बंधवाड़ी लैंडफिल (फाइल फोटो)गुरुग्राम में बढ़ते कचरा संकट और लगातार दबाव झेल रहे बंधवाड़ी लैंडफिल के समाधान की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है. केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने शुक्रवार को धनकोट लेग-3 में बायोरिमेडिएशन पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की. इस प्रोजेक्ट के तहत प्राकृतिक रूप से मौजूद सूक्ष्मजीवों और फफूंद की मदद से वर्षों पुराने जमा कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जाएगा. यह पहल हरियाणा के राज्य स्तरीय विश्व पर्यावरण दिवस कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही. इस दौरान सेक्टर-102 में मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी की आधारशिला भी रखी गई. साथ ही शहर के 170 पार्कों तक ट्रीटेड वेस्टवॉटर पहुंचाने की परियोजना की भी शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य पानी के पुनः उपयोग को बढ़ावा देना है.
इस तकनीक में बैक्टीरिया और फफूंद जैसे सूक्ष्मजीवों के जरिए पुराने कचरे के जैविक हिस्से को नियंत्रित तरीके से विघटित किया जाता है. इससे कचरे की मात्रा कम करने, दुर्गंध घटाने, मीथेन उत्सर्जन कम करने और लंबे समय से कचरे से घिरी जमीन को दोबारा उपयोग योग्य बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
अधिकारियों के अनुसार, यह पायलट परियोजना इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि बंधवाड़ी लैंडफिल एनसीआर की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में शामिल रहा है.
यहां वर्षों से लाखों टन पुराना कचरा जमा है और लीचेट, आग लगने और वायु प्रदूषण जैसी समस्याओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं. अगर यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में गुरुग्राम के अन्य पुराने कचरा स्थलों पर भी इसे अपनाया जा सकता है.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि आधुनिक शहरों में शामिल होने के बावजूद गुरुग्राम को स्वच्छता और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में अभी काफी सुधार की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अगर शहर प्रदूषण नियंत्रण और साफ-सफाई के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करता है तो यह दुनिया के अग्रणी शहरों में अपनी जगह बना सकता है.
मंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं होना चाहिए और हर तरह के प्रदूषण पर नियंत्रण जरूरी है. उन्होंने एनसीआर में पुराने बीएस-1, बीएस-2 और बीएस-3 वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की बात कही.
साथ ही सार्वजनिक स्थलों और सरकारी परिसरों में पड़े कबाड़ और छोड़े गए वाहनों के वैज्ञानिक निपटान के निर्देश दिए. निर्माण स्थलों से उठने वाली धूल और वाहन उत्सर्जन को भी वायु प्रदूषण की बड़ी वजह बताते हुए नियंत्रण बढ़ाने पर जोर दिया.
हरियाणा के वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि गुरुग्राम की पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है. उन्होंने लोगों से घर स्तर पर कचरा अलग-अलग करने, प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने, रीसाइक्लिंग अपनाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की अपील की. साथ ही प्रधानमंत्री के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से जुड़कर कम से कम दो पौधे लगाने का आह्वान किया.
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