बाराबंकी में किसान कारवां में जुटी किसानों की भीड़मेंथा, गन्ना, फलों एवं सब्जियों की खेती के दम पर खुद के साथ जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे किसानों के जिले बाराबंकी में ‘किसान तक’ का किसान कारवां अपने 32वें पड़ाव के रूप में देवा ब्लॉक के सलारपुर गांव पहुंचा. मेंथॉल तेल, गन्ना, आम, केला, मशरूम, आलू, टमाटर, ग्लेडियोलस और मसाले यहां के किसानों की प्रमुख नकदी फसलें हैं, जो उनकी अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने का सफल माध्यम है. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत प्रदेश के 75 जिलों में चल रही इस विशेष कवरेज के दौरान गांव में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर आधुनिक खेती से जुड़ी जानकारियां हासिल की. इस अवसर पर कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों, स्वयं सहायता समूहों और प्रगतिशील किसानों ने सक्रिय भागीदारी निभाई.
जनपद बाराबंकी में जब ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा तो गांव के किसानों के चेहरों पर विशेष उत्साह देखने को मिला. कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं, जिनका समाधान विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न चरणों में किया.
साथ ही इफको, चंबल फर्टिलाइजर्स, रिलायंस इंडस्ट्री लिमिटेड (बायो एनर्जी सी.वि.जी) के विशेषज्ञों ने कृषि में उर्वरकों के संतुलित उपयोग और उनके लाभ के बारे में जानकारी दी. साथ ही जेके टायर के प्रतिनिधियों द्वारा अपने उत्पादों के बारे में जानकारी दी. कार्यक्रम के अंत में अतिथियों और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया और लकी ड्रॉ के माध्यम से 12 किसानों को नकद पुरस्कार भी प्रदान किए गए.
प्रथम चरण में कृषि विशेषज्ञ एस.के. सिंह ने कहा कि किसानों को अगर अपनी खेती में सुधार लाना है तो उन्हें खाद का सही प्रबंधन करते हुए ही खेतों में उसका प्रयोग करना चाहिए.
उन्होंने बताया कि अगर खेती में कुछ नए बीज या नई विधियां आ रही हैं तो किसानों को उनका प्रयोग अवश्य करना चाहिए, ताकि वे उत्पादन से जुड़ी जानकारी को समझ सकें और देख सकें कि उनकी फसल पर उसका किस प्रकार प्रभाव पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि अभी तक किसानों को जागरूक करने का कार्य विभिन्न विभागों, जैसे पशुपालन विभाग, द्वारा किया जाता था. लेकिन, अब यह कार्य ‘किसान तक’ जैसा मीडिया संस्थान कर रहा है, जो एक अच्छी पहल है.
दूसरे चरण में वरिष्ठ पत्रकार जे.पी. सिंह ने ‘किसान तक’ के संदेशों को किसानों तक पहुंचाने का कार्य किया. उन्होंने बताया कि किसान कारवां का उद्देश्य यह है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और खेती में उपयोग हो रही तकनीकों की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जाए. इन तमाम विषयों पर किसानों को जागरूक करने और किसान की बात को किसान के खेत तक पहुंचाने का कार्य किसान कारवां कर रहा है.
तीसरे चरण में पशुपालन अधिकारी एन.के. राय ने पशुपालकों को थनैला रोग के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि अगर पशु के थन में किसी प्रकार की दिक्कत हो तो सबसे पहले पशु चिकित्सक से संपर्क अवश्य करें. साथ ही उन्होंने पशुओं के टीकाकरण के बारे में भी जानकारी दी और कहा कि सरकार की ओर से समय-समय पर पशुओं का टीकाकरण कराया जाता है, जिसका लाभ किसानों को अवश्य लेना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर हम पशुपालन करते हैं तो उसके लाभ और हानि दोनों को समझकर ही काम करें. इसके अतिरिक्त डेयरी क्षेत्र में भी सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ किसान ले सकते हैं.
