
खाद्य पदार्थों की जांच करते हुए अधिकारीत्योहारों के सीजन को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है. होली और ईद जैसे बड़े त्योहारों के दौरान मिठाइयों, मावे और दुग्ध उत्पादों की खपत तेजी से बढ़ जाती है. इसी बढ़ी हुई मांग के बीच मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं, जिन्हें रोकने के लिए जिले का खाद्य विभाग सड़कों पर उतर आया है और व्यापक स्तर पर अभियान चला रहा है. बुधवार को खाद्य विभाग की टीम ने जिले के विभिन्न इलाकों में एक साथ छापेमारी करते हुए खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की. इस दौरान टीम ने छह अलग अलग खाद्य नमूने भरकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा.
कार्रवाई के दौरान चरथावल थाना क्षेत्र में स्थित एक मिठाई दुकान पर पहुंची टीम को भारी मात्रा में संदिग्ध खाद्य सामग्री मिली. मौके पर 250 किलो सफेद रसगुल्ले, पांच किलो मावा और पांच किलो बूंदी के लड्डू ऐसे हालात में रखे पाए गए, जो स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित नहीं माने जा सकते थे. इसके अलावा एक अन्य गांव में भी खाद्य विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई की.

यहां करीब 280 किलो मावा अस्वच्छ और खराब परिस्थितियों में रखा हुआ मिला. प्राथमिक जांच में इन सभी उत्पादों को खाने के योग्य नहीं माना गया. आम जनता की सेहत को ध्यान में रखते हुए विभाग ने बिना देरी किए मौके पर ही इन सभी खाद्य पदार्थों को नष्ट करा दिया, ताकि इनके बाजार में पहुंचने की कोई संभावना न रहे.
खाद्य विभाग ने साफ कहा कि त्योहारों के नाम पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा. विभागीय अधिकारियों ने कहा कि यह विशेष अभियान सिर्फ एक दिन की कार्रवाई नहीं है, बल्कि होली के बाद ईद तक लगातार जारी रहेगा. इस दौरान जिलेभर में मिठाई दुकानों, डेयरियों, मावा और दूध से जुड़े प्रतिष्ठानों पर नियमित निरीक्षण और सैंपलिंग की जाएगी.
सहायक आयुक्त खाद्य-II अर्चना धीरान ने बताया कि त्योहारों के समय खाद्य पदार्थों की मांग अचानक बढ़ जाती है, जिसके कारण उत्पादन और आपूर्ति भी तेज हो जाती है. ऐसे में मिलावट की आशंका बढ़ जाती है. इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जांच के लिए लिए गए नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद अगर कोई नमूना मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो संबंधित दुकानदार या कारोबारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और केस दर्ज किया जाएगा.
खाद्य विभाग का कहना है कि इस अभियान का मकसद सिर्फ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित, शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है. प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे संदिग्ध खाद्य सामग्री की सूचना विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर जनस्वास्थ्य की रक्षा की जा सके.
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