आलू का प्रतीकात्मक फोटो. 90 दिन में आलू की फसल तैयार हो जाती है. अभी आलू को 70 दिन पूरे हो चुके हैं. 20 दिन बाद फसल पूरी तरह से तैयार हो जाएगी. लेकिन जनवरी की सर्दी के 15 दिन आलू की फसल के लिए भारी है. ज्यादा कोहरा और हल्की सी भी बूंदा-बांदी फसल को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. आलू किसानों का कहना है कि बीते साल भी इन्हीं दिनों में हल्की बारिश ने आलू को जमीन के अंदर ही सड़ा दिया था. जनवरी के मौसम का अनुभव किसानों के लिए बहुत बुरा रहा है.
आगरा से सटे अलीगढ़-हाथरस में आलू के 50 किलो वजन वाले करीब 2.5 करोड़ पैकेट का उत्पादन होता है. मार्च से लेकर अक्टूबर तक यहां का 95 फीसद आलू दिल्ली-एनसीआर की बड़ी मंडियों आजादपुर, ओखला और गाजीपुर में सप्लाई होता है. थोड़ा बहुत आलू आगरा से भी जाता है. अक्टूबर के बाद फरवरी तक पंजाब, हल्द्वानी समेत दूसरे शहरों से आलू आना शुरू हो जाता है.
आलू किसान राजेश शर्मा ने किसान तक को बताया कि आलू की फसल को 70 दिन पूरे हो चुके हैं. फसल तैयार होने में 20 दिन का वक्त और रह गया है. अभी बीते एक हफ्ते से जिस तरह का मौसम है उससे आलू की फसल को संजीवनी मिली है. आलू की खूब ग्रोथ हुई है. इस मौसम में आलू का साइज भी खूब फलता-फूलता है और उत्पादन भी बढ़ता है. दिन में धूप और रात में कोहरा आलू के लिए दवाई का काम करता है. 90 फीसद आलू एक समान साइज का होता है. ऐसे आलू के बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं. चिप्स बनाने वाली कंपनियां भी एक समान साइज के आलू की डिमांड करती हैं. यही वजह है कि इस मौसम को देखकर सभी आलू किसान खुश हैं.
आलू के जानकार गिरधारी लाल का कहना है कि जब ज्यादा कोहरा पड़ने लगता है जिसे पाला भी कहते हैं तो आलू में झुलसा रोग लग जाता है. आलू की पौध पीली पड़ने लगती है. आलू की ग्रोथ कम हो जाती है. उत्पादन घट जाता है. अच्छे रेट भी नहीं मिल पाते हैं. जो सब्जियों में इस्तेमाल लायक आलू होता भी है तो उसके दाम बढ़ जाते हैं. वहीं बारिश आलू को सड़ा देती है. अगर फरवरी में भी बारिश हुई तो इससे आलू को बड़ा नुकसान पहुंचेगा. क्योंकि आलू की खुदाई फरवरी के आखिर में शुरू होती है.
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