दाम नहीं मिले तो किसानों ने छोड़ा मोटा अनाजदेश में मोटे अनाज (श्री अन्न) को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. बाजरा, ज्वार, रागी और अन्य मिलेट्स को सेहत के लिए फायदेमंद बताते हुए किसानों को इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि इस साल किसानों का रुझान मोटे अनाज की खेती से कम हुआ है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ सीजन 2026 में मोटे अनाज की बुवाई का क्षेत्रफल पिछले साल की तुलना में करीब 12.83 लाख हेक्टेयर घट गया है.
कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक खरीफ फसलों के तहत श्री अन्न और मोटे अनाज का कुल क्षेत्रफल 157.77 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है. जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 170.60 लाख हेक्टेयर था. यानी एक साल में करीब 12.83 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कमी आई है.
आंकड़ों के मुताबिक, मोटे अनाज की खेती में सबसे ज्यादा गिरावट कर्नाटक, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में देखने को मिली है. इन राज्यों में किसानों ने इस बार मोटे अनाज की जगह दूसरी फसलों को ज्यादा प्राथमिकता दी है.
मोटे अनाज की प्रमुख फसलों में शामिल बाजरा और मक्का के रकबे में भी गिरावट दर्ज की गई है. रिपोर्ट के अनुसार, बाजरे की बुवाई पिछले साल के 61.64 लाख हेक्टेयर से घटकर इस साल 57.44 लाख हेक्टेयर रह गई है. यानी बाजरे का क्षेत्रफल करीब 4.20 लाख हेक्टेयर कम हुआ है.
वहीं, मक्के का रकबा भी घटा है. पिछले साल 90.15 लाख हेक्टेयर में मक्का बोया गया था, जबकि इस साल यह घटकर 83.56 लाख हेक्टेयर रह गया है. मक्के के क्षेत्रफल में करीब 6.59 लाख हेक्टेयर की कमी आई है.
किसानों का कहना है कि मोटे अनाज की खेती करने के बाद सबसे बड़ी चुनौती फसल बेचने की होती है. कई इलाकों में किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता है. बाजार में मांग और खरीद व्यवस्था कमजोर होने के कारण किसान ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें उन्हें बेहतर कमाई की उम्मीद दिखाई देती है.
किसानों का मानना है कि केवल खेती के लिए जागरूक करना काफी नहीं है, बल्कि सरकार को खरीद व्यवस्था मजबूत करनी होगी और मोटे अनाज के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना होगा.
भारत ने हाल के वर्षों में मोटे अनाज को बढ़ावा देने पर काफी जोर दिया है. श्री अन्न को पोषण, कम पानी में खेती और जलवायु अनुकूल फसल के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है. लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों के सामने लाभकारी मूल्य और बिक्री की समस्या बनी हुई है.
अगर किसानों को मोटे अनाज की खेती से अच्छी आमदनी नहीं मिलेगी तो वे धीरे-धीरे दूसरी फसलों की ओर रुख कर सकते हैं. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन के साथ-साथ खरीद, भंडारण और बाजार व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी है.
मोटे अनाज की खेती को बढ़ाने के लिए किसानों को सिर्फ योजनाओं की जानकारी देना काफी नहीं होगा. उन्हें यह भरोसा दिलाना होगा कि इस फसल से उनकी आय बढ़ सकती है. इसके लिए बेहतर एमएसपी, सरकारी खरीद और स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट की जरूरत है. तभी श्री अन्न अभियान को जमीन पर मजबूती मिल सकेगी और किसान दोबारा मोटे अनाज की खेती की ओर लौटेंगे.
ये भी पढ़ें:
महाराष्ट्र में नकली पनीर पर बड़ा वार! ‘एनालॉग पनीर’ बेचने पर जेल और 1 लाख तक जुर्माना
लखनऊ के विनोद पांडेय को चढ़ा organic सब्जियां उगाने का जुनून, घर की छत को बनाया खेत
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today