197 जिलों पर पड़ेगा El Nino का बुरा असर, खरीफ सीजन की खेती बचाने के लिए क्‍या है सरकार की तैयारी?

197 जिलों पर पड़ेगा El Nino का बुरा असर, खरीफ सीजन की खेती बचाने के लिए क्‍या है सरकार की तैयारी?

दुनियाभर में अल नीनो को लेकर च‍िंता का माहौल है, इस बीच भारत में 197 जिलों पर इसके सबसे ज्‍यादा असर की आशंका है, जिससे खेती पर बुरा असर पड़ सकता है. जानिए सरकार की इस पर क्‍या तैयारी है...

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197 जिलों पर पड़ेगा El Nino का बुरा असर, खरीफ सीजन की खेती बचाने के लिए क्‍या है सरकार की तैयारी?अल नीनो और खेती पर खतरा! (फाइल फोटो)

संभावित अल नीनो असर और कमजोर बारिश की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने देश के 197 जिलों को चिह्नित किया है, जहां इसका सबसे ज्‍यादा असर होगा. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा कि संभावित असर वाले क्षेत्रों में मध्य भारत का हिस्सा अधिक संवेदनशील माना जा रहा है. इसमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ जैसे क्षेत्र शामिल हैं. उन्होंने कहा कि ये इलाके बड़ी मात्रा में बारिश आधारित खेती पर निर्भर हैं और यहां दलहन और तिलहन उत्पादन होता है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इसे अंतिम स्थिति नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि मौसम अनुमान संभावनाओं पर आधारित होते हैं और हालात समय के साथ बदल सकते हैं. केंद्रीय कृषि मंत्री ने आगे बताया कि ऐसी मौसमीय परिस्थित‍ियाें की आशंकाओं को देखते हुए सरकार ने खास तैयारी शुरू कर दी है.

उन्‍होंने कहा कि मौसम संबंधी जोखिम को देखते हुए जिला स्तर तक कंटजेंसी प्लान तैयार किया जा रहा है, ताकि कम बारिश, बारिश के बीच लंबे अंतराल और फसल नुकसान जैसी स्थितियों से समय रहते निपटा जा सके.  मंत्री ने कहा कि मौसम को लेकर अभी केवल संभावनाएं जताई जा सकती हैं, लेकिन कृषि मंत्रालय ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है.  मंत्री ने कहा कि ऐसे 197 जिलों की पहचान की गई है, जहां सामान्य से कम बारिश की स्थिति बन सकती है. हर जिले के लिए अलग रणनीति बनाई जा रही है कि अगर बारिश कम हुई या बारिश के दो चरणों के बीच लंबा अंतर आया तो खेती को कैसे संभाला जाएगा. उन्होंने कहा कि खेती पर असर सिर्फ बारिश की मात्रा से नहीं, बल्कि उसके वितरण से भी पड़ता है. कई बार बोई गई फसल बारिश के लंबे अंतराल से प्रभावित हो जाती है, इसलिए वैकल्पिक तैयारी पहले से की जा रही है.

बीज रिजर्व से लेकर दोबारा बुआई तक की तैयारी

सरकार ने संभावित जोखिम को देखते हुए बीज प्रबंधन पर भी काम शुरू किया है. मंत्री ने बताया कि बीजों का 1 प्रतिशत भंडार रिजर्व रखा जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर दोबारा बुआई कराई जा सके. इसके साथ ही कम बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियों के लिए उपयुक्त बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है. किसानों को खेत बचाओ अभियान के तहत सलाह दी जा रही है कि जहां कम बारिश की संभावना हो वहां ज्यादा पानी मांगने वाली फसलें लगाने से बचें.

वैज्ञानिकों की टीम और राज्यों के साथ संयुक्त रणनीति

कृषि मंत्रालय ने तैयारी को जमीन तक पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर समन्वय तंत्र बनाया है. मंत्री ने कहा कि वैज्ञानिकों की 1687 टीम अलग-अलग जिलों और गांवों में जागरूकता का काम कर रही है. इसमें आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और राज्य प्रशासन की भागीदारी रखी गई है.

हर राज्य के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जो लगातार स्थिति पर नजर रखेंगे. मंत्री ने कहा कि वह खुद हर मंगलवार को समीक्षा बैठक कर रहे हैं, जिसमें मॉनसून की प्रगति, बारिश की स्थिति और अगले हफ्ते की संभावनाओं का आकलन किया जाता है.

खाद वितरण में टेक्नोलॉजी पर जोर

प्रेस वार्ता के दौरान खाद वितरण व्यवस्था पर भी सवाल पूछा गया. इस पर मंत्री ने कहा कि सरकार फार्मर आईडी के जरिए किसानों की भूमि और जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है, ताकि गड़बड़ी और डायवर्जन रोका जा सके.

हालांकि, उन्होंने साफ किया कि किसानों के लिए ऑफलाइन माध्यम से खाद लेने का विकल्प भी जारी रहेगा. राज्यों को नई तकनीक साझा की जाएगी, लेकिन जमीन पर क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी.

कृषि मंत्री ने कहा कि भारतीय कृषि कई क्षेत्रों में वैश्विक स्तर तक पहुंच चुकी है. उन्होंने कहा कि चावल उत्पादन में भारत दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच चुका है और गेहूं उत्पादन भी वैश्विक उत्पादकता स्तर के करीब है. उन्‍होंने कहा कि कई क्षेत्रों में भारत आगे बढ़ रहा है और कई मामलों में दूसरे देशों से सीखने की प्रक्रिया भी लगातार जारी है.

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