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e-NAM पर FPO के व्यापार का दबदबा, इस साल बिक्री में दोगुना तक का इजाफा

e-NAM पर FPO के व्यापार का दबदबा, इस साल बिक्री में दोगुना तक का इजाफा

वित्त वर्ष 2023-24 में ई-नाम पर एफपीओ के जरिये की गई बिक्री में लगभग दोगुना तक उछाल आया है. इस साल ई-नाम पर जहां 42,875 टन की बिक्री की गई है, वहीं पिछले साल यह मात्रा 21,540 टन थी. हालांकि ई-नाम पर एफपीओ के जरिये की गई बिक्री का आंकड़ा बहुत छोटा है, लेकिन सालभर में इसमें आई वृद्धि को बेहद अच्छा माना जा रहा है.

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ई-नाम पर एफपीओ का व्यापार बढ़ा ई-नाम पर एफपीओ का व्यापार बढ़ा

सरकारी ई-नाम (e-NAM) पर एफपीओ के व्यापार का दबदबा देखा जा रहा है. ई-नाम यानी कि इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट एक तरह का प्लेटफॉर्म है जहां किसान अपनी उपजों को आसानी से बेचते हैं. इस प्लेटफॉर्म पर फार्मर्स प्रोड्यूसर्स ऑर्गेनाइजेशन (FPO) का कारोबार तेजी से बढ़ा है. एक आंकड़ा बताता है कि इस साल तक ई-नाम पर एफपीओ का व्यापार पिछले साल की तुलना में दोगुना तक बढ़ा है. ई-नाम ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां किसान या व्यापारी अपने प्रोडक्ट को बिना किसी एजेंट या बिचौलियों की मदद से सीधा बेच सकते हैं. दरअसल, ई-नाम एक माध्यम है जो ऑनलाइन तरीके से खरीदार और विक्रेता को मिलाने का काम करता है. यहां एफपीओ विक्रेता है जिसमें किसान शामिल होते हैं. 

'बिजनेसलाइन' की एक रिपोर्ट में आंकड़े का हवाला देते हुए बताया गया है कि वित्त वर्ष 2023-24 में ई-नाम पर एफपीओ के जरिये की गई बिक्री में लगभग दोगुना तक उछाल आया है. इस साल ई-नाम पर जहां 42,875 टन की बिक्री की गई है, वहीं पिछले साल यह मात्रा 21,540 टन थी. हालांकि ई-नाम पर एफपीओ के जरिये की गई बिक्री का आंकड़ा बहुत छोटा है, लेकिन सालभर में इसमें आई वृद्धि को बेहद अच्छा माना जा रहा है. ई-नाम पर सभी तरह के कृषि उत्पादों की बिक्री लगभग 195 लाख टन रही है.

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ई-नाम को बढ़ावा

सरकार का मानना है कि एफपीओ के जरिये की गई बिक्री एक पॉजिटिव संकेत है क्योंकि इसमें लगातार वृद्धि देखी जा रही है. सरकार को उम्मीद है कि इसमें और तेजी से प्रगति देखी जाएगी क्योंकि एफपीओ और ई-नाम के लिए कई तरह के नए कदम उठाए गए हैं. अभी तक ई-नाम पर लगभग 3759 एफपीओ रजिस्टर हैं जबकि और भी संगठन इससे जुड़ने वाले हैं. ये संख्या और भी बढ़ सकती है क्योंकि सभी संगठनों को ई-नाम पर रजिस्टर करने की तैयारी चल रही है.

ई-नाम पर एफपीओ का व्यापार बढ़ने के पीछे कॉरपोरेट्स की बड़ी भूमिका बताई जा रही है. अब बड़ी कंपनियां एफपीओ से सीधा खरीद करती हैं क्योंकि इसमें किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं होती है. अब ये कंपनियां ई-नाम के माध्यम से एफपीओ से खरीद करती हैं. ई-नाम पर इंटर स्टेट ट्रेड पर राज्यों का नियंत्रण खत्म हो गया है, इसलिए खरीद-बिक्री का काम और भी आसान और तेज हो गया है. ई-नाम पर एफपीओ अपना माल कई प्राइवेट कंपनियों को सीधा बेच रहे हैं जिससे उनकी बिक्री बढ़ी है. 

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क्या है e-NAM

आपको बता दें कि राष्ट्रीय कृषि बाजार (NAM) 14 अप्रैल, 2016 को लॉन्च किया गया था जो कि एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है. यह पोर्टल पूरी तरह से केंद्र सरकार की ओर से फंडेड है और लघु किसान कृषि व्यवसाय कंसोर्टियम (SFAC) द्वारा इसे चलाया जाता है. देश के कृषि मंत्रालय के तहत एसएफएसी ई-नाम को चलाता है जिस पर एफपीओ अपने उत्पाद को बेचते हैं.