चौथे चरण में मैजिशियन सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की. उन्होंने किसानों को गोबर खाद के इस्तेमाल और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने वर्मी कंपोस्ट और स्वयं सहायता समूह जैसे विषयों पर भी किसानों के बीच चर्चा-विमर्श किया.
पांचवें चरण में इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक राजकुमार ने मिट्टी के विभिन्न प्रकारों को ध्यान में रखते हुए उर्वरकों के इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा की जांच जरूर करवानी चाहिए.
अगर यह मात्रा कम है तो उसे बढ़ाने के लिए गोबर की खाद, कंपोस्ट, हरित खाद और दलहनी फसलों के अवशेषों को खेत में मिलाना चाहिए, जिससे कार्बनिक पदार्थ बढ़ता है और मिट्टी की उर्वराशक्ति मजबूत होती है.
उन्होंने बताया कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग से फसलों को लगभग 80-90 प्रतिशत तक पोषक तत्वों की उपलब्धता का लाभ मिलता है, जबकि पारंपरिक दानेदार उर्वरकों से यह लाभ अपेक्षाकृत कम मिलता है.
छठे चरण में भूमि संरक्षण अधिकारी सौरभ कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें मिट्टी की जांच अवश्य करवानी चाहिए. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रदूषण बढ़ रहा है, उसका प्रभाव हमारे खान-पान पर भी पड़ रहा है. उन्होंने किसानों से जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाने की अपील की.
उन्हाेंने कहा कि जैविक खेती से मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ेगी और रासायनिक उर्वरकों का लगातार हो रहा उपयोग कम होगा. मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाना बेहद जरूरी है, इसलिए अगर संभव हो तो ज्यादा से ज्यादा गोबर खाद का इस्तेमाल करना चाहिए.
सातवें चरण में प्रगतिशील किसान निमित कुमार सिंह ने किसानों को मधुमक्खी पालन से जुड़ी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन से किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. उन्होंने मित्र कीटों के महत्व को समझाया. जिसमें मधुमक्खी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
उन्होंने कहा कि मधुमक्खियों को केवल शहद उत्पादन तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें खेती का अभिन्न हिस्सा समझें, क्योंकि वे फसलों के परागण में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने एक डिब्बे से मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी और आज उनके पास 45 से अधिक डिब्बे हैं.
आठवें चरण में रिलायंस इंडस्ट्री लिमिटेड (बायो एनर्जी सी.वी.जी.) के प्रतिनिधि अशोक सिंह ने कंपनी द्वारा किसानों तक पहुंचाए जा रहे उत्पादों के बारे में विस्तार से जानकारी दी.उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में कंपनी कृषि से जुड़े कई नए उत्पाद लेकर आ रही है, जो किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ खेती की उर्वराशक्ति बढ़ाने में सहायक होंगे.
उन्होंने फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर उत्पाद के सही उपयोग और उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. साथ ही उन्होंने बताया कि पराली से किसान किस प्रकार अपनी आय बढ़ा सकते हैं, इस पर भी संस्थान कार्य कर रहा है.
नौवें चरण में चंबल फर्टिलाइजर के प्रतिनिधि आशीष कुमार ने ‘उत्तम प्रणाम’ और ‘उत्तम सुपरराइजा’ उत्पादों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ये दोनों जैव-उत्पाद किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हैं और इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वराशक्ति भी बनी रहती है.
ये उत्पाद रसायन-मुक्त हैं और खेत की सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाते. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चंबल फर्टिलाइजर की ओर से मिट्टी की जांच निशुल्क कराई जाती है. अतः किसान अपनी मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं, क्योंकि वर्तमान समय में मिट्टी की जांच अत्यंत आवश्यक है.
अंतिम, दसवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और दूसरे विजेता जगदीश को 2000 रुपये इनाम के रूप में दिए गए. इसके साथ ही प्रथम विजेता के तौरपर दिनेश को 3000 रुपये की इनाम राशि दी गई. किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.
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