
चीनी का उत्पादन बढ़ा (सांकेतिक तस्वीर)इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने एक रिपोर्ट में चीनी उत्पादन का ताजा आंकड़ा जारी किया है. इस्मा ने बताया है कि 31 मार्च, 2026 (SS 2025–26) तक, चीनी उत्पादन 272.31 लाख टन तक पहुंच गया है, जबकि पिछले साल इसी तारीख को यह 248.78 लाख टन था—यानी लगभग 9% ज्यादा. इस समय कुल 56 फैक्ट्रियां चालू हैं, जबकि पिछले साल इसी समय 95 मिलें चल रही थीं.
उत्तर प्रदेश: राज्य में अब तक 87.5 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो पिछले साल के उत्पादन के लगभग बराबर है. इस समय 28 मिलें चालू हैं, जबकि पिछले साल इसी तारीख को 48 मिलें चल रही थीं.
महाराष्ट्र और कर्नाटक: कर्नाटक में 47.90 लाख टन तक पहुंच गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह क्रमशः 80.26 लाख टन और 39.94 लाख टन था. इस समय दोनों राज्यों में लगभग 4 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जबकि पिछले सीजन की इसी अवधि में 7 मिलें चालू थीं.
खास बात यह है कि दक्षिण कर्नाटक की कुछ मिलों के जून/जुलाई से सितंबर 2026 तक चलने वाले विशेष सीजन के दौरान फिर से चालू होने की उम्मीद है. इसके अलावा, तमिलनाडु की कुछ मिलें भी इस विशेष सीजन में अपना काम जारी रखेंगी. नीचे दी गई तालिका में इस साल और पिछले साल के चीनी उत्पादन का राज्यवार ब्योरा दिया गया है:

इस्मा ने एक प्रेस रिलीज में कहा, जैसे-जैसे चीनी सीजन अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है, उद्योग को न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में जल्द बढ़ोतरी का इंतजार है. उत्पादन लागत में बढ़ोतरी और मिलों को मिलने वाली कीमत (ex-mill realizations) में कमी के कारण मिलों के कैश फ्लो पर काफी दबाव पड़ रहा है, जिससे गन्ने के बकाया भुगतान में बढ़ोतरी हो रही है.
ISMA ने मांग उठाते हुए कहा, फरवरी के मध्य तक, गन्ने का बकाया बढ़कर 16,087 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले साल 14,038 करोड़ रुपये था. मौजूदा लागत को देखते हुए MSP में समय पर बढ़ोतरी करना बहुत जरूरी है, ताकि मिलों की आर्थिक स्थिति सुधर सके, किसानों को समय पर भुगतान मिल सके और बाजार में स्थिरता बनी रहे—और साथ ही सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी न पड़े.
इसके साथ ही, कच्चे तेल के आयात की बढ़ती कीमतों को देखते हुए, इथेनॉल ब्लेंडिंग (ethanol blending) की प्रक्रिया को तेज करना भी बहुत जरूरी है. लगभग 2000 करोड़ लीटर (अनाज क्षेत्र सहित) की उपलब्ध उत्पादन क्षमता के साथ, इथेनॉल का ज्यादा इस्तेमाल आयात पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकता है. सरकार E20 से आगे बढ़कर E22, E25, E27 और E85/E100 तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप को तेजी से लागू करने पर विचार कर सकती है.
इस्मा ने कहा, गन्ने की बढ़ती कीमतों के अनुरूप इथेनॉल की उचित कीमत सुनिश्चित करना भी जरूरी है. इससे गन्ने पर आधारित कच्चे माल के बीच समानता बनाए रखने में मदद मिलेगी और इस क्षेत्र को लंबे समय के लिए नीतिगत स्पष्टता मिलेगी. LPG आपूर्ति में चल रही रुकावट के कारण कई होटल-रेस्टोरेंट का कामकाज कम हो गया है या वे अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं. इसकी वजह से चीनी की खपत कम हो गई है, जिससे चीनी उद्योग पर और भी ज्यादा दबाव बढ़ गया है.
समय पर किए गए नीतिगत उपायों के जरिए इन मुद्दों को हल करने से यह क्षेत्र अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर पाएगा, अपनी वित्तीय स्थिरता को मजबूत कर पाएगा, किसानों के हितों की रक्षा कर पाएगा, चीनी बाजारों को स्थिर कर पाएगा, और भारत की ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण आर्थिक विकास में सार्थक योगदान देना जारी रख पाएगा.
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