ब्रीडिंग चैंबर तैयार किए जाएंगे. इसकी आधारशिला मांगीलाल जाट ने रखी. यह सुविधा तैयार होने के बाद दक्षिण भारत की सबसे बड़ी स्पीड ब्रीडिंग यूनिट मानी जाएगी.

अन्य संस्थानों को भी मिलेगा फायदा

यह केंद्र सिर्फ IIRR तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी और निजी क्षेत्र के अन्य शोध संस्थानों को भी इसका लाभ मिलेगा. खासकर धान अनुसंधान के साथ-साथ अन्य फसलों के विकास कार्य में भी तेजी आएगी.

जीन एडिटिंग और शोध को मिलेगा बढ़ावा

स्पीड ब्रीडिंग सुविधा से जीन एडिटिंग और जेनेटिक रिसर्च को भी मजबूती मिलेगी. तेजी से नई पीढ़ियां तैयार होने से मैपिंग पॉपुलेशन और अन्य वैज्ञानिक अध्ययनों में भी समय की बचत होगी. इससे किसानों तक बेहतर और उन्नत किस्में जल्दी पहुंच सकेंगी.

वैज्ञानिकों ने बताई तकनीक की खासियत

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंसिपल साइंटिस्ट सतेन्द्र मंगरौठिया ने कहा कि स्पीड ब्रीडिंग तकनीक में प्रकाश अवधि, रोशनी की तीव्रता, तापमान और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे कारकों को नियंत्रित किया जाता है. इससे पौधों में फूल आने और नई पीढ़ी बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है और सालभर शोध कार्य संभव रहता है.

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