ज्वॉर और रागी का फिर से बढ़ा जलवा आज की तेज और भागदौड़ वाली जिंदगी में हर कोई अपने पोषण को नजरअंदाज कर देते हैं. आज की बिजी जिंदगी में लोगों का भरोसा फिर से उसी पुरानी धरोहरों पर होने लगा है जिस पर हमारे पूर्वज करते थे. हमारे घर के बुजुर्ग अक्सर अपनी रोजमर्रा की ऊर्जा और पोषण के लिए ज्वार और रागी पर निर्भर थे. ज्वार और रागी उन विरासत में शामिल हैं जो बेहद पौष्टिक अनाज, जो सदियों से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं. आज जब हम स्वास्थ्य के लिए अवयेर हैं और हेल्दी ऑप्शंस के बारे में सोचते हैं तो इनका ही नाम दिमाग में आता है. एक बार फिर से बिजी लाइफस्टाइल में लोग फिर से इन पर विश्वास करने लगे हैं.
ज्वार जिसे सोरघम (sorghum) के नाम से भी जाना जाता है, और रागी, जिसे आमतौर पर फिंगर मिलेट कहा जाता है, प्राचीन समय से भारतीय पाक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा रहे हैं. विविध जलवायु परिस्थितियों में अपने अनुकूलन और उच्च पोषण मूल्य के कारण ये अनाज सदियों से सराहे जाते रहे हैं. पांच दशक पहले तक ज्वार, रागी और बाजरा भारत की डाइट का अहम हिस्सा थे. लेकिन फिर चावल और गेहूं ने इस हद तक इन्हें रिप्लेस कर दिया कि लोग भूल ही गए कि वो इन्हें कैसे अपने रोजाना के भोजन का हिस्सा बन सकते हैं. लेकिन एक बार फिर इन मोटे अनाजों ने कमबैक किया और अब तो पोहा से लेकर कुकीज और यहां तक कि नूडल्स तक में इनके विकल्प मौजूद हैं. शायद इसलिए ही अब इन्हें 'श्रीअन्न' कहा जाने लगा है.
ज्वार और रागी की खेती भारत में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश महाराष्ट्र समेत अब उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी की जाने लगी है. महाराष्ट्र के सोलापुर के लिए तो ये फसलें का गर्व हैं जहां ये सूरज की गर्मी में खूब पनपती हैं. सोलापुर ज्वार की खेती के लिए देशभर में प्रसिद्ध है और यही ज्वार-आधारित मिलेट उत्पादों के निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र भी है. ज्वार जैसी फसलें ज्यादा तापमान वाली जलवायु में अच्छी तरह से उगती हैं. इसके लिए औसतन 27°C से ज्यादा का तापमान और 350 मिमी से 900 मिमी तक की मध्यम वर्षा अनुकूल मानी जाती है. महाराष्ट्र पूरे भारत में ज्वार उत्पादन का सबसे बड़ा राज्य है.
शायद हमारे पूर्वजों को मालूम था कि ये अनाज स्वास्थ्य के लिए कितने फायदेमंद हैं. इसलिए उन्होंने बुद्धिमानी से इन्हें अपने रोजाना के आहार में शामिल किया ताकि वे स्वस्थ, ऊर्जावान और मजबूत बने रहें. चलिए फिर आज आपको भी ज्वॉर और रागी में मौजूद पोषण वैल्यू के बारे में बताते हैं.
ग्लूटेन-फ्री
ज्वार प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-फ्री होता है, इसलिए यह गेहूं बेस्ड प्रॉडक्ट्स का एक बेहतर विकल्प बन गया है. यह उन लोगों के लिए बिल्कुल उपयुक्त है जिन्हें ग्लूटेन से एलर्जी होती है.
प्रोटीन से भरपूर
साधारण दिखने के बावजूद, ज्वार प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है, जो मांसपेशियों की मरम्मत, डेवलपमेंट और ओवरऑल हेल्थ के लिए जरूरी है.
फाइबर से भरपूर
ज्वार पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है और वेट कंट्रोल में कारगर है. यह ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस करने में भी मददगार होता है.
लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स
ज्वार का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है यानी इसे खाने से ब्लड शुगर का लेवल तेजी से नहीं बढ़ता. इस वजह से यह डायबिटीज से पीड़ित लोगों और ब्लड शुगर कंट्रोल रखने वालों के लिए एक अच्छा ऑप्शन है.
कैल्शियम बूस्टर
रागी अपने हाई कैल्शियम लेवल के लिए जानी जाती है. यह मजबूत हड्डियों और दांतों को बनाए रखने के लिए बहुत अहम है और हर आयु वर्ग के लोगों के लिए एक उत्तम विकल्प है.
आयरन से भरपूर
आजकल कई लोग, खासकर महिलाएं, एनीमिया से पीड़ित रहती हैं. रागी में भरपूर मात्रा में आयरन होने के कारण यह हड्डियों के बेहतर विकल्प है. यह ब्लड सर्कुलेशन को स्वस्थ रखने और थकान रोकने में भी मदद करती है.
एंटी-ऑक्सीडेंट का सोर्स
रागी एंटी-ऑक्सीडेंट का एक रिच सोर्स है. यह ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद है. इससे लंबे समय तक बीमारियों का रिस्क घटता है और इम्युनिटी सिस्टम मजबूत होता है.
विटामिन और खनिजों से भरपूर
रागी कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम और जिंक समेत कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होती है. इसमें कैल्शियम और आयरन की मात्रा खासतौश्र विशेष रूप से अधिक होती है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में मदद करती है और एनीमिया से लड़ने में सहायक होती है.
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